शाहीन बाग: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- धरना प्रदर्शन के लिए सार्वजनिक स्थलों को घेरना गैरकानूनी
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को शाहीन बाग विरोध प्रदर्शन मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि शाहीन बाग मामले में हमने दो सदस्यीय समिति बनाई थी जिसने रिपोर्ट भी दी थी, लेकिन फिर भी विरोध प्रदर्शन लगातार चलता रहा। इससे लोगों को काफी परेशानी हुई। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि आम रास्ते को अनिश्चित काल तक रोका नहीं रोका जा सकता, विरोध प्रदर्शन का अधिकार सिर्फ निर्दिष्ट क्षेत्रों में ही दिया जा सकता है। बता दें कि सीएए और एनआरसी को लेकर पिछले साल दिसंबर में दिल्ली के शाहीन बाग में जमकर विरोध प्रदर्शन हुआ। दिल्ली-नोएडा रास्ते पर हुए इस विरोध प्रदर्शन के चलते महीनों तक रास्ता बंद करना पड़ा था जिससे आम नागरिकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।

बता दें कि मामले की सुनवाई जस्टिस संजय किशन कौल की अगुवाई वाले बेंच कर रही है। बुधवार को जस्टिस कौल ने कहा, विरोध की भी एक सीमा होती है, सार्वजनिक स्थानों को धरना प्रदर्शन के लिए नहीं घेरा जा सकता, कानून के तहत यह स्वीकार्य नहीं है। ऐसे प्रदर्शन लोगों के लिए परेशानी का कारण बनते हैं। जस्टिस कौल ने कहा, मध्यस्थता का प्रयास भी शाहीन बाग को खाली कराने में सफल नहीं हुआ, लेकिन हमें कोई पछतावा नहीं है। सार्वजनिक बैठकों पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है, लेकिन उन्हें निर्दिष्ट क्षेत्रों में होना चाहिए।
न्यायाधीश संजय किशन कौल ने कहा, 'अदालत कार्रवाई की वैधता को मानती है और इसका मतलब प्रशासन को कंधा देना नहीं है। दुर्भाग्य से प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई और इस प्रकार हमें हस्तक्षेप करना पड़ा। उपयुक्त कार्रवाई करने के लिए प्रतिवादी पक्षों की जिम्मेदारी लेकिन इस तरह के कार्यों के लिए उपयुक्त परिणाम सामने आने चाहिए। संविधान विरोध करने का अधिकार देता है, लेकिन इसे समान कर्तव्यों के साथ जोड़ा जाना चाहिए। प्रशासन को किस तरीके से कार्य करना चाहिए यह उनकी जिम्मेदारी है और प्रशासनिक कार्यों को करने के लिए अदालत के आदेशों को नहीं छिपाना चाहिए।'
जस्टिस कौल ने आगे कहा, क्षेत्र को अतिक्रमण और अवरोधों से मुक्त करने के लिए प्रशासन को कार्रवाई करना चाहिए। विरोध प्रदर्शन के लिए सार्वजनिक स्थान पर इस तरह का कब्जा स्वीकार्य नहीं है। इस तरह के विरोध प्रधर्दश को सोशल मीडिया और खतरनाक बना देता है। विरोध के रूप में शुरू हुआ यह कार्यक्रम आज यात्रियों के लिए असुविधा का कारण बन गया। सार्वजनिक स्थानों पर अनिश्चित काल तक कब्जा नहीं किया जा सकता है।
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