तेलंगाना के गठन पर रोंक नहीं लगाएगा सुप्रीम कोर्ट

न्यायमूर्ति एच.एल. दत्तू और न्यायमूर्ति एस.ए. बोबडे की पीठ ने कहा कि इस मामले की सुनवाई एक वृहत्तर संविधान पीठ में होनी चाहिए क्योंकि इसमें संवैधानिक मुद्दा शामिल है और बड़ी पीठ ही यह तय कर सकती है कि तेलंगाना के गठन को रोका जाए या नहीं।
20 फरवरी 1956 को तेलंगाना का आंध्र प्रदेश में विलय हो गया था।
यह ध्यान देने योग्य है कि आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एन. किरण कुमार रेड्डी सहित कई अन्य लोगों ने याचिका दायर की थी कि तेलंगाना का गठन संविधान के प्रावधानों के खिलाफ है। राज्य का गठन करने के लिए राज्य विधानसभा के विचारों को तवज्जो दी जानी चाहिए। संसद को किसी भी राज्य के गठन में असीमित शक्तियों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
याचिका में संविधान का भी हवाला दिया गया है, कि अनुच्छेद 3 के अनुसार राज्य की सीमाओं में बदलाव किया जा सकता है, पर राज्य को खत्म नहीं किया जा सकता है।
Did you know: पहले तेलंगाना और आंध्र प्रदेश अलग अलग राज्य थे लेकिन दोनों ही राज्यों का विलय 20 फरवरी 1956 को कर दिया है, जिसमें तेलंगाना के हितों के संरक्षण की बात की गई थी।












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