राम मंदिर: सुन्नी वक्फ बोर्ड को 20 करोड़ का ऑफर, श्री श्री को झटका
इस खुलासे के बाद मंदिर निर्माण के लिए आपसी बताचीत से हल निकालने की श्री श्री की कोशिश के लिए मुश्किलें पैदा हो सकती है। चैनल के स्टिंग में पक्षकार निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास मंदिर के बदले पैसे का ऑफर की बात कहते हुए दिख रहे हैं।
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नई दिल्ली। सुन्नी वक्फ बोर्ड को राम मंदिर बनाने में सहयोग करने पर 20 करोड़ रुपए तक ऑफर किया जा सकता है। ये खुलासा निजी चैनल के एक स्टिंग में हुआ है। इसके साथ ही आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर के मिशन राम मंदिर की कोशिशों को करारा झटका लगा है। एक चैनल ने अपने स्टिंग में ये दावा किया है कि मंदिर निर्माण के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को पैसों का ऑफर दिया जा सकता है। यह ऑफर 1 करोड़ रुपये से 20 करोड़ रुपये तक हो सकता है।

श्री श्री की कोशिशों को झटका
इस खुलासे के बाद मंदिर निर्माण के लिए आपसी बताचीत से हल निकालने की श्री श्री की कोशिश के लिए मुश्किलें पैदा हो सकती है। चैनल के स्टिंग में पक्षकार निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास मंदिर के बदले पैसे का ऑफर की बात कहते हुए दिख रहे हैं।उन्होंने कहा है कि लोगों की आपस में बातचीत हुई है कि वहां पर मंदिर बने। मस्जिद का मामला है तो वहां पर अपनी जमीन है। विद्या कुंद के पास वहां पर जमीन दे दी जाएगी। उन्होंने कहा है कि इसके लिए 1 करोड़ से लेकर 20 करोड़ रुपये दिए जा सकते हैं। जिससे उनकी खुशी से मंदिर बन जाए।

सुन्नी वक्फ बोर्ड ने श्री श्री रविशंकर से नहीं की बात
निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास ने कहा है कि समझौता इस आधार पर होगा कि वो मंदिर बनने दें। पैसे लेकर चुप हो जाए। स्टिंग में दास यह कहते हुए देखे जा सकते हैं कि सुन्नी वक्फ बोर्ड से बात की जाएगी और मुकदमे में खर्च पैसे भी दिए जाएंगे। इस बीच अयोध्या विवाद पर विभिन्न पक्षकारों से बात करने के लिए श्री श्री अयोध्या पहुंच गए हैं। बुधवार को सुन्नी वक्फ बोर्ड ने श्री श्री रविशंकर से मुलाकात करने से इनकार कर दिया था।

5 दिसंबर से सुप्रीम कोर्ट में होगी प्रतिदिन सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में 5 दिसंबर से अयोध्या मसले पर हर दिन सुनवाई होगी। इससे पहले 30 अक्टूबर, 2008 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विवादित भूमि को तीन हिस्सों में विभाजित करते हुए दो हिस्सों को राम मंदिर के पैरोकारों और एक हिस्सा बाबरी मस्जिद के पैरोकारों को सौंपने का आदेश किया था।

1950 से चल रहा है मामला
अदालत में ये विवाद 1950 से चल रहा है, यानी पिछले 67 वर्षों से इस विवाद का कोई हल नहीं निकल पाया है। देश के कई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और अदालतें इस विवाद का हल निकालने की कोशिश कर चुकी हैं। लेकिन कोई भी कामयाब नहीं हो पाया। किसी भी विवाद को सुलझाने के लिए 67 वर्ष बहुत ही लंबा समय होता है।
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