सिंधु संधि कब तक रहेगी स्थगित? भारत ने कर दिया बड़ा ऐलान, तब तक प्यासा ही न मर जाए पाकिस्तान!
India Pakistan Sindhu Water Treaty: भारत ने पाकिस्तान को दो टूक कह दिया है - 'अब पानी और खून साथ नहीं बहेंगे!' सिंधु जल संधि को निलंबित करने के 20 दिन बाद भारत ने मंगलवार (13 मई) को बड़ा ऐलान किया, जिससे पाकिस्तान का गला सच में सूख गया होगा। भारत ने पाकिस्तान को साफ संदेश दिया- आतंक छोड़े, वरना पानी भूले!
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद का समर्थन "विश्वसनीय और स्थायी रूप से" नहीं छोड़ता, तब तक सिंधु जल संधि पर रोक जारी रहेगी। ये एलान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को किया। उन्होंने कहा कि सिंधु जल संधि की भावना मित्रता और सहयोग की थी, लेकिन पाकिस्तान ने आतंकवाद के जरिए इस पर ठोकर मारी है।

कैसे बदला भारत का मूड?
22 अप्रैल को पहलगाम में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी हमले में 26 लोगों की जान गई थी। इसके बाद भारत ने कड़ा फैसला लिया और 23 अप्रैल को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने का निर्णय लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने खुद ऐलान किया - 'पानी और खून साथ नहीं बह सकते।'
क्या है सिंधु जल संधि?
साल 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) एशिया की सबसे जटिल जल समझौतों में गिनी जाती है। इसमें पंजाब की 6 नदियों के जल वितरण का समझौता हुआ - इसके तहत भारत तीन पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास, सतलुज) का पूरा उपयोग कर सकता है, जबकि तीन पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चेनाब) का नियंत्रण पाकिस्तान को दिया गया। यानी भारत, अपनी ही धरती से बहने वाली नदियों के पानी पर पूरा हक नहीं रखता, सिर्फ इसलिए कि पाकिस्तान को 'भूखा' न छोड़ दे। लेकिन अब सवाल उठता है-जिस मुल्क को हम पानी दे रहे हैं, वो हमें क्या दे रहा है? आतंक! अब भारत ने तय किया है कि पश्चिमी नदियों का पानी भी रोका जा सकता है, जिससे पाकिस्तान का जल संकट और गहरा जाएगा।
अब पाकिस्तान क्या करेगा?
भारत के इस एलान के बाद पाकिस्तान पर पानी को लेकर कूटनीतिक और घरेलू दबाव बढ़ जाएगा। पाकिस्तान पहले ही जल संकट से जूझ रहा है, और अब भारत की तरफ से आने वाला पानी भी अगर रुकेगा, तो उनकी 'प्यास' बढ़ जाएगी।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा दबाव
भारत ने हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई की। इसके बाद पाकिस्तान को अपनी रक्षा और कूटनीति - दोनों में झटका लगा। भारत ने यह साफ कर दिया कि जब तक पाकिस्तान आतंक के खिलाफ कड़ा एक्शन नहीं लेता, तब तक ना बातचीत होगी और ना ही कोई संधि।
बिन सिंधु संधि क्या होगा पाकिस्तान का?
- कृषि पर असर: पंजाब और सिंध प्रांत की ज़्यादातर खेती सिंधु प्रणाली पर निर्भर है। पानी रुका तो भूखमरी और किसान विद्रोह की स्थिति बन सकती है।
- आर्थिक पतन: IMF पहले ही पाकिस्तान की हालत पर चिंता जता चुका है। जल संकट आने से हालात और बिगड़ेंगे।
- सामाजिक अस्थिरता: अंदरूनी विद्रोह, बलूच आंदोलन, सिंध में अलगाववादी उभार और पानी संकट-ये सब मिलकर पाकिस्तान को अराजकता की दलदल में झोंक सकते हैं।
- राजनीतिक संकट: सेना बनाम सरकार का टकराव और पानी के मुद्दे पर जनता का आक्रोश-शहबाज़ शरीफ सरकार के लिए कालगति साबित हो सकता है।












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