Simone Tata Lakme: 'लैक्मे' कैसे बना भारत का भरोसेमंद ब्यूटी ब्रांड? कैसे हुई शुरुआत? जानें कंपनी की नेटवर्थ
Simone Tata Lakme: रतन टाटा की सौतेली मां और नोएल टाटा की मॉम सिमोन टाटा का निधन हो गया है। खबर है कि आज यानी 5 दिसंबर 2025 (शुक्रवार) सुबह 90 साल की उम्र में उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली।
रतन टाटा की सौतेली मां सिमोन टाटा का हुआ निधन
बताया जा रहा है कि सिमोन टाटा पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं। कुछ समय पहले दुबई के किंग्स हॉस्पिटल में उनका इलाज भी चला था। सिमोन टाटा देश की जानी-मानी बिजनेसवुमेन थीं। उनके निधन से टाटा परिवार ही नहीं बल्कि देश के कॉरपोरेट जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

महिलाओं की जरूरतों को समझने वाला 'लैक्मे' ब्रांड
-सिमोन टाटा की मौत की खबर सामने आने के बाद से लोग उनके अहम ब्यूटी ब्रांड लैक्मे के बारे में सर्च कर रहे हैं। आपको बता दें कि भारत में अगर किसी ब्यूटी ब्रांड ने सबसे पहले महिलाओं की जरूरतों को सही मायने में समझा है तो वो लैक्मे ब्रांड है।
-आज ये नाम भारतीय कॉस्मेटिक्स इंडस्ट्री का सुपरब्रांड माना जाता है लेकिन इसकी कहानी सिर्फ एक बिजनेस जर्नी नहीं बल्कि भारत की आर्थिक सोच, महिलाओं की जरूरतों और टाटा साम्राज्य की दूरदृष्टि का अनोखा संगम है।
Lakme ब्रैंड की शिखर तक पहुंचने की कहानी
-कम ही लोग जानते हैं कि लैक्मे की नींव जेआरडी टाटा, पंडित जवाहरलाल नेहरू और फ्रांसीसी संस्कृति से जुड़ी मां लक्ष्मी की प्रेरणा से रखी गई थी। आइए आपको बताते हैं इस दिग्गज ब्रांड की रोचक शुरुआत और उसके शिखर तक पहुंचने की पूरी कहानी।
-स्वतंत्र भारत की अर्थव्यवस्था उस दौर में संघर्ष कर रही थी। उच्च गुणवत्ता वाले देसी ब्यूटी प्रॉडक्ट्स न के बराबर थे और विदेशी कॉस्मेटिक्स पर भारी धनराशि खर्च हो रही थी।
-जवाहरलाल नेहरू को चिंता हुई तो उन्होंने कहा- जब भारतीय महिलाएं अपनी सुंदरता के लिए विदेशी प्रॉडक्ट्स पर निर्भर हैं तो आखिर क्यों न भारत ही अपने कॉस्मेटिक्स बनाए?
-इसी विचार के साथ जवाहरलाल नेहरू ने अपने मित्र और टाटा समूह के चेयरमैन जेआरडी टाटा से ये चुनौती संभालने को कहा था। देश में कॉस्मेटिक्स का लगभग कोई मुकाबला नहीं था और जेआरडी टाटा ने तुरंत इसे एक सुनहरा अवसर समझा था।
लैक्मे की आधिकारिक शुरुआत (मेड इन इंडिया क्रांति)
-लैक्मे को TOMCO (Tata Oil Mills Company) की 100 फीसदी सब्सिडियरी के रूप में लॉन्च किया गया था। फ्रांस की दो प्रतिष्ठित कंपनियों- Robert Piguet और Renoir, ने सुगंध और तकनीक पर मार्गदर्शन दिया लेकिन इक्विटी में कोई हिस्सा नहीं था। ऐसे में शुरुआत से ही लैक्मे पूरी तरह भारतीय था।
-ब्रांड के नाम के सुझाव के लिए टाटा ने अपने फ्रांसीसी पार्टनर्स से कहा था। उन्होंने एक ऐसा नाम चुना जिसमें भारतीय और विदेशी दोनों की छाप हो। ऐसे में नाम रखा गया- Lakme (लैक्मे) जो पेरिस के मशहूर ओपेरा से प्रेरित था।
देवी लक्ष्मी पर आधारित है कंपनी का नाम
-ये ओपेरा देवी लक्ष्मी पर आधारित था जिन्हें फ्रेंच में लक्ष्मी (Lakme) कहा जाता है। इस तरह जन्म हुआ एक ऐसे ब्रांड का, जो समृद्धि, सुंदरता और भारतीय पहचान का प्रतीक बन गया।
-लैक्मे की शुरुआत मुंबई के पेद्दार रोड पर एक छोटे से किराए के ऑफिस में हुई थी लेकिन इसकी गुणवत्ता, सस्ती कीमत और भारतीय त्वचा के अनुरूप तैयार फॉर्मुले ने इसे तेजी से पॉपुलर बना दिया।
