जीवनसाथी अब साबित कर पाएंगे 'बेवफाई' को कोर्ट में
नई दिल्ली। जीवनसाथी की बेवफाई को साबित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक नया विकल्प दे दिया है। अब जीवनसाथी ने अगर आपके साथ बेवफाई की है तो इसको साबित किया जा सकेगा। इसकी इजाजत खुद सुप्रीम कोर्ट ने दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जीवनसाथी की बेवफाई को पुख्ता तौर पर सिद्ध करने के लिए बच्चे की डीएनए जांच की इजाजत होगी।

कोर्ट ने कहा है कि पत्नी के विरोध के बावजूद बच्चे के डीएनए जांच की जा सकेगी। न्यायमूर्ति जेएस केहर की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह निर्णय दिया है। जिसके तहत बच्चे के डीएनए जांच किया जा सकता है। दरअसल, एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी पर बेवफाई का आरोप लगाते हुए कहा था कि उसकी पत्नी के किसी दूसरे व्यक्ति के साथ संबन्ध हैं।
व्यक्ति ने याचिका दायर कर अपनी पत्नी पर आरोप लगया था कि उसकी पत्नी से बच्चा है वह उसका नहीं है। बच्चा किसी दूसरे व्यक्ति का है। इस याचिका को गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने बुधवार को सुनावाई के दौरान यह फैसला दिया है।
हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि पत्नी उच्च कोर्ट के निर्देश का पालन नहीं करती है तो भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 144 में जिक्र की गई एक पूर्वधारणा बनाई जा सकती है।












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