सीपीएम के झंडे से क्यों नहीं ढका गया सोमनाथ चटर्जी का पार्थिव शरीर, जानिए वजह

नई दिल्ली। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और लंबे समय तक सीपीएम के नेता रहे सोमनाथ चटर्जी का सोमवार को निधन हो गया। उनके निधन के बाद पार्थिव शरीर को सीपीएम के झंडे की जगह देश के सबसे पुराने फुटबॉल क्लब मोहन बागान के झंडे से ढका गया। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि पूर्व लोकसभा अध्यक्ष का परिवार सीपीएम से काफी नाराज चल रहा है। दरअसल सोमनाथ चटर्जी को सीपीएम ने जुलाई 2008 में पार्टी से निष्कासित कर दिया था। पार्टी लाइन से अलग जाने की वजह से सीपीएम नेतृत्व ने ये फैसला लिया था। इसी फैसले की वजह से परिवार नाराज है।

सोमनाथ चटर्जी के परिवार ने लिया फैसला

सोमनाथ चटर्जी के परिवार ने लिया फैसला

10 बार लोकसभा सदस्य रहे सोमनाथ चटर्जी के परिवार ने पूरे मामले में बताया कि सीपीएम नेताओं ने उनके शरीर को पार्टी के झंडे से ढंकने की इजाजत मांगी थी, लेकिन हमने इससे इंकार कर दिया। परिजनों ने बताया कि 2008 में जिस तरह से सीपीएम ने सोमनाथ चटर्जी को पार्टी से निष्कासित किया इसे परिवार अभी तक स्वीकार नहीं कर सका है। इसी के चलते परिवार ने न तो उनके पार्थिव शरीर को सीपीएम कार्यालय जाने दिया और न ही पार्टी के झंडे से सोमनाथ चटर्जी का पार्थिव शरीर भी ढंका गया।

फुटबॉल क्लब मोहन बागान के झंडे से ढका पार्थिव शरीर

फुटबॉल क्लब मोहन बागान के झंडे से ढका पार्थिव शरीर

सोमनाथ चटर्जी का पार्थिव शरीर देश के सबसे पुराने फुटबॉल क्लब मोहन बागान के झंडे में इसलिए ढंका गया क्योंकि पूर्व लोकसभा स्पीकर इस क्लब के लंबे वक्त से सदस्य रहे। करीब 50 साल तक वो इस क्लब के मेंबर रहे हैं, जिसकी वजह से उनके झंडे से पार्थिव शरीर को ढका गया। साउथ कोलकाता में उनके निवास पर लोगों ने दिग्गज नेता को अपनी श्रद्धांजलि दी। सोमनाथ चटर्जी की इच्छा के मुताबिक उनके पार्थिव शरीर को एसएसकेएम अस्पताल को दान कर दिया गया।

10 बार लोकसभा सदस्य चुने गए

10 बार लोकसभा सदस्य चुने गए

बता दें कि लोकसभा के पूर्व स्पीकर और सीपीएम के पूर्व नेता सोमनाथ चटर्जी का सोमवार सुबह दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। सोमनाथ चटर्जी 2004 से 2009 तक लोकसभा के स्पीकर रहे। सोमनाथ चटर्जी दस बार लोकसभा के सांसद भी रहे। 1971 में वह पहली बार वो सांसद चुने गए। इसके बाद उन्होंने राजनीति में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।सोमनाथ चटर्जी का जन्म 25 जुलाई, 1929 को तेजपुर में हुआ था।

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