1 साल के भीतर खत्म हो सांसदों-विधायकों से जुड़े मामले: SC

इस अहम फैसले के बाद आपराधिक मामलों में सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामलों की सुनवाई में तेजी लाने का आदेश देते हुए उच्चतम न्यायालय ने आज निचली अदालतों के लिए ऐसे मामलों की सुनवाई आरोप तय होने के एक साल के भीतर भीतर पूरी करने की समय सीमा तय की।
Did You Know: पूर्व रेलमंत्री एलएन मिश्र मर्डर केस की फाइल 11 हजार पन्नों की है।
न्यायाधीश आरएम लोढा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने आदेश सुनाते हुए कहा कि यदि सुनवाई एक साल के भीतर पूरी नहीं होती है तो सुनवाई अदालत को संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को इसका कारण बताना होगा। अगर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुनवाई अदालत के जज द्वारा दी गई दलील से संतुष्ट हो जाते हैं, तो वह इस मामले की समय सीमा बढ़ा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सांसदों और विधायकों पर चलाए जा रहे आपराधिक मामलों की सुनवाई रोज होनी चाहिए ताकि मामले पर फैसला जल्द आ सके।
कोर्ट ने अपने इस आदेश के पीछे दलील दी कि सांसदों और विधायकों पर सालों तक ऐसे मामलों की सुनवाई लंबित रहती है और जघन्य अपराधों में आरोपित होने के बावजूद सांसद विधायक विधायी संस्थाओं की सदस्यता हासिल किए रहते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक गैर सरकारी संगठन पब्लिक इंटरेस्ट फाउंडेशन द्वारा दायर की गई एक जनहित याचिका पर यह आदेश दिया है। गैर सरकारी संगठन ने सांसदों की संलिप्तता वाले मामलों की सुनवाई में तेजी लाने का निर्देश दिए जाने की अपील की थी।
Did You Know: 2 जुलाई 1975 को बिहार में रेल उद्घाटन के लिए गए रेलमंत्री ललित नारायण मिश्र की हत्या कर दी गई। इस मामले में कोर्ट की सुनवाई में हो रही देरी एक नया रिकॉर्ड है। सप्रीम कोर्ट ने ललित नारायण मिश्र हत्याकांड मुकदमे की सुनवाई में देरी पर सन् 2011 में ही आश्चर्य प्रकट करते हुए इस संबंध में स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। इस केस के दस्तावेज 11 हजार पन्नों में हैं और 39 में से 31 गवाह मर चुके हैं।












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