Same-sex Marriage: कौन हैं सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस रवींद्र भट्ट? जो बोले- मैं CJI के निर्देशों से सहमत नहीं
Same-sex Marriage equality case supreme court: सुप्रीम कोर्ट ने भारत में LGBTQIA+ समुदाय को वैवाहिक समानता का अधिकार देने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों वाली संविधान पीठ ने 3-2 से समलैंगिक विवाह को कानूनी बनाने से मना किया है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ कहा है कि, 'हम समलैंगिक विवाह को मान्यता नहीं दे सकते हैं। समलैंगिक विवाह को कानूनी रूप से मान्यता देना संसद और राज्य विधानसभाओं का काम है।'
इसी बीच इस पीठ में शामिल जस्टिस रवींद्र भट्ट (Justice Ravindra Bhat) ने कहा कि, वे विशेष विवाह अधिनियम पर सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ द्वारा जारी निर्देशों से सहमत नहीं हैं।

क्यों CJI के निर्देशों से सहमत नहीं हैं जस्टिस रवींद्र भट्ट?
जस्टिस रवींद्र भट्ट ने कहा, "विवाह करने का अयोग्य अधिकार नहीं हो सकता जिसे मौलिक अधिकार माना जाए। हालांकि हम इस बात से सहमत हैं कि रिश्ते का अधिकार है, हम स्पष्ट रूप से मानते हैं कि यह अनुच्छेद 21 के तहत आता है। इसमें एक साथी चुनने और उनके साथ शारीरिक संबंध का आनंद लेने का अधिकार शामिल है जिसमें गोपनीयता, स्वायत्तता आदि का अधिकार शामिल है। इसमें कोई संदेह नहीं हो सकता कि जीवन साथी चुनने का विकल्प मौजूद है।"
न्यायमूर्ति रवींद्र भट्ट ने इसके साथ ही ये भी कहा कि, वह समलैंगिक जोड़ों के बच्चा गोद लेने के अधिकार पर सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ से असहमत हैं और इस मामले पर कुछ चिंताएं जताते हैं।
न्यायमूर्ति रवींद्र भट्ट ने कहा, "जब गैर-विषमलैंगिक जोड़ों के बीच विवाह का कोई संवैधानिक अधिकार या संघों की कानूनी मान्यता नहीं है तो न्यायालय राज्य को किसी भी दायित्व के तहत नहीं डाल सकता है।"
who is Justice Ravindra Bhat: कौन हैं जस्टिस रवींद्र भट्ट
जस्टिस रवींद्र भट्ट वर्तमान में भारत के सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के वर्तमान न्यायाधीश हैं। 23 सितंबर 2019 को वो सुप्रीम कोर्ट को ये सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बने थे। 64 वर्षीय जस्टिस रवींद्र भट्ट 20 अक्टूबर 2023 को रिटायर होने वाले हैं।
जस्टिस रवींद्र भट्ट इससे पहले राजस्थान हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे। उनका कार्यकाल 5 मई 2019 से 22 सितंबर 2019 तक था। जस्टिस रवींद्र भट्ट दिल्ली हाई कोर्ट के भी न्यायाधीश रह चुके हैं। दिल्ली हाई कोर्ट में उनका कार्यकाल 16 जुलाई 2004 से 4 मई 2019 तक था।
Justice Ravindra Bhat Early Life Education: जस्टिस रवींद्र भट्ट की शुरुआती जिंदगी
इनका पूरा नाम श्रीपति रवींद्र भट्ट है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय, फरीदाबाद से पूरी की है। उन्होंने बी.ए. की पढ़ाई, हिंदू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में की है। 1982 में न्यायमूर्ति भट ने एलएलबी से स्नातक की उपाधि कैम्पस लॉ सेंटर, विधि संकाय, दिल्ली विश्वविद्यालय से ली है।
न्यायमूर्ति भट्ट ने इसी साल दिल्ली बार काउंसिल में दाखिला लिया और दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की। उन्होंने 1989 में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड (एओआर) के रूप में नामांकन कराया। उन्होंने मुख्य रूप से सार्वजनिक कानून, रोजगार, शिक्षा और संवैधानिक विवादों में प्रैक्टिस की है।












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