शिवसेना ने भी किया किसानों के भारत बंद का समर्थन, कहा- देश की जनता भी आए साथ

नई दिल्ली। केंद्र सरकार की ओर से लाए गए नए कृषि कानूनों के खिलाफ आठ दिसंबर को बुलाए गए भारत बंद को महाराष्ट्र की सत्ताधारी पार्टी शिवसेना का भी समर्थन मिला है। शिवेसना के प्रवक्ता संजय राउत ने रविवार देर शाम ट्वीट कर पार्टी के किसानों के आंदोलन को समर्थन का ऐलान किया है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा है कि देश के सभी लोगों को अपनी मर्जी से किसानों के साथ आना चाहिए।

केंद्र सरकार के कृषि कानून के खिलाफ लगातार किसानों का प्रदर्शन बढ़ता ही जा रहा है. शनिवार को केंद्र सरकार और किसानों के बीच पांचवें दौर की बातचीत हुई है. हालांकि, किसानों ने बातचीत से पहले ही 8 दिसंबर को भारत बंद की घोषणा कर दी थी. अब किसानों के भारत बंद को कांग्रेस और बाकी कई पार्टियों ने भी अपना समर्थन दिया है. कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस ने 8 दिसंबर को भारत बंद का समर्थन करने का फैसला किया है.

संजय राउत ने अपने ट्वीट में लिखा है, देश के किसानों द्वारा पुकारे गए राष्ट्रव्यापी बंद को शिवसेना का समर्थन! किसान अन्नदाता हैं,इसलिए उनके प्रति हमारी नैतिक जिम्मेदारी के नाते देश की जनता को भी किसानों के बंद में स्वेच्छा से हिस्सा लेना चाहिए।शिवसेना किसानों की मांगों और 8 दिसंबर के भारत बंद में उनके साथ है। जय हिंद!

किसानों के भारत बंद और आंदोलन को विपक्षी के ज्यादातर दलों का समर्थन मिल रहा है। शिवसेना से पहले कांग्रेस, आप, टीआरएस समेत एनडीए से बाहर के ज्यादातर दल अपना समर्थन किसानों को दे चुके हैं। किसानों के समर्थन में रविवार को 11 दलों ने बयान भी जारी किया है। इसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, एनसी, आरजेडी, एनसीपी, डीएमके, एआईएफबी, आरएसपी, सीपीआई, सीपीआईएम, सीपीआईएमएल, पीएजीडी शामिल है। सभी ने बयान जारी कर कहा है कि हम किसानों के साथ खड़े हैं, किसान संगठनों के मौजूदा संघर्ष और उनके भारत बंद के ऐलान का हम समर्थन करते हैं।

केंद्र सरकार तीन नए कृषि कानून लेकर आई है, जिनमें सरकारी मंडियों के बाहर खरीद, अनुबंध खेती को मंजूरी देने और कई अनाजों और दालों की भंडार सीमा खत्म करने समेत कई प्रावधान किए गए हैं। इसको लेकर किसान जून से आंदोलनरत हैं। किसान हाल ही मे 26 नवंबर को पंजाब हरियाणा से दिल्ली की ओर कूच किए और 12 आठ दिन से किसान सिंधु बॉर्डर पर डटे हुए हैं। किसान संगठनों और सरकार के बीच हुई कई दौर की बातचीत से भी अभी कोई नतीजा नहीं निकलता दिख रहा है। किसानों का कहना है कि सरकार जमीनों और मंडी सिस्टम को बड़े कारोबारियों को सौंप रही है, जो हमें बर्बाद कर देगा। ऐसे में इनको तुरंत वापस लिया जाए। इसी को लेकर अब केंद्र सरकार के कृषि कानून के खिलाफ ही किसानों ने 8 दिसंबर को भारत बंद की घोषणा की है।

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