चांद पर जाने से महंगा है समुद्र की गहराई में जाना, Samudrayaan Mission पर कितना हो रहा खर्च?
हाल ही में इसरो के चंद्रयान-3 ने चांद की सतह पर सफल लैंडिंग की। इसके अलावा सूर्य पर अध्ययन के लिए आदित्य एल1 मिशन लॉन्च किया। इन दोनों सफल प्रोजेक्ट के बाद अब भारत की नजर समुद्र की गहराइयों पर है।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी (चेन्नई) इस दिनों समुद्रयान मिशन पर काम कर रहा। इसे समुद्र की गहराइयों में अध्ययन के लिए लॉन्च किया जाएगा। इसके बजट की भी खूब चर्चा हो रही, क्योंकि ये चंद्रयान-3 और आदित्य एल1 से ज्यादा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चंद्रयान-3 का अनुमानित बजट 615 करोड़ रुपये है। इसके तहत विक्रम लैंडर को चांद की सतह पर भेजा गया। उसमें से प्रज्ञान नाम का रोवर निकला। जिसने चांद की सतह पर अध्ययन किया। साथ ही वहां से काफी अहम डेटा भेजा।
वहीं दूसरी ओर समुद्रयान मिशन को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी तैयार कर रहा। इसके लिए सरकार की ओर से 4077 करोड़ रुपये के फंड को मंजूरी दी गई है। ऐसे में देखा जाए, तो ये चंद्रयान-3 से महंगा प्रोजेक्ट है।
समुद्रयान एक डीप ओशन मिशन है। इसके तहत 3 इंसानों को समुद्र के अंदर 6000 मीटर की गहराई तक भेजा जाएगा। ये लोग वहां के खनिजों, स्रोतों और जैव-विविधता का अध्ययन करेंगे।
12 घंटे तक रहेंगे पानी के अंदर
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस यान का व्यास 2.1 मीटर है। इसमें तीन लोग आराम से सवार हो सकते हैं। वो 6000 मीटर की गहराई में जाकर 12 घंटे तक अध्ययन करेंगे। इसमें 96 घंटे की इमरजेंसी इंड्यूरेंस है।
ब्लू इकोनॉमी होगी विकसित
ये यान समुद्र के अंदर गैस हाइड्रेट्स, पॉलिमैटेलिक मैन्गनीज नॉड्यूल, हाइड्रो-थर्मल सल्फाइड और कोबाल्ट क्र्स्ट जैसे संसाधनों की खोज करेगा। सरकार के मुताबिक इससे समुद्री इकोसिस्टम को कोई नुकसान नहीं होगा, बल्कि इससे ब्लू इकोनॉमी विकसित होगी। सबसे खास बात ये है कि ये मिशन पूरी तरह से भारत में ही निर्मित है। उम्मीद जताई जा रही कि 2026 में इसे लॉन्च कर दिया जाएगा।












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