इंडियन आर्मी के इस हीरो ने सुनाई 'सर्जिकल स्ट्राक' की कहानी, कहा- विश्वास से जीता जंग
सर्जिकल स्ट्राइक के एक्शन के बारे में बात करते हुए मनीष बोरा ने कहा कि टारगेट का पूरा कर लौटना काफी खतरनाक था हम आग से खेल रहे थे।
नई दिल्ली। अगर आपको खुद पर यकीन है तो आप कुछ भी कर सकते है। जंग में हमेशा हमेशा खुद पर विश्वास रखना होता है। आपको हमेशा ये गुमान रहे कि आप दुश्मन से बेहतर है और आप उसको किसी भी वक्त किसी भी हालात में हरा सकते है। ये कहना था सर्जिकल स्ट्राइक के हीरो रहे कैप्टन मनीष बोरा का। चंडीगढ़ के मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल पहुंचे मनीष बोरा ने सर्जिकल स्ट्राइक की कहानी युवाओं के बीच साझा किया और युवाओं को करियर के तौर पर इंडियन आर्मी की तरफ रुख करने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान चंडीगढ़ युवा मनीष बोरा के साथ सेल्फी लेते दिखे।

टारगेट का पूरा कर लौटना काफी खतरनाक था
सर्जिकल स्ट्राइक के एक्शन के बारे में बात करते हुए मनीष बोरा ने कहा कि टारगेट का पूरा कर लौटना काफी खतरनाक था हम आग से खेल रहे थे। बोरा उन 70 कमांडोज में से एक थे जिन्होंने दुश्मन की धरती पर जाकर उरी अटैक का बदला लिया था। बोरा ने चंडीगढ़ में युवाओं को बताया कि सर्जिकल स्ट्राइक लिए तैयारियां दस दिन पहले से ही शुरू हो गई थी। बोरा ने बताया कि इंडियन आर्मी ने आखिर कैसे 72 घंटे के उस एक्शन को कैसे अंजाम दिया। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर क्षेत्र के बाहर आतंकियों के लॉचिंग पैड पर निशाना था। एक साथ कई ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की गई। पूरी तैयारी के साथ की गई सर्जिकल स्ट्राइक पर पहली बार सरकार ने बोला कि हम इसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार करेंगे। इसकी प्लानिंग में सेना के कई लोग शामिल थे।

मातृभूमि से प्यार है तो आपको इंडियन आर्मी ज्वाइन करना चाहिए
मनीष बोरा ने युवाओं के बीच अपने एक्सपिरियंस को शेयर करते हुए कहा कि अगर आपके अंदर कुछ अलग करने का माद्दा है , मातृभूमि से प्यार है तो आपको इंडियन आर्मी ज्वाइन करना चाहिए। दून के नागल ज्वालापुर दूधली निवासी स्पेशल फोर्स में तैनात कैप्टन मनीष बोरा को उनकी वीरता के लिए सेना मेडल से सम्मानित किया जा चुका है । कैप्टन मनीष देहरादून हिल्स एकेडमी नागल और सैनिक स्कूल घोड़ाखाल नैनीताल के छात्र रहे हैं। दस दिसंबर 2011 को वह भारतीय सैन्य अकादमी से पास आउट हुए थे। मनीष बोरा ने इंडियन आर्मी से इंजीनियरिंग की भी डिग्री ली है।

चंडीगढ़ में मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल
शुक्रवार को चंडीगढ़ लेक क्लब में पहले मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल की शुरुआत हुई। यहां पूर्व सैनिक, जनरल और वॉर हिस्टोरियन पहुंचे। तीन दिन चलने वाले फेस्टिवल का थीम है- भारत द्वारा लड़े गए युद्ध और उनमें आर्मी की वीरता। ऑर्गेनाइज किया है चंडीगढ़ प्रशासन, पंजाब सरकार और वेस्टर्न कमांड ने। कारगिल वार के हीरो परमवीर चक्र विजेता सूबेदार वाईएस यादव ने फेस्टिवल में अपनी यादें ताजा कीं। इस वक्त बरेली में पोस्टेड यादव ने 1999 में हुई कारगिल वार में टाइगर हिल पर तिरंगा लहराया था। अपने साथी खोए थे और असाधारण खतरे के बाजवूद विजय पाने तक वे दुश्मन के सामने डटे रहे थे। बाद में वीरता के लिए उनको परमवीर चक्र से नवाजा गया था।

सर्जिकल स्ट्राइक में करीब 50 आतंकी मारे गए थे
सर्जिकल स्ट्राइक 18 सितंबर 2016 के उरी आतंकी हमले के बाद इंडियन आर्मी ने पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था। 28-29 सितंबर को हुई इस सर्जिकल स्ट्राइक में करीब 50 आतंकी मारे गए थे। सेना ने इस सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देने की तैयारियां 18 सितंबर को हुए आतंकी हमले के बाद से ही शुरू कर दी। उरी हमले के बाद से ही इसकी तैयारियां हो रही थीं कि पीओके में मौजूद आतंकी ढांचे को कैसे तबाह किया जाएगा। भारतीय सेना के द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक में करीब 50 आतंकी मारे गए थे और कई आतंकी कैंप पूरी तरह से तबाह भी हुए थे। ये भी पहली बार हुआ था कि भारतीय सेना ने पाकिस्तानी कैंपों पर हमला किया और इसका एलान भी किया।












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