-साल 1960 तक कंपनी को बड़े सेटअप की जरूरत पड़ने लगी और उसका स्थान TOMCO की सेवरी फैक्ट्री में शिफ्ट कर दिया गया। फिल्म इंडस्ट्री ने भी लैक्मे को झट से अपना लिया। इसे देखते ही देखते आम महिलाओं के बीच भी भरोसे का ब्रांड बना दिया।
सिमोन टाटा ने लैक्मे को बनाया आइकॉनिक ब्रांड
-साल 1961 में कंपनी की कमान सिमोन टाटा ने संभाली। स्विट्जरलैंड में जन्मी सिमोन टाटा का स्टाइल सेंस और बिजनेस माइंड दोनों कमाल के थे। विदेशी सफर से वह नए ब्यूटी प्रॉडक्ट्स के सैंपल लाती थीं, उन्हें भारतीय जरूरतों के मुताबिक डेवलप करवाती थीं और इस तरह लैक्मे की क्वालिटी लगातार बेहतर होती चली गई।
-साल 1982 में सिमोन टाटा चेयरपर्सन बनी थीं और उनके नेतृत्व में लैक्मे देश का सबसे बड़ा और सबसे भरोसेमंद कॉस्मेटिक्स ब्रांड बन गया। लैक्मे की पॉपुलैरिटी सिर्फ प्रॉडक्ट क्वालिटी से नहीं बढ़ी बल्कि उसकी शानदार मार्केटिंग से भी बढ़ी। रेखा, हेमा मालिनी, जया प्रदा जैसी एक्ट्रेसेस लैक्मे के विज्ञापन चेहरों में शामिल थीं।
-ब्रांड की पहली मॉडल श्यामोली वर्मा थीं, जिन्होंने 80 के दशक में लैक्मे को नया आयाम दिया था। डिस्ट्रीब्यूशन की ताकत इतनी व्यापक थी कि हर वह कस्बा (20,000+ आबादी) जहां मार्केट था, वहां लैक्मे भी था।
-1980 में कंपनी ने पहला लैक्मे ब्यूटी सैलून खोला और प्रोफेशनल ब्यूटी सर्विसेज में भी उतर गई। महिलाओं के बाद पुरुषों के प्रॉडक्ट्स की रेंज लॉन्च किए गए, जो बेहद सफल रहे।
लैक्मे कब गई HUL के पास?
साल 1996 में टाटा और हिंदुस्तान यूनिलीवर के बीच 50:50 साझेदारी हुई। साल 1998 में पूरी हिस्सेदारी HUL को सौंप दी गई थी। टाटा समूह ने माना कि यूनिलीवर ही इस ब्रांड को भविष्य में और ऊंचाइयों पर ले जा सकता है, जो बाद में सच भी साबित हुआ।
70 से भी ज्यादा देशों में लैक्मे का कारोबार
आज लैक्मे प्रॉडक्ट की रेंज 100 रुपये से शुरू होती है। इसके लगभग 300 प्रॉडक्ट्स हैं और 70 से ज्यादा देशों में बिक रहे हैं। आज लैक्मे का 6 माह का ब्यूटी कोर्स भी है जो कि एक डिप्लोमा कोर्स है। गरीब लड़कियों के लिए स्कॉलरशिप प्रोग्राम और स्टार्टअप शुरू करने में मदद की भी पेशकश की जा रही है। लैक्मे फैशन वीक, लैक्मे शोज जैसे ईवेंट्स भी आयोजित किए जाते हैं।
लैक्मे की कुल नेटवर्थ
बिक्री और नई कंपनी
साल 1996 में टाटा ने Lakme को HUL को बेच दिया और इस पैसे से सिमोन टाटा ने ट्रेंट (Trent) कंपनी बनाई जो वेस्टसाइड (Westside) जैसे रिटेल ब्रांड चलाती है।
ट्रेंट की टोटल वैल्यूएशन
-इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार तब तक ट्रेंट (जिसमें Lakme की बिक्री से मिले पैसे लगे थे) का मार्केट कैप 1 लाख करोड़ रुपये (लगभग $12 बिलियन) तक पहुंच गया था जो दर्शाता है कि Lakme की विरासत आज भी बहुत बड़ी है।
-लैक्मे का टर्नओवर सीधे तौर पर एक नंबर में बताना मुश्किल है क्योंकि ये हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) का एक ब्रांड है और इसके लिए लैक्मे लीवर प्राइवेट लिमिटेड (Lakme Lever Pvt. Ltd.) की रिपोर्ट देखी जाती है, जिसके अनुसार वित्त वर्ष 2023 में इसका राजस्व बढ़कर 328 करोड़ रुपये हो गया था।
-इसमें 19.8 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई थी जो मुख्य रूप से सैलून कारोबार में सुधार के कारण थी। वहीं वित्त वर्ष 2024 के लिए अनुमानित राजस्व रेंज 100 करोड़ से 500 करोड़ रुपये के बीच बताई गई है।












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