'मोबाइल भारी लगता है, लैपटॉप बिस्तर से गिरा देता हूं', भारतीय एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला को आखिर हुआ क्या?
Shubhanshu Shukla : भारत के लिए एक ऐतिहासिक पल तब आया जब 41 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद एक भारतीय ने अंतरिक्ष में कदम रखा। राकेश शर्मा के बाद अब शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla) ने Axiom-4 mission के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की यात्रा पूरी कर देश को एक बार फिर गर्व से भर दिया।
एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में शुक्ला ने इस 20 दिन की अविस्मरणीय यात्रा के अनुभव साझा किए और बताया कि पृथ्वी पर लौटने के बाद उन्हें सामान्य जीवन में लौटना कितना चुनौतीपूर्ण लग रहा है।

Shubhanshu Shukla space return: "मोबाइल भारी लगा, लैपटॉप गिरा दिया"
शुक्रवार, 1 अगस्त को प्रेस कॉन्फ्रेंस में शुभांशु शुक्ला ने बताया कि पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण में वापसी के बाद सबसे पहले जो अजीब लगा, वह था मोबाइल फोन का वजन। उन्होंने कहा कि "जिस फोन को हम दिनभर हाथ में रखते हैं, वह अचानक बहुत भारी लगने लगा।"
उन्होंने एक मजेदार घटना भी साझा करते हुए कहा - "मैंने अपना लैपटॉप पलंग के बगल में रख दिया यह सोचकर कि वह हवा में तैरता रहेगा, लेकिन वह सीधे गिर गया। शुक्र है कि नीचे कालीन था, वरना नुकसान हो सकता था।"
"भारत की दूसरी कक्षा की शुरुआत है यह"
शुक्ला ने गर्व से कहा, "41 साल बाद कोई भारतीय अंतरिक्ष गया। लेकिन इस बार यह एक अकेली छलांग नहीं थी, बल्कि भारत की दूसरी कक्षा (ऑर्बिट) की शुरुआत है। और अब हम सिर्फ उड़ने के लिए नहीं, बल्कि नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं।"
Axiom-4 मिशन की शुरुआत 25 जून को फ्लोरिडा स्थित केनेडी स्पेस सेंटर से हुई थी और 15 जुलाई को अंतरिक्ष यात्रियों की सफल वापसी के साथ यह ऐतिहासिक मिशन संपन्न हुआ। इस मिशन में शुक्ला ने न सिर्फ वैज्ञानिक प्रयोगों में भाग लिया बल्कि भारत के आगामी मानव अंतरिक्ष मिशन 'गगनयान' के लिए भी अहम जानकारियाँ जुटाईं।
शुक्ला ने बताया कि इस मिशन का सबसे यादगार क्षण वह था जब उन्होंने अंतरिक्ष से "भारत के प्रधानमंत्री" से बातचीत की। यह क्षण 28 जून को आया जब भारत का तिरंगा उनके पीछे तैर रहा था। "यह सिर्फ एक वीडियो कॉल नहीं थी, बल्कि यह उस क्षण का प्रतीक था जब भारत ने अंतरिक्ष संवाद में एक समान भागीदार के रूप में दोबारा प्रवेश किया," शुक्ला ने भावुक स्वर में कहा।
Gaganyaan Mission: गगनयान के लिए तैयारियां शुरू
शुक्ला ने बताया कि उन्होंने मिशन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सौंपा गया 'होमवर्क' भी पूरा किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने मिशन की हर गतिविधि को दस्तावेज़ीकृत किया है और वह भारत लौटने के बाद इन जानकारियों को साझा करेंगे। "मुझे पूरा विश्वास है कि यह सारी जानकारी भारत के गगनयान मिशन के लिए बेहद उपयोगी और अहम साबित होगी।"
मिशन की सफलता के बारे में बात करते हुए शुक्ला ने कहा कि यह उनकी उम्मीदों से भी अधिक रहा। "मैंने बहुत कुछ सीखा, और मुझे अब लगता है कि मेरा रोल सिर्फ एक यात्री का नहीं था - मैं एक दूत हूं जो यह दिखाने आया था कि क्या-क्या संभव है।"
अंतरिक्ष यात्रा के पीछे के मकसद पर बोलते हुए शुक्ला ने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि इस मिशन के पूरा होते ही उन्होंने देखा कि बच्चे अब पूछने लगे हैं - 'हम कैसे अंतरिक्ष यात्री बन सकते हैं?' यह इस मिशन की सबसे बड़ी सफलता है।
भारत लौटने की तैयारी
शुभांशु शुक्ला के अगस्त में भारत लौटने की संभावना है। देश उन्हें एक नए नायक के रूप में देख रहा है - एक ऐसा नायक जिसने अंतरिक्ष में भारत की मौजूदगी को फिर से दर्ज कराया है। शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष यात्रा न सिर्फ एक तकनीकी और वैज्ञानिक उपलब्धि है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय प्रेरणा भी है।
यह दिखाता है कि भारत अब वैश्विक अंतरिक्ष दौड़ में सिर्फ भागीदार नहीं बल्कि अगुवा बनने के लिए तैयार है। अब जब गगनयान की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है, शुक्ला जैसे अंतरिक्ष यात्रियों की भूमिका और भी अहम हो जाती है।
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