जनता दल पार्टी से निकली थी JDU की जड़ें, जानिए शरद यादव और नीतीश का कैसा रहा रिश्ता?
दिग्गज आरजेडी नेता शरद यादव की जेडीयू नेता व बिहार के मौजूदा सीएम से कभी काफी प्रगाढ़ संबंध रहे। शरद यादव को बिहार की सीएम का राजनीतिक गुरू तक कहा जाता है।

Sharad and Nitish Relation : छात्र राजनीति से राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में अपनी पहचान बनाने वाले एक दिग्गज समाजवादी नेता को आज भारत ने खो दिया। शरद यादव समाजवादी आंदोलन में एक अमिट छाप छोड़ने वाले नेताओं में एक थे। देश के साथ बिहार की राजनीतिक क्षेत्र के लिए उनका जाना एक बड़ी क्षति है, जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकता। वो बिहार के एक ऐसे नेता थे जनहित के लिए कई बार पार्टी लाइन से हटकर निर्णय भी लेते थे। बिहार के मौजूदा सीएम नीतीश कुमार और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव के बीच बेहद प्रगाढ़ संबंध थे। बल्कि ये भी कहा जा सकता है कि सीएम नीतीश की पार्टी जेडीयू को आधार देने वाले बिहार के दिग्गज नेता थे शरद यादव।

गठजोड़ में माहिर थे शरद यादव
शरद यादव को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राजनीतिक गुरु भी माना जाता है। पूर्व जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव राजनीतिक गठजोड़ में भी माहिर थे। कहा ये भी जाता है कि नीतीश कुमार उन्हीं के पदचिन्हों पर चले। हालांकि राजनीति में कब किसका सिक्का कितना चलता है, ये सब भविष्य पर निर्भर होता है। बाद में कौन हाशिए पर चला जाए ये भी नहीं कहा जा सकता। बात पिछले वर्ष 2022 की करें तो जब नीतीश कुमार एनडीए से अलग तो उन्हें फिर से अपने राजनीतिक गुरु शरद यादव की याद आई। दोनों नेता फिर से मिले। तब विपक्षी एकजुटता की बात चरम पर थी और जेडीयू नेता ने नीतीश के कुमार के तारीफों के पुल बांधे और कहा कि बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार से बड़ा चेहरा कोई नहीं है।

शरद यादव थे नीतीश की पार्टी का आधार
बिहार जिस पार्टी की चीफ आज राज्य के सीएम के पद पर हैं, उस पार्टी को मजबूत आधार देने वाले नेता शरद पवार ही थे। इतना गहरा संबंध दोनों नेताओं के बीच था। साल 2003 में नीतीश कुमार की समता पार्टी ने 2003 में शरद यादव की जनता दल के साथ अपना विलय कर लिया। इस बिलय के बाद जनता दल यूनाइटेड का गठन हुआ। इस पार्टी के मुखिया नीतीश कुमार बने। हालांकि नीतीश ने बीजेपी के साथ अपना गठबंधन जारी रखा। जिसके चलते समाजवाद के समर्थक रहे शरद यादव का उनके साथ रहना संभव नहीं हुआ।

MP में जन्म, UP और बिहार कर्मभूमि
भारत ने एक समाजवादी नेता को खो दिया। समाजवादी आंदोलन में एक अमिट छाप छोड़ने वाले नेताओं में एक थे शरद यादव। बिहार की राजनीति उनके बिना अधूरी थी। उन्होंने गुरुग्राम के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनकी बेटी सुभाषिनी शरद यादव ने उनकी निधन की जानकारी दी। शरद यादव देश की आजादी से कुछ ही दिन पहले 1 जुलाई 1947 को मध्य प्रदेश के होशंगाबाद में पैदा हुए थे। राजनीतिक जीवन में शरद यादव की कर्मभूमि बिहार और उत्तर प्रदेश रही।

छात्र राजनीति से करियर की शुरुआत
शरद यादव एक किसान परिवार से थे। लेकिन उनकी बचपन से ही शिक्षा में रुचि थी। एमपी के जबलपुर से शरद यादव ने इंजीनियरिंग की और यहीं से उन्होंने छात्र राजनीति की शुरुआत की। यहां वे छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गए। हालांकि सियासत के बीच उन्होंने अपनी शिक्षा प्रभावित नहीं होने दी। शरद यादव ने बीई सिविल (Bachelor of Civil Engineering) में उन्हें गोल्ड मेडल मिला।
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