शेहला रशीद का राजनीति छोड़ने का ऐलान, बोलीं- कश्मीर में हो रही ज्यादती के विरोध में लिया फैसला

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर पीपल्स मूवमेंट पार्टी की नेता और जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी छात्रसंघ की पूर्व उपाध्यक्ष शेहला रशीद ने राजनीति से दूर होने का ऐलान किया है। शेहला ने कहा है कि केंद्र की सरकार जिस तरह से कश्मीर में लोकतंत्र और मानवाधिकारों का गला घोट रही है, उसे देखते हुए उन्होंने चुनावी राजनीति से दूर होने का फैसला किया है।

 कश्मीर में लोकतंत्र की हत्या

कश्मीर में लोकतंत्र की हत्या

शेहला का कहना है, कश्मीरियों के साथ हो रहे बर्ताव को मैं बर्दाश्त नहीं कर सकती। केंद्र सरकार अब दुनिया को चुनाव कराकर दिखाना चाहेगी कि अभी भी कश्मीर में लोकतंत्र है, लेकिन जो चल रहा है वह लोकतंत्र नहीं, उसकी हत्या है। कश्मीरियों को दो महीने से ज्यादा वक्त से जिस तरह कैद किया गया, वो उनके मानवाधिकारों का कत्ल करने जैसा है।

आर्टिकल 370 को लेकर केंद्र पर हमलावर हैं शेहला

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छात्र जीवन से अपना राजनीतिक करियर शुरू करने वाली शेहला इस साल मार्च में पूर्व आईएएस अफसर की पार्टी जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट (जेकेपीएम) में शामिल हुई थीं। अगस्त में केंद्र सरकार के जम्मू कश्मीर के विशेष राज्य का दर्जा खत्म करने के फैसले के बाद लगातार उन्होंने सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। शेहला ने कश्मीर मेंसेना पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप भी लगाए थे। उनके बयान को लेकर उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया था।

जेएनयू में राजनीति करते हुए चर्चा में आई थीं

जेएनयू में राजनीति करते हुए चर्चा में आई थीं

शेहला रशीद कश्मीर से आती हैं। 2014 में जवाहर लाल नेहरू छात्रसंघ के चुनाव में वो उपाध्यक्ष चुनी गई थीं। इस दौरान कई मुद्दों को लेकर वो काफी मुखर रही थीं। जिससे वो चर्चा में आई थीं। इसके बाद वो सक्रिय राजनीति में आ गई थीं।

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