बहुत जल्द सोनिया-राहुल पर गिरेगा नटवर-बराड़ जैसा एक और बम

हमारा इस आंकलन का आधार यह है कि जब से नरेंद्र मोदी की सरकार बनी है, तब से लेकर अब तक हर 15 से 20 दिन के अंतराल में कोई न कोई कांग्रेसी या कांग्रेसियों के करीब रहा व्यक्ति सोनिया-राहुल के चुनावी हार के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रहा है।
कांग्रेसियों व उनके करीब रहे लोगों के सिलसिलेवार बयान
- चुनाव परिणाम के ठीक एक सप्ताह बाद मिलिंद देवड़ा ने राहुल गांधी की टीम को टार्गेट किया और कहा कि सलाह देने वालों के साथ-साथ सलाह लेने वाले भी कांग्रेस की हार के जिम्मेदार हैं।
- कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री टी एच मुस्तफा ने कहा कि चुनावों के दौरान राहुल ने जोकर की तरह हरकतें की और इसलिए पार्टी को इतनी शर्मनाक हार झेलनी पड़ी।
- फिर कांग्रेस के राजस्थान प्रदेश इकाई ने सरदार शहर के विधायक भंवरलाल शर्मा ने राहुल गांधी को जोकर करार दिया।
- दिग्विजय सिंह ने कहा कि राहुल गांधी में टेम्परामेंट की कमी है। उन्होंने इस बात को लोकसभा चुनाव में हार की वजह बताया।
यह तो थी चुनावी बयार। लेकिन इस बयार में जब-जब सोनिया-राहुल के खिलाफ बयान आये, तब तक भाजपा पर से मीडिया व जनता का फोकस हट गया। राजनीतिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि चूंकि अब पूरे देश की नजर भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के काम पर है और काम में कोई डिस्टर्बेंस नहीं हो, इसके लिये कांग्रेस के खुद के अंदर कलह जरूरी है।
लखनऊ के स्वतंत्र पत्रकार नवीन निगम का आंकलन कहता है कि हो सकता है कि भाजपा ने ही कांग्रेस के खिलाफ बयानबाजी को बढ़ावा दिया हो। आप देख सकते हैं कि शुरुआती बयानबाजी के बाद एक नियमित अंतराल के बाद ही आगे के बयान आने शुरू हुए हैं।
डैमेज कंट्रोल में फंसी रह जायेगी कांग्रेस
नटवर सिंह और लॉयन ऑफ पंजाब जगमीत सिंह बराड़ के बयान उसी कड़ी का हिस्सा जैसे प्रतीत होते हैं। ये सारी बयानबाजी भाजपा द्वारा प्रायोजितक हो सकती है, क्योंकि इससे फायदा सिर्फ उसी को हो सकता है। भाजपा कभी नहीं चाहेगी कि कांग्रेस अब दोबारा मजबूत हो।
भाजपा को अच्छी तरह पता है कि अगर कांग्रेस में ऐसी बयानबाजी जारी रही, तो डैमेज कंट्रोल में ही उसका फोकस रहेगा, और केंद्र के कार्यों पर से फोकस हट जायेगा। यही नहीं मिडिया का भी ध्यान कांग्रेस की तरफ ही रहेगा। और अगर यह आंकलन सही है, तो निश्चित तौर पर नटवर बम और बराड़ बम की तरह एक और बम बहुत जल्द सोनिया-राहुल पर गिरेंगे। आैर यह सिलसिला दिल्ली, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर आैर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव तक जारी रह सकता है।












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