'India नहीं, भारत कहें': RSS नेता दत्तात्रेय होसबाले की इस मांग के पीछे कितनी ठोस है दलील?
RSS Leader Dattatreya Hosabale: 'भारत बनाम इंडिया' की बहस एक बार फिर से सुर्खियों में आ गई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह (राष्ट्रीय महासचिव) दत्तात्रेय होसबाले ने देश के नाम को लेकर एकरूपता की मांग उठाई है। कुछ दिन पहले भी इस तरह की बहस शुरू हुई थी और अब संघ के नेता की मांग के बाद इसपर नए सिरे से चर्चा शुरू होने की संभावना पैदा हो गई है।
बीते सोमवार को ही में उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित पंचशील बालक इंटर कॉलेज ऑडिटोरियम में एक पुस्तक विमोचन समारोह में बोलते हुए होसबाले ने कहा, 'देश का नाम भारत है, तो भारत ही बोलो। इंडिया तो अंग्रेजी नाम है।' उन्होंने संविधान में संशोधन कर 'इंडिया' की जगह 'भारत' को आधिकारिक रूप से अपनाने तक की वकालत की है।

RSS: क्यों उठी फिर से 'भारत बनाम इंडिया' की बहस?
होसबाले ने सवाल किया कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 में जी20 डिनर के दौरान 'रिपब्लिक ऑफ भारत' शब्द को संदर्भित किया, तो फिर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारत के संविधान जैसे महत्वपूर्ण स्थानों में अब भी 'इंडिया' शब्द का उपयोग क्यों किया जा रहा है? उन्होंने इसे ब्रिटिश शासन की एक विरासत बताया और इस दोहरे नामकरण पर पुनर्विचार करने का आह्वान किया।
दरअसल, जी20 सम्मेलन के दौरान प्रमुखता से रिपब्लिक ऑफ इंडिया की जगह रिपब्लिक ऑफ भारत की इस्तेमाल किया गया था और तभी इंडिया नाम हटाए जाने को लेकर अटकलें शुरू हुई थीं।
RSS नेता होसबाले की दलीलें
इतिहास के संदर्भ में, होसबाले ने कहा कि भारत में मुगल आक्रमण के दौरान मंदिरों और गुरुकुलों को नष्ट किया गया और भारतीय संस्कृति को दबाने की कोशिश की गई। हालांकि, उनके अनुसार, ब्रिटिश शासन ने भारतीयों को जिस प्रकार मानसिक रूप से दबाया, वैसा पहले कभी नहीं हुआ था। उन्होंने कहा, 'ब्रिटिश शासन ने हमें यह महसूस कराया कि वे हमसे श्रेष्ठ हैं, और इसी सोच ने हमें कमजोर बनाया।'
RSS Leader: वामपंथी इतिहास की आलोचना
होसबाले ने वामपंथी इतिहासकारों द्वारा गढ़े गए ऐतिहासिक दृष्टिकोण की भी आलोचना की और इसे 'भ्रामक' बताया। उन्होंने कहा कि इन इतिहासकारों ने अतीत के भारतीय शासकों को दमनकारी के रूप में प्रस्तुत किया, जिससे भारतीय गौरव को ठेस पहुंची।
RSS News: 'भारत' नाम की पुनर्स्थापना का आह्वान
होसबाले ने बौद्धिक पुनर्जागरण (intellectual reset) की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि देश में एक नई विचारधारा का प्रवाह होना चाहिए, जो न तो किसी अन्य राष्ट्र का अनादर करे और न ही किसी को छोटा दिखाए, बल्कि अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को फिर से स्थापित करे। उन्होंने सभी भारतीयों से एकजुट होने और अपने कार्यों से एक उदाहरण प्रस्तुत करने की अपील की।
उनका मानना है कि जब तक 'भारत' नाम को पूरी तरह से अपनाया नहीं जाता, तब तक देश अपनी वास्तविक पहचान को पूरी तरह नहीं पा सकेगा।
उन्होंने कहा कि 'भारत' सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक पहचान, संस्कृति और गौरव का प्रतीक है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत को विश्व कल्याण के लिए काम करना चाहिए और अपनी सांस्कृतिक विरासत को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ाना चाहिए।
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