सुप्रीम कोर्ट का आदेश, NEET 2018 में सभी भाषाओं में एक समान हो प्रश्नपत्र
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से एक हलफनामा दायर करने को कहा है जिसमे ये लिखा गया हो कि भविष्य में होने वाले नीट परीक्षाओं में प्रश्न एक समान होंगे।
नई दिल्ली। देश में होने वाली मेडिकल कोर्स में दाखिले के लिए सबसे बड़ी परीक्षा NEET के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई के फार्मूले पर सवाल उठाया है। कोर्ट ने कहा है कि सभी नीट परीक्षाओं के लिए प्रश्न एक समान होना चाहिए। लैंग्वेज के आधार पर प्रश्नों में बदलाव के फार्मूले पर सुप्रीम कोर्ट राजी नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से एक हलफनामा दायर करने को कहा है जिसमे ये लिखा गया हो कि भविष्य में होने वाले नीट परीक्षाओं में प्रश्न एक समान होंगे। 2017 की नीट परीक्षा अंग्रेजी और हिन्दी के अलावा पहली बार आठ क्षेत्रीय भाषाओं में ली गई थी। उस समय ये बात सामने आई थी कि इंग्लिश और हिंदी के लिए जहां प्रश्नपत्र एक जैसे थे तो वहीं दूसरी भाषाओं में प्रश्नपत्र अलग थे। जिसको लेकर छात्रों ने सवाल उठाया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अलग भाषा के अलग प्रश्न पत्र की वजह से रेंकिंग पर असर पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने NEET परीक्षा को कैंसल करने की याचिका को खारिज कर दिया है। उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार के इस कथन पर विचार किया कि वह मेडिकल पाठ्यक्रमों के 2018-19 के शैक्षणिक सत्र से नीट प्रवेश परीक्षा में उर्दू भाषा को भी शामिल करने के लिये तैयार है।
2017 की नीट परीक्षा में नौ लाख छात्रों ने इंग्लिश में नीट की परीक्षा दी थी तो वहीं 1.5 लाख छात्रों ने हिंदी में और दूसरी भाषाओं में यह परीक्षा दी थी। इंग्लिश और हिंदी के लिए जहां प्रश्नपत्र एक जैसे थे तो वहीं दूसरी भाषाओं में प्रश्नपत्र अलग थे। सीबीएसई का कहना है कि इसने अलग-अलग भाषाओं में प्रश्नपत्र तैयार कराया था ताकि यह लीक न हो सके और पूरी परीक्षा को निरस्त न करने पड़े। अब सुप्रीम कोर्ट ने सभी भाषाओं के प्रश्नपत्र को एक समान रखने को कहा है।












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