संदेशखाली: CM भी महिला, 11 सांसद भी महिला, फिर भी महिलाओं के लिए सबसे ज्यादा असुरक्षित बंगाल!
Sandeshkhali Row: "तृणमूल कांग्रेस के लोग आते थे और घर-घर जाकर सुंदर-जवान लड़की खोजते थे और फिर उसे उठाकर पार्टी कार्यालय ले जाया जाता था, रात-रात भर उन्हें वहीं रखा जाता, जब तक उनका (नेता-कार्यकर्ता) मन ना भर जाए, तब-तक यौन उत्पीड़न किया जाता था...'', ये आपबीती है, पश्चिम बंगाल के उत्तर 24-परगना जिले में कालिंदी नदी के किनारे बसे गांव 'संदेशखाली' की महिलाओं कीं।

संदेशखाली में 8 फरवरी से बड़े पैमाने पर अशांति देखी जा रही है। जब यहां की महिलाओं ने मीडिया के सामने आकर अपना दर्द जाहिर किया तो...ऐसा लगा मानो हम ना जाने किस काल में पहुंच गए हों...। इनके साथ हुई हैवानिय किसी हिंदी सिनेमा के 'क्रूरता भरे सीन' जैसे लगते हैं। संदेशखाली में ना जाने कब से ये महिलाएं 'सिस्टमैटिक रेप' का शिकार हो रही हैं।
संदेशखाली गांव की महिलाओं ने तृणमूल कांग्रेस के नेता शाहजहां शेख और उसके दो सहयोगियों शिव प्रसाद उर्फ शिबू हाजरा और उत्तम सर्दार पर यौन उत्पीड़न, बलात्कार, जमीन हड़पने, आवाज उठाने पर पति और बच्चों को परेशान करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। शाहजहां शेख की अब तक इस मामले में गिरफ्तारी नहीं हो पाई है, वो पिछले एक महीने से फरार है।
पीड़ित महिलाएं, इस डर में जी रही हैं कि कब उनके साथ कोई अनहोनी ना हो जाए। उनका कहना है कि बंगाल में एक पत्रकार को फौरन गिरफ्तार कर लिया जाता है और शाहजहां शेख, जैसा आरोपी एक महीने से नहीं मिल रहा है।

देश के इकलौते महिला मुख्यमंत्री वाले राज्य में महिलाओं का है ये हाल!
इन सबके बीच हैरान करने वाली बात ये है कि महिलाओं की ये दुर्दशा महिला मुख्यमंत्री वाले देश के एकमात्र राज्य 'पश्चिम बंगाल' में हो रही है। पश्चिम बंगाल की सिर्फ मुख्यमंत्री ही महिला नहीं है, बल्कि राज्य में 11 महिला सांसद भी हैं। जिस राज्य की सत्ता की बागडोर महिलाओं के हाथ में हो, वहां महिलाओं की ऐसी हालत, इस बात का संकेत है कि आज के वक्त में महिलाएं कितनी असुरक्षित हैं?
संदेशखाली की महिलाओं ने सालों से अपने साथ हो रहे शोषण के बारे में बात की है। उनके सामाजिक-आर्थिक और यौन शोषण के आरोप दिल दहला देने वाले हैं। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इन आरोपों को खारिज करने में लगी हुई हैं। पहले तो कुछ दिनों तक सीएम ममता बनर्जी ने चुप्पी साध रखी थी लेकिन आखिरकार उन्होंने कार्रवाई का वादा किया है।
संदेशखाली की पीड़ित महिलाएं जांच की प्रक्रिया से नाराज हैं। उनका आरोप है कि जानबूझकर जांच में देरी की जा रही है। शायद इसलिए अब संदेशखाली की महिलाएं शाहजहां शेख और उनके सहयोगियों के खिलाफ हथियार उठा रही हैं। उन्होंने अब बलात्कार, जमीन हड़पने, बकाया का भुगतान न करने और करीबी आपराधिक-पुलिस सांठगांठ पर खुलकर बात करने का फैसला कर लिया है।
असल में, संदेशखाली की महिलाओं और स्थानीय लोगों के चौंकाने वाले आरोप, बयान और गवाही इतनी गंभीर हैं कि ये ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल सरकार के दावों और कार्यों को शर्मसार करने के लिए काफी हैं।

