सोशल: गिरिराज का हमला, 'केजरीवाल जैसी मौज तो मुग़लों ने भी नहीं की'
केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन और दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तेजिंदर पाल बग्गा के एक नोट के सोशल मीडिया पर शेयर किए जाने के बाद विवाद गहरा गया है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल विवादों में हैं. मानहानि के मुकदमे को लेकर अदालत में उनकी लड़ाई केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से चल रही है.
और इस मुकदमे में उनकी पैरवी कर रहे हैं वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी. पैरवी के लिए जो फ़ीस वो ले रहे हैं, उसके भुगतान को लेकर बवाल मचा हुआ है.
जब केजरीवाल ने लगाए मोदी-मोदी के नारे
दिल्ली के स्थानीय चुनाव, केजरीवाल का इम्तेहान?
भाजपा का आरोप है कि केजरीवाल अपनी पैरवी के भुगतान के पैसे सरकारी ख़ज़ाने से दे रहे हैं जो आम आदमी का पैसा है.
केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन और दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तेजिंदर पाल बग्गा ने एक नोट सोशल मीडिया पर शेयर किया जिसके बाद विवाद गहरा गया.
भाजपा के नेता गिरिराज सिंह ने इस नोट को शेयर करते हुए टि्वटर पर लिखा, ''कमाल का आदमी है ये तो. दिल्ली में, दिल्ली की जनता के पैसे पर इतनी मौज तो शायद मुग़लों ने भी नहीं की होगी. सब मिलके केजरीवाल को प्रणाम कीजिए.''
उप राज्यपाल अनिल बैजल ने दिल्ली सरकार के विधि विभाग को चिट्ठी लिखी है. इसमें ये सवाल किया गया है कि क्या आम आदमी पार्टी की सरकार, वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी का बिल सरकारी ख़ज़ाने से चुका सकती है.
केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली की तरफ़ से दाख़िल मानहानि के मुकदमे में जेठमलानी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का बचाव कर रहे हैं.
इस नोट से ये ज़ाहिर होता है कि जेठमलानी के ऑफ़िस ने रीटेनर फ़ीस के रूप में 1 करोड़ रुपए और 22 लाख रुपए प्रति पेशी मांगे हैं.
नोट के मुताबिक दिसंबर 2016 में डिप्टी मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट को पत्र लिखकर ये सुनिश्चित करने को कहा कि जेठमलानी का भुगतान कर दिया जाए.
इसमें लिखा है, ''दूसरे पक्ष के पास कई सारे वक़ील हैं, ऐसे में ये ज़रूरी हो जाता है कि मुख्यमंत्री की नुमाइंदगी कोई वरिष्ठ वक़ील करें. इसलिए, इस मामले में राम जेठमलानी की नियुक्ति मंजूर की जाती है.''
आगे लिखा है, ''इस फ़ाइल को मंजूरी के लिए उप राज्यपाल के पास भेजने की ज़रूरत नहीं है.''












Click it and Unblock the Notifications