संयुक्‍त किसान मोर्चे की मोदी सरकार को चेतावनी- MSP और केस वापसी नहीं तो फिर होगा आंदोलन

नई दिल्‍ली। आज मोदी सरकार का 10वां और निर्मला सीतारमण का चौथा यूनियन बजट आ रहा है। इस बजट पर देश के हर तबके की नजर है। किसानों की आवाज बुलंद करने वाला संयुक्त किसान मोर्चा तो खासा उत्‍साहित है। मोर्चे को उम्‍मीद है कि सरकार आज किसानों के हित में एमएसपी पैनल गठित करने, कर्जमाफी की घोषणा एवं किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने का ऐलान करेगी। मोर्चे ने कहा है कि, यदि सरकार ने हमारी मांगें पूरी नहीं कीं तो हमारा आंदोलन फिर से शुरू हो जाएगा।

'सरकार ने अभी किसी भी वादे को पूरा नहीं किया'

'सरकार ने अभी किसी भी वादे को पूरा नहीं किया'

संयुक्त किसान मोर्चे ने सरकार को धमकी भरे लहजे में चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने एमएसपी पैनल गठित करने, मामले वापस लेने का वादा पूरा नहीं किया तो आंदोलन फिर शुरू हो जाएगा। जिसका भाजपा को बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। मोर्चे के बयान में कहा गया है कि, सरकार ने अभी तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर एक समिति गठित करने और किसानों से किए गए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामलों को वापस लेने सहित किसी भी वादे को पूरा नहीं किया है।

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    देशभर में किसानों ने मनाया

    देशभर में किसानों ने मनाया "विश्वासघात दिवस" ​​

    संयुक्त किसान मोर्चे के बयान में कहा गया है कि अगर सरकार अपने वादों से मुकरती रही तो किसानों के पास अपना आंदोलन फिर से शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। मोर्चे के आह्वान के ही कारण, कल देशभर के किसानों ने केंद्र द्वारा अपने वादों को पूरा न करने पर "विश्वासघात दिवस" ​​मनाया।

    एक साल से ज्‍यादा समय तक चला था आंदोलन

    एक साल से ज्‍यादा समय तक चला था आंदोलन

    गौरतलब हो कि, सरकार के तीन विवादित कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के हजारों किसानों ने एक साल से अधिक समय तक दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले रखा था। उनका आंदोलन नवंबर 2020 में शुरू हुआ था। उन्होंने अपने विरोध-प्रदर्शनों को तब स्थगित करने का फैसला किया, जब पिछले साल 9 दिसंबर को सरकार द्वारा उनकी मांग को मानने और आंदोलन के दौरान किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने, एमएसपी पर कानूनी गारंटी सहित छह अन्य पर विचार करने पर सहमति दी गई थी। सरकार ने, उक्‍त आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिजनों को मुआवजा देने की भी बात कही थी।

    मोर्चे ने याद दिलाए सरकार के बयान

    मोर्चे ने याद दिलाए सरकार के बयान

    सरकार के इन्‍हीं वादों पर आए संयुक्‍त किसान मोर्चे के बयान में कहा गया है कि यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि 9 दिसंबर, 2021 को मोर्चे को लिखे अपने पत्र में केंद्र सरकार द्वारा दिए गए किसी भी आश्वासन को पूरा नहीं किया गया है। मोर्चे ने कहा, "हमारा मोर्चा किसानों के धैर्य को चुनौती देने के खिलाफ भाजपा सरकार को चेतावनी देता है, और घोषणा करता है कि अगर वादे जल्द से जल्द पूरे नहीं किए गए, तो किसानों के पास आंदोलन फिर से शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।"

    केंद्र सरकार ने ये वादे किए थे

    केंद्र सरकार ने ये वादे किए थे

    अपने पत्र में, केंद्र ने कहा था कि प्रधान मंत्री नरेंद्रमोदी ने घोषणा की थी कि एमएसपी पर एक समिति का गठन किया जाएगा और इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारी, एसकेएम सहित कृषि संघों के प्रतिनिधि और कृषि वैज्ञानिक होंगे। इसमें कहा गया था कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा की सरकारें किसानों के खिलाफ मामलों को तत्काल प्रभाव से वापस लेने पर सहमत हो गई हैं। केंद्र ने यह भी कहा था कि दिल्ली और केंद्र शासित प्रदेशों में किसानों और उनके समर्थकों के खिलाफ दर्ज मामले भी वापस ले लिए जाएंगे। यह भी कहा गया कि, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकारों ने आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिजनों को मुआवजा देने के लिए अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

    राष्‍ट्रपति से की ये मांग

    राष्‍ट्रपति से की ये मांग

    केंद्र सरकार द्वारा अपने वादों को पूरा न करने पर देश भर के हजारों किसानों ने सोमवार को "विश्वासघात दिवस" ​​मनाया। इसके लिए मोर्चे की ओर से बयान में कहा गया था कि, "देशभर के जिलों और ब्लॉकों में प्रदर्शन होंगे और जिला कलेक्टरों, एसडीएम और एडीएम के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा।" जिसके बाद, राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन में कहा गया कि देश-प्रमुख के रूप में, यह राष्ट्रपति का संवैधानिक दायित्व है कि वह किसानों के हितों की रक्षा करें और सरकार को उनके साथ "धोखाधड़ी" करने के खिलाफ चेतावनी दें।

    'किसानों से छल विनाशकारी साबित होगा'

    'किसानों से छल विनाशकारी साबित होगा'

    संयुक्त किसान मोर्चे के ज्ञापन में कहा गया, "किसानों के अथक प्रयासों से, लॉकडाउन और आर्थिक मंदी के बावजूद, देश के कृषि उत्पादन में लगातार वृद्धि हुई है। ऐसे में किसानों के साथ छल करना पूरे देश के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है। चूंकि, किसान ही देश का पेट भरते हैं।"

    मिशन उत्तर प्रदेश नहीं रुकेगा

    मिशन उत्तर प्रदेश नहीं रुकेगा

    मोर्चे ने कहा है कि वह अपने "मिशन उत्तर प्रदेश" को जारी रखेगा और भाजपा को दंडित करने व हराने के लिए राज्य भर में अभियान चलाएगा।

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