'संघ भेदभाव नहीं करता', 100 साल का हुआ RSS, शताब्दी समारोह में शामिल हुए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने इस बार नागपुर में विजयादशमी के मौके पर अपने 100 साल पूरे होने का भव्य जश्न मनाया। मोहन भागवत के नेतृत्व में आयोजित इस समारोह में पारंपरिक हथियारों के साथ आधुनिक हथियार और ड्रोन की नकली कॉपी भी दिखाई गईं। इस मौके पर देश के बड़े नेता और हजारों स्वयंसेवक मौजूद थे।
समारोह में न सिर्फ शस्त्र पूजा हुई बल्कि संघ की स्थापना, समाज में इसकी भूमिका और देशभक्ति के महत्व पर जोर दिया गया। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संघ की तारीफ की और सभी को विजयादशमी की शुभकामनाएं दी। यह आयोजन संघ के इतिहास, उसकी उपलब्धियों और भविष्य की दिशा का प्रतीक माना जा रहा है। इस बार यह समारोह खास था क्योंकि संघ 100 साल का हो गया है।

कार्यक्रम में मौजूद खास लोग
इस अवसर पर कई बड़े नेता मौजूद थे। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समारोह में शामिल हुए। पूर्व राष्ट्रपति ने सभी को विजयादशमी की शुभकामनाएं दी और संघ के काम की तारीफ की। उन्होंने संघ के योगदान और समाज में इसके रोल की बात भी कही।
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संघ और समाज में एकता
रामनाथ कोविंद ने कहा कि संघ के लोग कभी जाति या धर्म से भेदभाव नहीं करते। संघ हमेशा समाज में एकता लाने का काम करता है। उन्होंने बताया कि उनका संघ से परिचय तब हुआ जब वे कानपुर से बीजेपी उम्मीदवार थे। कोविंद ने संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और वर्तमान प्रमुख मोहन भागवत के योगदान को भी याद किया।
#WATCH | Nagpur, Maharashtra | Former President Ram Nath Kovind receives a warm welcome at the centenary celebrations of the Rashtriya Swayamsewak Sangh. pic.twitter.com/ya20VF9HPx
— ANI (@ANI) October 2, 2025
शताब्दी साल का जश्न और पथ संचलन
संघ के 100 साल पूरे होने पर पुणे में खास 'पथ संचलन' निकाला गया। इसमें महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रकांत पाटिल, केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल और भाजपा सांसद मेधा कुलकर्णी शामिल हुए। इस दौरान छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा पर फूल चढ़ाए गए। यह जश्न संघ के इतिहास और इसकी उपलब्धियों को याद करने का तरीका था।
मोहन भागवत और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस बार के विजयादशमी समारोह में 21 हजार से ज्यादा स्वयंसेवक शामिल हुए। यह संघ के शताब्दी साल की तैयारी का हिस्सा था और इसकी भव्यता देखने लायक थी।
स्वयंसेवक और देशभक्ति की मिसाल
राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने कहा कि संघ की स्थापना 100 साल पहले देशभक्ति और समाज सेवा की भावना से हुई थी। उन्होंने बताया कि जब भी देश पर कोई मुश्किल आती है, संघ के स्वयंसेवक सबसे पहले आगे आते हैं। पिछले 100 सालों में संघ और उसके लाखों स्वयंसेवक देशभक्ति और समाज सेवा में लगातार काम कर रहे हैं।
इस शताब्दी समारोह में यह संदेश भी दिया गया कि संघ हमेशा समाज में एकता और देशभक्ति को बढ़ावा देगा। नए युवा स्वयंसेवक भी संघ से जुड़कर समाज सेवा में सक्रिय हो रहे हैं। मोहन भागवत ने कहा कि संघ का उद्देश्य हमेशा समाज में सकारात्मक बदलाव लाना और देश की सुरक्षा और समृद्धि के लिए काम करना है।
विजयादशमी सिर्फ उत्सव नहीं है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। संघ ने इस अवसर को सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे सामाजिक और देशभक्ति संदेश देने का मंच बनाया। समारोह में शामिल लोगों ने इसे बहुत खास बताया।
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