गैर-हिंदुओं को भी मिले श्री जगन्नाथ मंदिर में दर्शन का मौका: सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली: पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर में गैर-हिन्दुओं को प्रवेश ना करने की इजाजत की सदियों पुरानी परंपरा को खत्म करने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर प्रबंधन से कहा कि वह सभी के लिए इसे खोलने पर विचार करें। सुप्रीम कोर्ट द्वारा साथ ही ये भी कहा गया कि मंदिर प्रबंधन चाहे तो इसके लिए किसी ड्रेस कोड के बारे में विचार कर सकता है। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और एस अब्दुल नजीर की बेंच ने पहले के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि हिंदू धर्म किसी दूसरी विचारधारा को खत्म नहीं करता है। इसलिए मंदिर प्रबंधन को इस पर विचार करना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सरकार और केंद्र सरकार से कहा कि वह उन कठिनाइयों पर गौर करें जो दर्शन के लिए आने वाले लोगों के सामने आती हैं। जस्टिस गोयल ने केंद्र सरकार से कहा कि इस मामले में एक समिति का गठन दो सप्ताह में किया जाए, जो पुरी के जिला जज की रिपोर्ट में उठाए गए पहलुओं पर गौर करेगी। इसकी रिपोर्ट समिति को 31 अगस्त तक देनी होगी। 11वीं सदी में बना श्री जगन्नाथ मंदिर भगवान जगन्नाथ को समर्पित है, भगवान जगन्नाथ को भगवान विष्णु का रूप माना जाता है। कई अन्य हिंदू मंदिरों की तरह, गैर-हिंदुओं को प्रवेश को यहां भी प्रवेश की इजाजत नहीं है।
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सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि देश के सभी जिला जज अपने-अपने क्षेत्र में धार्मिक स्थलों पर लोगों के शोषण को रोकने को लेकर एक रिपोर्ट तैयार करें और संबंधित हाई कोर्ट को भेजें। सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सरकार से कहा कि वह वैष्णो देवी, सोमनाथ मंदिर, तिरुपति बालाजी व स्वर्ण मंदिर के प्रबंधन का अध्ययन करे और श्री जगन्नाथ मंदिर में उसी तरह की व्यवस्था को लागू कराए।
सुप्रीम कोर्ट उस पीआईएल पर सुनवाई कर रहा था जिसे मृणालिनी पी ने दायर किया था और उसमें कहा गया था कि श्री जगन्नाथ मंदिर के सेवक लोगों के साथ अभद्रता करते हैं और मंदिर का माहौल खराब है, लोगों का वहां शोषण किया जाता है।
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