'ममता बनर्जी महिला होकर, महिला का दर्द नहीं समझ रही हैं'
संदेशखाली की महिलाओं ने कहा है कि, 'क्या हम अपनी गरिमा वापस पा सकेंगे।' उनका कहना है कि, "...ममता बनर्जी के बारे में क्या कहें? उन्होंने हमारे बारे में नहीं पूछा, हमसे कभी नहीं मिलीं... उनके बारे में क्या कहें? वह खुद एक महिला हैं और हम भी महिला हैं। उन्हें हमारे पास आकर हमारी हालत देखनी चाहिए।'
एक अन्य महिला ने कहा, 'मैं अपनी गरिमा वापस चाहती हूं। हम अपनी जमीन वापस चाहते हैं, हम अपना सम्मान वापस चाहते हैं। क्या हमें अपना सम्मान वापस मिलेगा? राज्य पुलिस शाहजहां, शिबू, उत्तम, रंजू, संजू और अन्य को कभी हिरासत में नहीं लेगी। वे हमें रात में परेशान करते हैं। मुझे नहीं पता कि वे पुलिस हैं या गुंडे।"
एक अन्य महिला ने कहा, 'ममता बनर्जी एक महिला होकर, एक महिला का दर्द नहीं समझ रही हैं। महिलाओं को मीटिंग के नाम पर रात को 12 बजे पार्टी के दफ्तर में बुलाया जाता है। नहीं जाने या विरोध करने पर हमारे पति का तबादला कहीं दूर करा देने की धमकी दी जाती है। गांव में इस तिकड़ी का इस कदर आतंक है कि, कोई महिलाएं सूरज ढलने के बाद बाहर निकलने से डरती है। क्या हमें ऐसे दिन के लिए जी रहे हैं।'

पश्चिम बंगाल में महिलाओं के प्रति बढ़ रहे हैं क्राइम!
केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों को देखें तो पश्चिम बंगाल, देश का चौथा ऐसा राज्य है, जहां महिलाओं के खिलाफ अपराध सबसे ज्यादा हो रहे हैं। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार 2022 में महिलाओं के खिलाफ पश्चिम बंगाल में 34,738 आपराधिक केस दर्ज किए गए थे। जो देश में चौथे स्थान पर है। 2021 में 35,884 और 2020 में 36,43 केस दर्ज किए गए थे।
एनसीआरबी के आंकड़ों मुताबिक भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत अपराधों के लिए आरोपपत्र दाखिल करने की दर में पश्चिम बंगाल देश में तीसरे स्थान पर है। बंगाल में आईपीसी के तहत 2020 में 1,58,060, साल 2021 में 1,57,498 और साल 2022 में 1,56,503 संज्ञेय अपराध दर्ज किए गए है। 2022 में कुल संज्ञेय अपराधों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करने की दर 90.6% थी।
इतना ही नहीं देश में घरेलू हिंसा और पति द्वारा क्रूरता किए जाने का भी सबसे अधिक मामला पश्चिम बंगाल में सामने आया है, जहां 9952 मामले सामने आये और कुल 20052 महिलाएं पीड़ित हुई हैं।
साल 2021 में एसिड अटैक के मामले सबसे ज्यादा पश्चिम बंगाल में दर्ज किए गए थे। यहां कुल 30 मामले सामने आए थे, सभी महिलाएं एसिड अटैक की शिकार हुई थीं।
हालांकि एनसीआरबी ने कोलकात को महिलाओं के लिए देश में सबसे सुरक्षित शहरों में से एक बताया था। लेकिन कोलकात और कुछ शहरों को छोड़कर बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा एक बहुत बड़ा चिंता का विषय है।












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