बेंगलुरू: अपने घर पर मृत मिले IAS अधिकारी बीएम विजय शंकर, 4000 करोड़ के घोटाले का था आरोप
बेंगलुरू। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बीएम विजय शंकर मंगलवार की रात अपने बेंगलुरू स्थित घर पर मृत पाए गए हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि उन्होंने अपने घर में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली है। 4000 करोड़ रुपये आईएमए पोंजी घोटाले मामले में सीबीआई शंकर के खिलाफ मुकदमा करना चाहती थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, विजय शंकर ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी है।

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पुलिस ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि बेंगलुरू शहरी जिले के पूर्व उपायुक्त विजय शंकर जयानगर स्थित अपने घर पर मृत पाए गए हैं। पुलिस ने विस्तृत जानकारी दिए बिना कहा, 'ये सच है कि विजय शंकर अपने घर पर मृत मिले हैं।' बता दें विजय शंकर पर आईएमए पोंजी घोटाले पर पर्दा डालने के लिए कथित तौर पर रिश्वत लेने का आरोप है। उन्हें विशेष जांच दल की टीम ने बीते साल जुलाई में पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की गठबंधन सरकार के समय गिरफ्तार भी किया था। उनपर आरोप था कि उन्होंने आईएमए के मंसूर खान से 1.5 करोड़ रुपये की रिश्वत ली थी। बाद में विजय शंकर को जमानत पर रिहा कर दिया गया।
सूत्रों के मुताबिक, 59 वर्षीय आईएएस अधिकारी बीएम विजय शंकर जेल जाने के बाद से डिप्रेशन में थे। जब उनके आत्महत्या करने की खबर मिली तो पुलिस तुरंत उनके घर जांच करने पहुंची। जिसके बाद पुलिस ने इस बात की पुष्टि की कि विजय शंकर अपने घर पर मृत मिले हैं। आपको बता दें भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने इस मामले को बाद में सीबीआई के हवाले कर दिया था। सीबीआई से जुड़े सूत्रों का कहना है कि एजेंसी ने हाल ही में राज्य सरकार से शंकर और दो अन्य अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए अनुमति मांगी थी।
पोंजी घोटाला क्या है?
पोंजी घाटाले का मुख्य आरोपी मोहम्मद मंसूर खान है, जिसने साल 2006 में आईएमए नाम से एक कंपनी की शुरुआत की। कंपनी का संचालन बेंगलुरू के कुछ जिलों में होता था। जिसमें कंपनी ने लोगों से निवेश के नाम पर धोखाधड़ी का काम करना शुरू कर दिया। कंपनी पर आरोप लगा कि उसने लोगों को 17 से 25 फीसदी तक की बचत का लालच देकर पैसे निवेश करवाए थे लेकिन जब लोगों को उनका पैसा रिटर्न के साथ देने का समय आया को मंसूर खान फरार होकर दुबई चला गया। हालांकि बाद में उसे प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया।












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