नागरिकता बिल पर असम में तनाव, सीएम बोले- 'गलत सूचना से हालात बिगाड़ने की कोशिश'
गुवाहाटी। लोकसभा और राज्यसभा में बुधवार को नागरिकता संशोधन बिल पास हो गया है। इसे लेकर उत्तरपूर्वी राज्यों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। सबसे ज्यादा हालात असम में खराब हैं। जहां अगले 48 घंटे तक इंटरनेट सेवा बंद है और पुलिस को भीड़ को तितर बितर करने के लिए फायरिंग भी करनी पड़ी है।

इस बीच असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा, 'मैं असम के सभी लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करता हूं। यह हमारी सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक परंपरा है। मेरा दृढ़ विश्वास है कि हमेशा की तरह असम के लोग आने वाले समय में शांति बनाए रखेंगे।'
मुख्यमंत्री ने आगे कहा, 'गलत सूचना और भ्रामक प्रचार के माध्यम से असम में स्थिति को कुछ लोगों का समूह बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है। लोगों से कहा जा रहा है कि 10 से 15 मिलियन लोग असम में नागरिकता लेने वाले हैं। ये गलत प्रोपेगेंडा है।'
मुख्यमंत्री ने कहा, 'मैं विश्वास दिलाता हूं कि पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने बहुत स्पष्ट रूप से कहा है कि केंद्र असम के लोगों के लिए पत्र और भावना के खंड 6 को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि असम के लोगों को राजनीतिक, सांस्कृतिक रूप से संवैधानिक सुरक्षा प्रदान की जा सके।'
क्या है बिल?
गलत सूचना और भ्रामक प्रचार के माध्यम से असम में स्थिति को कुछ लोगों का समूह बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है। लोगों से कहा जा रहा है कि 10 से 15 मिलियन लोग असम में नागरिकता लेने वाले हैं। ये गलत प्रोपेगेंडा है।
गैर मुस्लिम समुदाय के लोग अगर एक साल से 6 साल तक भारत में शरणार्थी बनकर रहे हैं तो उन्हें भारतीय नागरिकता दे दी जाएगी। इससे पहले 11 साल रहने पर नागरिकता दी जाती थी। ये लोग अवैध तरीके से प्रवेश करने के बावजूद नागरिकता पाने के हकदार होंगे।
साथ ही बिल में नागरिकता में मिलने के लिए जो बेस लाइन है, वह 31 दिसंबर, 2014 रखी गई है। यानी इस समय अवधि के बाद इन तीन देशों से आने वाले 6 समुदायों के लोगों को 6 साल तक भारत में रहने के बाद नागरिकता मिल जाएगी। हालांकि इसी बिल में तीन देशों से आए मुस्लिम शरणार्थियों को शामिल नहीं किया गया है।












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