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Sister Abhaya Case:कैसे 28 साल बाद एक चोर की गवाही ने पादरी को ठहराया नन की हत्या का गुनहगार

नई दिल्ली- केरल (Kerala) में हत्या के 28 साल बाद एक नन को इंसाफ मिला है। यह अपने-आप में एक ऐसा अनोखा मामला था, जिसमें तकरीबन 16 साल तक मुकदमा आत्महत्या के ऐंगल के इर्द-गिर्द घूमता रहा। लेकिन, 16 साल बाद मामले ने अहम मोड़ लिया और ना सिर्फ एक बेगुनाह सिस्टर की हत्या साबित हो गई, बल्कि एक 'ईमानदार' चोर की वजह से कातिल भी पकड़े गए और उनको उनकी गुनाह के लिए सजा मिलने का रास्ता भी साफ हो गया। सबसे बड़ी बात ये है कि गवाही पर कायम रहने के लिए चोर को कोर्ट में अपने अपराध भी स्वीकार करने पड़े, लेकिन फिर भी वह पीछे नहीं हटा और एक बेगुनाह को इंसाफ दिलवाकर माना।

एक चोर की गवाही से सिस्टर अभया को मिला इंसाफ

एक चोर की गवाही से सिस्टर अभया को मिला इंसाफ

केरल के कोट्टयम (Kottayam)के सिस्टर अभया (Sister Abhya) की मौत के केस ने आखिरकार भारतीय नया व्यवस्था में एक नया अध्याय लिख दिया है। बचाव पक्ष ने जिस पेशेवर अपराधी की गवाही की छिछालेदार करके कातिलों को बचाने की कहानी गढ़ी, न्याय की देवी ने उस बनाई गई कहानी को सिरे से नकार दिया और भरी अदालत में असली कातिलों को बेनकाब कर दिया। गौरतलब है कि 28 साल पहले 27 मार्च, 1992 को सिस्टर अभया का शव एक कुएं से बरामद हुआ था। तब वो सिर्फ 21 साल की थीं। वो कोट्टयम के सेंट पायस कॉन्वेंट (st pius x convent) की होस्टल में रहती थीं।

16 साल तक सुसाइड थ्योरी के मुताबिक हुई जांच

16 साल तक सुसाइड थ्योरी के मुताबिक हुई जांच

शुरू में इस केस की जांच का जिम्मा केरल पुलिस की क्राइम ब्रांच को मिला। फिर मामले में सीबीआई (CBI) की एंट्री हुई। दोनों ने माना कि यह हत्या नहीं खुदकुशी का केस है। बाद में सीबीआई ने हत्या के नजरिए से तफ्तीश शुरू भी की लेकिन, वह कातिलों का पता लगाने में नाकाम हो रही थी। इस मामले में एक बड़ी बात ये रही कि अदालत 16 साल तक केस बंद करने के लिए तैयार नहीं हुई और उसने आगे जांच के आदेश दिए। आखिरकार 2008 में सीबीआई ने इस मामले में फादर थॉमस कोट्टूर (Father Thomas Kottoor), सिस्टर सेफी (Sister Sephy) और फादर जोस पूथिर

दोनों कातिलों को आपत्तिजनक अवस्था में देख लिया था

दोनों कातिलों को आपत्तिजनक अवस्था में देख लिया था

सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक उस सुबह सिस्टर अभया (Sister Abhya)करीब सुबह 4 बजे उठीं और होस्टल के कमरे से सीढ़ियों से उतरकर नीचे आई और फ्रिज से पानी लेने लगीं। तभी किचेन के अंदर से उसने कुछ आवाजें सुनीं, देखा तो दोनों अभियुक्त फादर थॉमस कोट्टूर (Father Thomas Kottoor)और सिस्टर सेफी आपत्तिजनक अवस्था में थे। दोनों ने सिस्टर अभया को देख लिया और फिर जब तक कि वो भाग पातीं उन्होंने फौरन उस पर जानलेवा हमला कर दिया। सिस्टर सेफी (Sister Sephy)किचेन से कुल्हाड़ी लाकर उनके सिर पर दे मारा। अभया वहीं पर गिर पड़ीं और उनके शरीर में जान नहीं बची।

सिस्टर अभया की साथी सिस्टर बयान से पलट चुकी थी

सिस्टर अभया की साथी सिस्टर बयान से पलट चुकी थी

जब सीबीआई की विशेष अदालत (Special CBI Court) में मर्डर केस का ट्रायल शुरू हुआ तो पहले दिन सिस्टर अभया(Sister Abhya) की होस्टल की साथी सिस्टर अनुपमा और दूसरे दिन पड़ोसी संजू पी मैथ्यू की गवाई हुई और वो दोनों अपने बयानों से पलट गए। सीबीआई के वकील ने अदालत में आरोप लगाया कि गवाहों को प्रभावित किया गया है। तीसरी तारीख थी 29 अगस्त, 2019 की। सीबीआई ने अपने तीसरे गवाह के तौर पर अदक्का राजू (Adakka Raju) को कोर्ट में पेश किया। राजू ने अदालत के सामने बिना लाग-लपेट के कहा कि 27 मार्च, 1992 को (सिस्टर अभया की जिस दिन लाश मिली थी) तड़के उसने सेंट पायस कॉन्वेंट के कंपाउंड में दो लोगों को देखा था, जिनमें एक फादर थॉमस कोट्टूर (Father Thomas Kottoor)भी थे।

चोर ने माना कि वह चोरी कर रहा था तब हत्यारे को देखा

चोर ने माना कि वह चोरी कर रहा था तब हत्यारे को देखा

सीबीआई की विशेष अदालत में गवाह राजू ने हत्या वाली सुबह का पूरा वाक्या बताया। उसने कोर्ट से कहा कि 'वह कॉन्वेंट की बिल्डिंग की छत पर लगे लाइटनिंग कंडक्टर से तांबा चुरा रहा था। इससे पहले भी दो बार वह तांबा चुराने के लिए इस इमारत की छत पर आ चुका था। उसने देखा कि दो लोग सीढ़ियों से ऊपर आ रहे थे। उनके हाथ में एक टॉर्च था और वो आसपास के इलाके की छानबीन कर रहे थे। उनमें से एक शख्स लंबा था और दूसरे फादर कोट्टूर (Father Thomas Kottoor)हैं, जो इस कोर्ट में मौजूद हैं। इनकी वजह से मैंने चोरी की योजना कैंसिल कर दी और वहां से भाग निकला।' राजू ऐसी ही गवाही एर्नाकुलम के कोर्ट में भी दे चुका था और वह सीबीआई कोर्ट में भी उससे नहीं पलटा।

अपना गुनाह कबूल करके भी कातिलों की पहचान की

अपना गुनाह कबूल करके भी कातिलों की पहचान की

इसके बाद गुनहगारों के वकील ने गवाह राजू को अदालत में एक पेशेवर अपराधी साबित करके उसकी गवाही को खारिज करवाने का तिकड़म शुरू कर दिया। उसने करीब 10 आपराधिक मामले सामने रखे, जिसमें राजू आरोपी था। राजू ने अपने आपराधिक इतिहास के आरोपों से इनकार नहीं किया। बचाव पक्ष के वकील का दांव उलटा पड़ा। राजू ने खुद के अपराधों को कबूल करके भी सिस्टर अभया (Sister Abhya)के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए अपनी गवाही पर अडिग रहा और इस तरह से 28 साल बाद एक मासूम नन को उसके साथ हुए गुनाह में इंसाफ का रास्ता साफ हो गया।

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