कपिल सिब्बल की टिप्पणी के बाद नया विवाद खड़ा, सुप्रीम कोर्ट में बताया म्यांमार का हिस्सा था असम

Kapil Sibal on Assam: राज्यसभा सांसद और सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने असम को लेकर की गई अपनी टिप्पणी के बाद विवाद खड़ा कर दिया है। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि असम मूल रूप से म्यांमार का हिस्सा था।

शीर्ष अदालत में नागरिकता अधिनियम, 1955 के 6ए को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने यह जानकारी सुप्रीम कोर्ट में दी थी।

Kapil Sibal

दरअसल, असम में इन दिनों धारा 6ए को लेकर बहस चल रही है। ऐसे में कई याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में सीटिजनशिप एक्ट 1955 की धारा 6ए को चुनौती दी थी। जिस पर सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ और चार अन्य जजों की बेंच सुनवाई कर रही थी।

ऐसे में अब वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने असम को लेकर बड़ा दावा किया और कहा कि यह म्यांमार का हिस्सा हुआ करता था।

जानिए कोर्ट में क्या बोले सिब्बल?

उन्होंने पूरे इतिहास में जनसंख्या का पता लगाने की जटिलता पर सुप्रीम कोर्ट को बताया कि, "इतिहास में भी लोगों का असम में आना जाना लगा रहा है और इसको अलग से मैप नहीं किया जा सकता। अगर आप असम का इतिहास देखें यही लगेगा कि असम में आने वालों के बारे में पता लगाना बेहद मुश्किल है।"

'असम म्यांमार का हिस्सा था'

उन्होंने कोर्ट से कहा कि अगर 1824 से पहले की बात करें तो असम म्यांमार का हिस्सा था। इसके बाद जब ब्रिटिश लोगों ने इस क्षेत्र के कुछ हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया था, तब एक संधि की गई थी जिसके द्वारा असम को ब्रिटिशों को सौंप दिया गया था। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि उस समय वहां के लोग ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ किस तरह का प्रदर्शन कर सकते थे।"

सिब्बल के इस दावे के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। जिस पर असम सरकार की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। असम सरकार के प्रवक्ता पियूष हजारिका ने अपने बयान में कहा कि महाभारत काल से ही असम भारतवर्ष का हिस्सा था।

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