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IAF ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष यात्रा पर बहनों ने क्या कहा? बोलीं-भाई का मिशन सलामत रहे

Shubhanshu Shukla: भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा आज 25 जून 2025 से शुरू हो गई। शुक्ला ने अमेरिका के फ्लोरिडा से उड़ान भरी है।

शुक्ला की इस कामयाबी को लेकर उनके परिवार और देशवासियों में गर्व और उत्साह का माहौल है। अमेरिका की Axiom Mission 4 का हिस्सा बने शुभांशु शुक्ला की बहनों ने मिशन की सफलता और भाई की सलामती की कामना की है।

Shubhanshu Shukla IAF Astronaut Sisters

शुभांशु शुक्ला की बहन शुचि मिश्रा ने कहा, "हमें पूरा भरोसा है कि सबकुछ अच्छे से होगा। हम शांत हैं और उनके 15 दिन बाद सुरक्षित लौटने का इंतज़ार कर रहे हैं। हमारी उम्मीदें अब और बढ़ गई हैं। हम चाहते हैं कि वह और भी मिशनों में हिस्सा लें और देश का नाम रोशन करें।"

वहीं दूसरी बहन निधि मिश्रा ने कहा, "यह अनुभव बहुत अच्छा रहा। अब तक सभी चरण सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं। मैं चाहती हूं कि यह मिशन पूरी तरह से सफल हो।"

इस ऐतिहासिक मौके पर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि शुभांशु शुक्ला की यह उपलब्धि न केवल भारत की प्रतिष्ठा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा रही है, बल्कि यह भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं का भी प्रतीक है।

"आज भारत का नाम पूरी दुनिया में सम्मान के साथ लिया जा रहा है। अगर कोई भारतीय युवा विदेश में खुद को भारतीय बताता है, तो उसकी प्रतिष्ठा बढ़ जाती है - ऐसा पहले 2014 से पहले नहीं होता था।"

उन्होंने यह भी बताया कि भारत की अंतरिक्ष तकनीक अब सिर्फ रॉकेट लॉन्च तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल कृषि, स्वास्थ्य सेवा, टेलीमेडिसिन, आपदा प्रबंधन, पूर्वानुमान प्रणाली और खेतों की मैपिंग जैसे जनकल्याण के कार्यों में किया जा रहा है। भारत ने स्पेस टेक्नोलॉजी को 'Ease of Living' का माध्यम बनाकर विशिष्ट पहचान बनाई है।

यह भी पढ़ें- Axiom-4 Space Mission: स्पेस में जाने से पहले शुभांशु शुक्ला ने सुना था ऋतिक रोशन का ये गाना, क्या है कारण

डॉ. जितेंद्र सिंह ने आगे कहा कि शुभांशु शुक्ला के इस मिशन से भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए भी उपयोगी अनुभव प्राप्त होंगे। "यह अनुभव भविष्य के मिशनों के लिए भी महत्वपूर्ण होगा, जैसे चंद्रयान-4, भारत स्पेस स्टेशन (जिसे 2035 तक स्थापित करने की योजना है), और दीर्घकालिक अंतरिक्ष प्रवास के लिए जरूरी व्यवस्थाओं को लेकर।"

उन्होंने बताया कि शुभांशु द्वारा किए जाने वाले प्रयोगों से माइक्रोग्रैविटी में जीवन के लिए आवश्यक तकनीकी और वैज्ञानिक समझ विकसित की जा सकेगी, जो आगे चलकर मानव अंतरिक्ष अभियानों के लिए बेहद उपयोगी सिद्ध होगी। शुभांशु शुक्ला की यह उड़ान न केवल उनके परिवार के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि यह भारत की बढ़ती अंतरिक्ष शक्ति की भी प्रतीक है, जिसने वैश्विक मंच पर देश को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।

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