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2014 के बाद से इन 16 दलों ने छोड़ा NDA का साथ, चार दे रहे धमकी

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नई दिल्‍ली। 2014 लोकसभ चुनाव में बंपर सीटों के साथ नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व में केंद्र की सत्‍ता में आने वाला राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का कुनबा लगातार घटता जा रहा है। पिछले दिनों असम गण परिषद (AGP) ने भी एनडीए से खुद को अलग कर लिया। एजीपी से पहले 15 पार्टियां पहले ही नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व वाले एनडीए से अलग हो चुकी हैं। इस प्रकार से अब तक मिलाकर 16 दल एनडीए छोड़कर जा चुके हैं। बात सिर्फ इन 16 दलों तक सीमित नहीं हैं बल्कि जैसे-जैसे 2019 लोकसभा चुनाव करीब आ रहे हैं, वैसे-वैसे एनडीए के कई और घटक दल भी अलग राह पकड़ने की धमकी दे रहे हैं। एनडीए का साथ छोड़ने की धमकी देने वाले इन दलों की संख्‍या चार है। मतलब अगर इन दलों ने भी साथ छोड़ा तो कुल 20 पार्टियां एनडीए से अलग जाकर अगले आम चुनाव में ताल ठोकेंगी।

अब ये दल दे रहे एनडीए से अलग होने की धमकी

अब ये दल दे रहे एनडीए से अलग होने की धमकी

बीजेपी की सबसे पुरानी सहयोगी शिवसेना एनडीए से अलग जाने की लगातार धमकी दे रही है। अमित शाह भी महाराष्‍ट्र में बीजेपी कार्यकर्ताओं को अकेले लड़ने के लिए तैयार रहने के लिए कह चुके हैं। इसके अलावा यूपी में यूपी में अपना दल (सोनेलाल) की अनुप्रिया पटेल भी बागी तेवर अपनाए हुए हैं। ओम प्रकाश राजभर और उनकी पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी भी अलग जा सकती है। मेघालय में नेशनल पीपुल्‍स पार्टी भी एनडीए से अलग जाने की धमकी दे रही है

सबसे पहले बिश्‍नोई ने किया था एनडीए से अलग जाने का ऐलान

सबसे पहले बिश्‍नोई ने किया था एनडीए से अलग जाने का ऐलान

एनडीए से घटक दलों के जाने का सिलसिला 2014 लोकसभा चुनाव में जीत के बाद ही शुरू हो गया था। सबसे पहले जिस पार्टी ने एनडीए का साथ छोड़ा उसका नाम है- हरियाणा जनहित कांग्रेस। पार्टी नेता कुलदीप बिश्‍नोई ने लोकसभा चुनाव के कुछ महीने बाद और हरियाणा विधानसभा चुनाव से ऐन पहले एनडीए से अलग होने का ऐलान किया था। बिश्‍नोई ने बीजेपी पर क्षेत्रीय पार्टियों को खत्‍म करने का आरोप लगाया था। साल 2014 के अंत में मरूमलारछी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (MDMK) ने दिसंबर में एनडीए छोड़ दिया था। इस पार्टी ने बीजेपी पर तमिलों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया था। MDMK वो दूसरी पार्टी बनी, जिसने एनडीए छोड़ दिया।

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले तीन दलों ने छोड़ा एनडीए का साथ

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले तीन दलों ने छोड़ा एनडीए का साथ

MDMK के बाद देसिया मुरपोक्‍कू द्रविड़ कषगम (DMDK) ने भी एनडीए से अलग जाने का फैसला किया। यह पार्टी 2014 लोकसभा चुनाव में एनडीए के साथ 14 सीटों पर लड़ी थी और सभी हार गई थी। इसी तरह एस रामदौस की पार्टी पीएमके ने भी एनडीए से नाता तोड़ा। इन तीनों दलों ने 2016 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए के साथ नाता तोड़ा।

आंध्र की एक और केरल की दो पार्टियों ने छोड़ा एनडीए

आंध्र की एक और केरल की दो पार्टियों ने छोड़ा एनडीए

तेलुगु सुपरस्‍टार पवन कल्‍याण ने 2014 लोकसभा चुनाव में एनडीए के लिए जमकर चुनाव प्रचार किया था, लेकिन वह भी ज्‍यादा दिन एनडीए में नहीं रह सके और उनकी जन सेना पार्टी भी गठबंधन से अलग हो गई। 2016 में ही केरल की रेवॉल्‍यूशनरी सोशलिस्‍ट पार्टी (Bolshevik) ने भी एनडीए छोड़ दिया। ट्राइबल लीडर सीके जनु की पार्टी जनाधिपत्‍य राष्‍ट्रीय सभा ने भी एनडीए से नाता तोड़ लिया है। पार्टी नेता सीके जनु ने आरोप लगाया कि केरल की आदिवासी जनता के लिए एनडीए ने जो वादे किए थे, उन्‍हें पूरा नहीं किया गया।

नगा पीपुल्‍स पार्टी के साथ 15 साल पुराना नाता टूटा, मांझी भी अलग गए

नगा पीपुल्‍स पार्टी के साथ 15 साल पुराना नाता टूटा, मांझी भी अलग गए

2017 में भी एनडीए से घटक दलों के जाने का क्रम चला और महाराष्‍ट्र की सहयोगी पार्टी- स्‍वाभिमान पक्ष ने अलग राह पकड़ ली। पार्टी चीफ और सांसद राजू शेट्टी ने मोदी सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाया और एनडीए से चले गए। 2018 में एनडीए के बिहार में घटक दल हिंदुस्‍तान अवाम मोर्चा ने खुद को अलग किया। इसके नेता बिहार के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने राज्‍यसभा सीट मांगी, जो उन्‍हें नहीं मिली तो उन्‍होंने भी अलग जाने का फैसला कर लिया। वह इस समय महागठबंधन में हैं। नगालैंड में बीजेपी ने नगा पीपुल्‍स फ्रंट के साथ 15 साल पुराना गठबंधन तोड़ दिया। हालांकि, बीजेपी ने नेशनलिस्‍ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के साथ अलायंस करके नगालैंड की सत्‍ता हासिल कर ली।

टीडीपी ने छोड़ा एनडीए, पीडीपी से बीजेपी ने लिया समर्थन वापस

टीडीपी ने छोड़ा एनडीए, पीडीपी से बीजेपी ने लिया समर्थन वापस

एनडीए के लिए सबसे बुरी खबर तब आई जब मार्च 2018 में तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने एनडीए का साथ छोड़ दिया। वह आंध्र के लिए विशेष राज्‍य का दर्जा मांग रहे थे, जो उन्‍हें नहीं मिला और वह अलग हो गए। टीडीपी के बाद पश्चिम बंगाल में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने एनडीए से समर्थन वापस ले लिया। इसके बाद कर्नाटक प्रज्ञानवंथा जनता पार्टी ने भी एनडीए से नाता तोड़ा। दिसंबर 2018 में राष्‍ट्रीय लोक समता पार्टी यानी रालोसपा ने एनडीए को छोड़ दिया। इसके अलावा मुकेश साहनी की विकासशील इंसान पार्टी भी एनडीए से अलग होकर लालू यादव के साथ महागठबंधन चली गई। जम्‍मू-कश्‍मीर में महबूबा मुफ्ती के साथ चल रही सरकार से 2018 में बीजेपी ने खुद को अलग कर लिया। इस प्रकार से पीडीपी भी एनडीए से बाहर हो गई।

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English summary
Since Modi became PM, 16 parties have quit the NDA and 5 more are threatening to leave
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