कर्नाटक चुनाव में छाए रहे लिंगायत, वोक्कालिगा, जानें बाजी मारने वाले सिद्धू किस समुदाय से हैं?
कर्नाटक चुनाव में लिंगायत, वोक्कालिगा समुदाय खूब चर्चा में रहे। पूरा चुनाव इन्हीं दोनों समुदायों के इर्द-गिर्द घूमता रहा। ऐसे में ये जानना अहम होगा कि आखिर सिद्धारमैया जो सीएम बन रहे वो किस समुदाय से हैं?

Siddaramaiah belongs to which community? कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बहुमत का आंकड़ा पार कर बंपर जीत हासिल करने वाली कांग्रेस ने चुनाव परिणाम आने के चार दिन सिद्धारमैया को प्रदेश का नया मुख्यमंत्री बनाने का ऐलान कर दिया है। वहीं कांग्रेस के संकटमोचन कहे जाने वाले डीके शिवकुमार जो कि मुख्यमंत्री की रेस में शामिल थे, उन्हें कर्नाटक का उपमुख्यमंत्री बनाने का कांग्रेस ने ऐलान किया है।
कर्नाटक चुनाव से पहले और चुनाव के दौरान जो दो समुदाय चर्चा में रहे वो लिंगायत (Lingayat) और वोक्कालिगा (Vokkaliga) समुदाय थे। वहीं अब ये जानना मजेदार होगा कि आखिर सिद्धारमैया जिन्होंने डीके शिवकुमार को पछाड़ते हुए दोबारा मुख्यमंत्री की कुर्सी हासिल कर चुके हैं वो इन दोनों समुदाय से आते है या किसी और किसी अन्य समुदाय से उनका ताल्लुक है?
कर्नाटक चुनाव में छाए रहे लिंगायत और वोक्कालिगा समुदाय
याद रहे कर्नाटक में भाजपा ने जहां चुनाव के पहले इन दोनों समुदायों को आरक्षण देकर खुश करने के लिए जहां चुनाव से ठीक पहले राज्य में मुलसमानों को मिलने वाला चार फीसदी आरक्षण समाप्त कर दिया। दोनों समुदायों को दो-दो प्रतिशत आरक्षण देने का ऐलान किया। वहीं टिकट के बंटवारे में भी भाजपा ने ही नहीं कांग्रेस ने जतीय समीकरण के आधार पर वोट दिया, लेकिन भाजपा की कोई गणित काम नहीं आई और महज 66 सीटों पर जीत हासिल कर पाई।
कुरूबा समुदाय के सरदार सिद्धारमैया ने मारी बाजी
आपको जानकार ताज्जुब होगा कि सिद्धारमैया ना ही लिंगायत समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और ना ही वोक्कालिगा सुमुदाय से। सिद्धारमैया कर्नाटक के कुरुबा समुदाय (Kuruba Community) से ताल्लुक रखते हैं और वोक्कालिगा समुदाय के नेता डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी की रेस में पछाड़ कर मुख्यमंत्री की कुर्सी हासिल कर ली है। कुरुबा समुदाय के सरदार सिद्धारमैया दोबारा कर्नाटक के दोनों प्रमुख समुदायों को पछाड़ कर मुख्यमंत्री बनकर बाजी मार चुके हैं।
क्यों खास हैं कुरुबा समुदाय के सिद्धारमैया का सीएम बनना?
कर्नाटक में 17 प्रतिशत वोट लिंगायत के हैं वहीं वोक्कालिगा के 14 फीसदी वोट हैं , मुस्लिम वोट 12 प्रतिशत और सिद्धारमैया जिस समुदाय से आते हैं वो उस कुरुबा समुदाय का वोट प्रतिशत महज 9 प्रतिशत है। वोट बैंक में संख्या के आधार पर चौथे नंबर पर आन वाला कुरुबा समुदाय का सरदार सिद्धारमैया सब समुदाय को पछाड़ते हुए सीएम बनने जा रहो हैं।
लिंगायत और वोक्कालिगा की हिमायती भाजपा को ना माया मिली ना हनुमान
हर बार कर्नाटक चुनाव के दौरान राज्य की राजनीति प्रमुख समुदायों के आधार पर होती है। इस बार के चुनाव में भी ऐसा ही देखने को मिला। कर्नाटक में लिंगायत समुदाय बेहद अहम रहता है। भाजपा ने अपने दिग्गन नेता और पूर्व सीएम येदियुरप्पा के कारण लिंगायत समुदाय का खुद को हिमायती बताता रहा लेकिन उसे इस चुनाव में मात मिली। सीधे कहें तो भाजपा को इस चुनाव में ना माया मिली ना हनुमान।
किसान के घर में जन्में सिद्धारमैया बने सीएम
5 अगस्त 1947 को जन्में सिद्धारमैया मैसूर के एक साधारण से किसान परिवार के बेटे हैं। अभाव में बचपन और जवानी गुजारने के बाजवूद सिद्धारमैया होनकार स्टूडेंट थे। उन्होंने कर्नाटक बोर्ड परीक्षा में टॉप किया इसके बाद मैसूर विश्वविद्यालय से बीएसीसी और इसके बाद वकालत की पढ़ाई करते हुए एलएलबी की डिग्री हासिल की।
सिद्धारमैया के नाम पहले कार्यकाल में बनाया था ये रिकार्ड
सिद्धारमैया का नाम कर्नाटक के उन चार मुख्यमंत्रियों में से एक थे जिन्होंने बतौर मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल पूरा किया। 13 मई 2013 में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और 17 मई 2018 तक सीएम के तौर पर कार्यकाल पूरा किया। अब दोबारा सीएम बनकर प्रदेश की सत्ता संभालेंगे।
सिद्धारमैया का राजनीतिक करियर
- 1977 में लोक थाला पार्टी जार्ज फार्नाडिस के साथ ज्वाइन की
- 1983 में समंन्देश्वरी से पहली बार विधायक बने
- 1985 में इसी सीट से दोबार विधायक बने और मंत्री बनाए गए
- 1989 एम राजशेखर मूर्ति से चुनाव हार गए
- 1992 में जनता पार्टी के जरनल सेकेट्र्री बनाए गए
- 1994 में उप मुख्यमंत्री चुने गए
- 1996 दोबारा बनाए गए उप मुख्यमंत्री
- 1999 में जनता दल छोड़कर नई पार्टी शुरू की
- 2004 में दोबारा उप मुख्मयंत्री बनाए गए
- 2013 कर्नाटक के पहली बार मुख्यमंत्री बनाए गए, 22वें मुख्यमंत्री के तौर पर पांच साल तक कुर्सी संभाली
- 2018 में दो विधानसभा सीटों से चुनाव लड़े चामुंडेश्वरी और बदामी, केवल बादामी सीट से ही चुनाव जीत पाए
- 2023 में बादामी से चुनाव लड़े और एक बार फिर जीत हासिल की और दोबारा मुख्यमंत्री बनाए गए।
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