'मिशन राजभवन' के नाम पर बुजुर्ग नेताओं को पैवेलियन भेजेगी भाजपा

सम्मानपूर्ण विदाई के लिए भाजपा प्रदेश में राज्यपालों की फेहरिस्त बना रही है। इस फेहरिस्त में पार्टी 75 वर्ष से अधिक नेताओं को वरीयता दे रही है। हालांकि इसमें कुछ ऐसे नेता भी है जिनकी उम्र 75 से कम ही है।
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संघ के निर्देश के बाद 75 वर्ष से अधिक उम्र के नेताओं की सम्मानपूर्वक विदाई देने की तैयारी पहले से ही चल रही थी लेकिन अब सरकार बनते ही इस पर अधिक सक्रियता दिखाई देने लगी है। सरकार और संगठन दोनों ही संघ के निर्देश को अमली जामा पहनाने में लग गए हैं। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार कई राज्यों में राज्यपालों को बदलने पर विचार कर रही है और केंद्रीय मंत्री नहीं बनाए गए वरिष्ठ भाजपा नेताओं को इन राज्यों की बागडोर सौंपी जा सकती है।
सूत्रों के मुताबिक पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्री मुरली मनोहर जोशी को के शंकरनारायणन के स्थान पर महाराष्ट्र का राज्यपाल बनाया जा सकता है। हालांकि इस पर मुरली मनोहर जोशी की रजामंदी मांगी जा रही है और मुरली मनोहर जोशी ने अभी तक इस बारे में अपना निर्णय नहीं दिया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय कुमार मल्होत्रा को कर्नाटक में हंसराज भारद्वाज की जगह राज्यपाल बनाकर भेजा जा सकता है।
सूत्रों ने बताया कि इन दो वरिष्ठ नेताओं के अतिरिक्त पार्टी से अलग जाकर राजस्थान की बाड़मेर लोकसभा सीट से चुनाव लड़े पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह को तमिलनाडु में के. रोसैया के स्थान पर गवर्नर बनाया जा सकता है। हालांकि जसवंत सिंह के नाम पर पार्टी में अभी भी सहमति नहीं बन पा रही है। पार्टी का एक वर्ग मानता है कि पहले पार्टी में उनको लिया जाए इसके बाद ही जसवंत ंिसह को राज्यपाल का कमान दिया जाए।
पार्टी सूत्रों के अनुसार उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के ही एक अन्य वरिष्ठ नेता लालजी टंडन तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा के नामों पर भी राज्यपाल बनाए जाने को लेकर पार्टी में चर्चा चल रही है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी का नाम भी इस फेहरिश्त में शामिल है। जिन नेताओं को पार्टी ने इस बात का आश्वासन दिया था कि सरकार बनने पर भविष्य में उनकी सम्मान की रक्षा की जाएगी ऐसे नेताओं को तरजीह दी जा रही है।
इस फेहरिस्त में लालमुनि चौबे का नाम भी शामिल है। उल्लेखनीय है कि आम तौर पर राष्टï्रीय पार्टियां सरकार बनते ही राज्यों में वरिष्ठ नेताओं को राज्यपाल बनाने पर जोर देने लगती है ताकि राज्यों पर परोक्ष रूप से पार्टी का बोलबाला हो। इस परंपरा के अनुरूप ही भाजपा भी कई नेताओं की फेहरिस्त तैयार कर रही है।
जिन राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं उनकी ओर से भी राज्यपाल को बदले जाने का दबाव बनाया जा रहा है, ताकि अपनी पसंद का राज्यपाल होने से कई सरकारी विधेयकों पर आसानी से राजभवन की रजामंदी हासिल हो जाए। संप्रग शासन के दौरान कई विपक्षी दलों की यह शिकायत रहती थी कि कई विधेयकों को राजभवन से मंजूरी न मिल पाने के कारण राजभवन और सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनती रही है।
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