'बीजेपी में जाने वाले राघव चड्ढा और संदीप पाठक की सदस्यता हो रद्द', संजय सिंह ने उठाई मांग
Sanjay Singh on Raghav Chadha: आम आदमी पार्टी के कद्दावर नेता संजय सिंह ने राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक के भाजपा में शामिल होने की खबरों पर बेहद आक्रामक रुख अख्तियार किया है। सिंह का स्पष्ट आरोप है कि इन सांसदों ने न केवल पार्टी के भरोसे को तोड़ा है, बल्कि जनता के जनादेश का भी अपमान किया है। उनके अनुसार, यह महज एक साधारण दल-बदल नहीं है, बल्कि भारतीय संविधान की गरिमा पर प्रहार है।
संजय सिंह ने ऐलान किया है कि वे इस 'अनैतिक' कदम के खिलाफ राज्यसभा सभापति को पत्र सौंपेंगे और संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत इन तीनों की सदस्यता तुरंत रद्द करने की मांग करेंगे, ताकि दलबदल की राजनीति पर लगाम लग सके।

संविधान की दसवीं अनुसूची का हवाला
संजय सिंह का तर्क है कि यदि कोई सांसद अपनी मूल पार्टी के निर्देशों के विपरीत जाकर दूसरी पार्टी के साथ गठबंधन करता है, तो वह 'दल-बदल विरोधी कानून' के घेरे में आता है। उनके अनुसार, राघव चड्ढा और अन्य सांसदों का व्यवहार यह दर्शाता है कि उन्होंने "स्वेच्छा से" आप की सदस्यता त्याग दी है। सिंह इसी संवैधानिक प्रावधान के आधार पर उनकी राज्यसभा सदस्यता को अयोग्य घोषित करने की कानूनी लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।
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पार्टी की पीठ में छुरा घोंपने का आरोप
संजय सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उनका मानना है कि जिन नेताओं को पार्टी ने फर्श से अर्श तक पहुँचाया और राज्यसभा भेजा, उन्होंने कठिन समय में पार्टी का साथ छोड़कर बीजेपी से हाथ मिला लिया। सिंह इसे राजनीतिक शुचिता का अंत मान रहे हैं। उनके अनुसार, यह कदम आम आदमी पार्टी के उन लाखों कार्यकर्ताओं का अपमान है जिन्होंने इन चेहरों को जिताने के लिए दिन-रात मेहनत की थी।
बीजेपी पर 'ऑपरेशन लोटस' का प्रहार
संजय सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे बीजेपी की साजिश की ओर इशारा किया है। उनका आरोप है कि बीजेपी जांच एजेंसियों के डर या प्रलोभन के जरिए 'ऑपरेशन लोटस' चलाकर 'आप' को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। सिंह ने साफ कहा कि बिकने वाले जा सकते हैं, लेकिन राज्यसभा की कुर्सी पर उनका कोई हक नहीं रह जाता। वह इस मामले को सदन के भीतर और जनता की अदालत में ले जाने के लिए पूरी तरह आक्रामक नजर आ रहे हैं।












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