कोरोना संकट: अर्थव्यवस्था पर प्रभाव को लेकर शरद पवार ने जनता को चेताया, दी ये सलाह
नई दिल्ली- पूर्व केंद्रीय मंत्री और एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने सोमवार को कोरोना संकट और लॉकडाउन से पैदा हुए हालातों को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर सीधी बातचीत की है। उन्होंने लोगों को आगाह किया है कि मौजूदा हालातों में देश की अर्थव्यवस्था पर गहरा संकट मंडरा रहा है, इसीलिए वो गैर-जरूरी खर्चों से बाज आएं। यही नहीं, उन्होंने लोगों को आगाह किया है कि कोरोना वायरस के प्रकोप को रोकने के लिए हर हाल में अपने घरों में ही रहें। खासकर उनका इशारा उन युवाओं को लेकर है, जो लॉकडाउन का जानबूझकर उल्लंघन करते देखे जा रहे हैं।
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गैरजरूरी खर्चों से बचें- शरद पवार
एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने सोमवार को कहा है कि कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते देश में व्यावसायिक गतिविधियां थम गई हैं। उन्होंने कहा है कि देश की अर्थव्यवस्था की हालत गंभीर है और विशेषज्ञों के मुताबिक जीडीपी 2 फीसदी तक नीचे गिर सकता है। इस दौरान पवार ने जनता से कहा है कि वे अपने गैरजरूरी खर्चों से बचें और संक्रमण को रोकने के लिए घरों में ही बंद रहें। उनके मुताबिक, "हमें देश पर छाने वाले आर्थिक संकट के प्रभाव के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि सभी तरह की व्यावसायिक गतिविधियां रुक गई हैं। आने वाले हफ्तों के लिए लोगों को गैरजरूरी खर्चों की आदत से बचना चाहिए, क्योंकि देश की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं लग रही है।" उन्होंने ये भी कहा कि, "मैं लोगों से ये भी अपील करता हूं कि घरों में ही रहें और कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकें। नहीं तो पुलिस को लोगों को अंदर रखने के लिए सख्ती का इस्तेमाल करना पड़ेगा।"

लॉकडाउन के दौरान घर में रहना जरूरी-पवार
इस दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री ने लॉकडाउन को गंभीरता से नहीं लेने वालों को भी आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा "हमें चीजों को गंभीरता से लेने की जरूरत है, खासकर उन युवाओं को जो बिना किसी आवश्यक कारणों के सड़कों पर मंडराते दिखते हैं। लोगों का सहयोग बहुत ही महत्वपूर्ण है।"इस मौके पर उन्होंने महाराष्ट्र के बारे में ये भी कहा कि "राज्य सरकार के पास अनाजों के पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध हैं। मैंने खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल से इसे अधिकतम लोगों तक वितरण को लेकर बात की है।" उनका कहना है कि कुछ ऐसे लोग हैं, जिनके पास राशन कार्ड नहीं है, लेकिन सरकार सभी जरूरतमंद लोगों तक अनाजों की सप्लाई सुनिश्चित करने की कोशिश करेगी।

चीनी मिल मालिकों से खास अनुरोध
पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा है कि महाराष्ट्र में चीनी मिल मालिकों से भी कहा गया है कि वो अपने मिलों में ही बुआई में लगे रहे श्रमिकों के लिए खाने और रहने का प्रबंध करें। क्योंकि, लॉकडाउन की वजह से ये मजदूर दो-तीन हफ्तों तक अपने घर नहीं लौट सकेंगे। महाराष्ट्र में करीब 170 चीनी मिलें हैं, जहां करीब एक लाख गन्ना काटने वाले मजदूरों को रोजगार मिलता है। ये लोग हर साल नवंबर और अप्रैल में इसके लिए मराठवाड़ा से पश्चिमी महाराष्ट्र का रुख करते हैं। गौरतलब है कि 22 मार्च को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर शाम 5 बजे कोरोना से लड़ने वाले अगली पंक्ति के सेनानियों के लिए ताली और थाली बजाई गई थी, तब पवार भी अपने घर के बाहर ऐसे कोरोना योद्धाओं का आभार जताते हुए नजर आए थे।












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