सत्यपाल मलिक: भाजपा का वो नेता जो कृषि कानूनों के खिलाफ लगातार बुलंद करता रहा किसानों की आवाज

नई दिल्ली, 19 नवंबर। तीन कृषि कानूनों को रद्द करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले से जितने खुश आज किसान होंगे उतनी ही राहत मेघालय के गवर्नर सत्यपाल मलिक को मिल रही होगी। एक समय बीजेपी के वरिष्ठ नेता रहे सत्यपाल मलिक, पार्टी के उन नेताओं में से थे जो लगातार कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के हक में बोलते रहे और अपनी सरकार के खिलाफ आंदोलनकारियों की आवाज बुलंद की। हाल ही में सत्यपाल मलिक ने सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर किसानों की मांग पूरी नहीं की गई तो आने वाले चुनावों में बीजेपी को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।

1 महीने पहले कहा था- 'सरकार को ही मानना पड़ेगा'

1 महीने पहले कहा था- 'सरकार को ही मानना पड़ेगा'

गौरतलब है कि सत्यपाल मलिक ने शुरू से ही किसानों के आंदोलन का जबरदस्त समर्थन किया। उन्होंने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी को चेताते हुए कई बार किसानों के हक में उनकी आवाज बुलंद की। उन्होंने आज से करीब एक महीने पहले ही कह दिया था कि कृषि कानून पर केंद्र सरकार को ही मानना पड़ेगा, किसान पीछे नहीं हटेंगे और शुक्रवार को ऐसा हुआ भी। किसानों के समर्थन में बोलते हुए सत्यपाल मलिक ने कहा था, 'केंद्र सरकार को एमएसपी पर कानून बना देना चाहिए। उसमें सरकार का कोई नुकसान भी नहीं है।' इससे पहले उन्होंने इसी साल मार्च के महीने में किसानों के लिए एमएसपी कानून की बात की थी।

कुत्ते की मौत पर शोक, 600 के लिए कोई दुख नहीं

कुत्ते की मौत पर शोक, 600 के लिए कोई दुख नहीं

लगभग एक साल से जारी किसान आंदोलन में कई किसानों ने अपनी जानें गवाईं, हालांकि केंद्र सरकार की तरफ से इस पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई और सत्यपाल मलिक ने इस पर सरकार के घेरा। इसी महीने की शुरुआत में सत्यपाल मलिक ने भाजपा पर हमला करते हुए सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर सवाल उठाया और किसानों का समर्थन किया। उन्होंने कहा था, दिल्ली के नेता कुत्ते की मौत पर भी शोक जताते हैं लेकिन उनमें से किसी ने आंदोलन कर रहे 600 किसानों की मौत पर दुख नहीं जताया।

'आपके पिताजी ने मुझे राज्यपाल नहीं बनाया था'

'आपके पिताजी ने मुझे राज्यपाल नहीं बनाया था'

किसानों के समर्थन में लगातार केंद्र सरकार और बीजेपी को घेरने पर सत्यपाल मलिक को सोशल मीडिया पर इस्तीफा देने की सलाह मिलने लगी। इस पर उन्होंने मुहतोड़ जवाब देते हुए कहा था, 'कुछ लोग लिख देते हैं कि राज्यपाल साहब अगर इतना महसूस कर रहे हो तो इस्तीफा क्यों नहीं दे देते? मैं उनसे कहना चाहता हूं कि मुझे आपके पिताजी ने राज्यपाल नहीं बनाया था और न मैं वोट से बना था। मुझे दिल्ली में दो-तीन बड़े लोगों ने राज्यपाल बनाया था और मैं उनकी ही इच्छा के विरुद्ध बोल रहा हूं। जब वो मुझसे कह देंगे कि हमें दिक्कत है छोड़ दो, तब मैं (इस्तीफा देने में) एक मिनट भी नहीं लगाऊंगा।

यूपी और लोकसभा चुनाव में होगा नुकसान

यूपी और लोकसभा चुनाव में होगा नुकसान

सत्यपाल मलिक ने गुरुवार को दिए अपने ताजा बयान में चुनाव को लेकर बीजेपी को चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर किसानों की मांगें नहीं मानी जाती हैं तो बीजेपी को लोकसभा और विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ेगा। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा था कि पश्चिमी यूपी में बीजेपी का कोई भी नेता किसानों के बीच उनके गांव नहीं जा सकता है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की टिप्पणी को याद करते हुए मलिक ने कहा, 'दिल्ली का रास्ता खेतों से होकर गुजरता है, अगर खेत और खेतवाला खुशहाल नहीं तो आपको कामयाबी नहीं मिलेगी, सरकार को सभी जगह नुकसान होगा'।

कृषि कानूनों के रद्द होने पर क्या बोले मलिक

कृषि कानूनों के रद्द होने पर क्या बोले मलिक

शुक्रवार को मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कृषि कानूनों के रद्द होने पर अपनी पहली प्रतिक्रिया में पीएम मोदी को धन्यवाद दिया। सत्यपाल मलिक ने एक इंटरव्यू में कहा, 'मैंने कहा था कि मुझे मोदी जी से उम्मीद है, मैं मोदी जी बधाई देता हूं कि उन्होंने बड़प्पन दिखाया और किसानों की तकलीफ को खत्म किया। किसानों को भी बधाई देता हूं कि उन्होंने बहुत तकलीफ सही लेकिव वो डटे रहे। देर आए दुरुस्त आए, कानून पहले रद्द कर देते तो बहुत ही अच्छा था। लेकिन अब भी मोदी जी ने हमें बड़ी ट्रेजडी से बचा लिया।'

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