BJP Chief: मोदी-शाह की पसंद पर संघ ने लगाई रोक, भाजपा अध्यक्ष पद के लिए इन 2 दिग्गजों के नाम को मंजूरी नहीं
BJP President: भारतीय जनता पार्टी (BJP) में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर भारी खींचतान चल रही है, और इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है पार्टी की वैचारिक रीढ़ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से मतभेद। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के उत्तराधिकारी के चयन में मोदी-शाह की जोड़ी और संघ के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। अब बिहार चुनाव के बाद ही भाजपा के नए अध्यक्ष की घोषणा हो सकती है।
RSS की शर्त: 'मोदी-शाह की मुहर नहीं, मजबूत संगठनात्मक नेता चाहिए'
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव का नाम अध्यक्ष पद के लिए प्रमुखता से चल रहा था। भाजपा ने इन दोनों नामों को संघ के पास स्वीकृति के लिए भेजा, लेकिन संघ ने अब तक इन पर मुहर नहीं लगाई है। सूत्रों के मुताबिक, "आरएसएस ने अभी तक किसी भी उम्मीदवार को मंजूरी नहीं दी है। आरएसएस और भाजपा के बीच और बैठकें और चर्चाएं होने की उम्मीद है।"

टेलीग्राफ ने सूत्रों के हवाले से लिखा संघ चाहता है कि भाजपा संगठन को मोदी और शाह के "निर्विवाद नियंत्रण" से मुक्त किया जाए और एक ऐसा नेता चुना जाए जो पार्टी के भविष्य -खासकर 2029 के बाद को संभाल सके। तीन दौर की बातचीत के बावजूद अब तक कोई सहमति नहीं बनी है।
संघ प्रमुख का इशारा: 'एक उम्र के बाद सत्ता छोड़नी चाहिए'
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में एक बयान में कहा कि 'नेताओं को एक उम्र के बाद खुद ही पद छोड़ देना चाहिए और नई पीढ़ी को आगे आने देना चाहिए।' इस बयान के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि संघ मोदी से खुद हटने की तैयारी करने का इशारा कर रहा है। गौरतलब है कि मोदी इस साल 17 सितंबर को 75 वर्ष के हो जाएंगे, जो BJP की 'अनौपचारिक रिटायरमेंट ऐज' मानी जाती है।
न यूपी का अध्यक्ष तय, न दिल्ली का
इस रस्साकशी का असर उत्तर प्रदेश भाजपा इकाई पर भी दिख रहा है। भाजपा का गढ़ माने जाने वाले यूपी में अब तक नया प्रदेश अध्यक्ष नहीं तय हो पाया है। सूत्रों का कहना है कि अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच 'पसंद के चेहरे' को लेकर टकराव है। अमित शाह चाहते हैं कि योगी विरोधी नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए, जबकि योगी इसका विरोध कर रहे हैं।
भाजपा को 2024 में यूपी से झटका, संघ की चिंता गहराई
2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को यूपी से करारा झटका लगा था, जहां पार्टी को केवल 80 में से 33 सीटें मिलीं। यही वजह है कि लोकसभा में भाजपा को बहुमत से दूर रहना पड़ा। ऐसे में संघ चाहता है कि नया राष्ट्रीय अध्यक्ष पूरी तैयारी और संतुलन के साथ चुना जाए ताकि पार्टी को फिर से खड़ा किया जा सके।
भाजपा अध्यक्ष पद की नियुक्ति में देरी केवल नाम तय न होने का मामला नहीं है, बल्कि यह पार्टी के भविष्य के नेतृत्व और उसकी दिशा तय करने वाला एक बड़ा राजनीतिक मोड़ है। संघ और मोदी-शाह के बीच इस लड़ाई का असर केवल संगठन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव और 2029 के आम चुनाव की रणनीतियों को भी प्रभावित कर सकता है।












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