Droupadi Murmu Speech: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बोलीं- बाबा साहेब अंबेडकर ने हमें मजबूत संविधान दिया
Republic day 2025 President speech: भारत देश के 76वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र को संबोधित किया। राष्ट्रपति के तौर पर द्रौपदी मुर्मू का गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर ये तीसरा संबोधन है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए देश की एकता, अखंडता और विकास पर बल दिया। इसके साथ ही उन्होंने कहा बाबा साहेब अंबेडकर ने हमारे देश को मजबूत संविधान दिया। उन्होंने कहा देश का संविधान सामूहिक अस्मिता का आधार है। संविधान हमारे देश को एकजुट करता है। नैतिकता हमारे जीवन का प्रमुख तत्व है।

राष्ट्रपति ने कहा "संविधान के 75 वर्ष एक युवा गणतंत्र की सर्वांगीण प्रगति द्वारा चिह्नित हैं। स्वतंत्रता के समय और बाद में भी, बड़े पैमाने पर देश के कुछ हिस्सों को अत्यधिक गरीबी और भुखमरी का भी सामना करना पड़ा, लेकिन एक चीज जिससे हम वंचित नहीं रहे, वह हमारा खुद पर विश्वावस है। जिसके दम पर हम इतने शक्तिशाली देश बन कर उभरे हैं।
उन्होंने कहा मोदी सरकार में देश का विकास तेजी से हुआ। अंतराष्ट्रीय मंच पर भारत का लगातार कद बढ़ा है। इसके साथ ही राष्ट्रपति ने भारत सरकार द्वारा संचालित की जा रही योजनाओं के बारे में बात करते हुए कहा कि इन योजनाओं से देश के लाखों लोग लाभान्वित हो रहे है। इन योजनाओं ने लोगों के जीवन में खुशहाली लाई है।
ओबीसी,एससी, एसीटी छात्रों को योजनाओं का मिल रहा लाभ
राष्ट्रपति ने सरकार द्वारा युवाओं के कौशल विकास और शिक्षा के लिए शुरू की गई योजनाओं के बारे में बात की और कहा ओबीसी,एससी, एसीटी सभी वर्गो के छात्रों को योजनाओं का लाभ मिल रहा है। अनुसूचित जाति छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति, राष्ट्रीय फेलोशिप, विदेशी छात्रवृत्ति, छात्रावास और कोचिंग सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना रोजगार और आय सृजन के अवसरों को जोड़कर अनुसूचित जाति समुदायों के बीच गरीबी को कम करने में प्रगति कर रही है।
महाकुंभ हमारी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर है
राष्ट्रपि द्रौपदी मुर्म ने अपने संबोधन मे प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ का जिक्र किया। उन्होंने कहा महाकुंभ हमारे समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर की अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा सकता है। हमारे पारंपरिक रीति-रिवाजों और संस्कृतियों को संरक्षित और पुनर्जीवित करने के लिए कई रोमांचक पहलों की शुरुआत की जा रही है। राष्ट्र पति ने कहा भारत एक अत्यधिक भाषाई विविधता का केंद्र है। इस समृद्धता को संरक्षित करने और मनाने के लिए, सरकार ने असमिया, बांग्ला, मराठी, पाली और प्राकृत को शास्त्रीय भाषाओं के रूप में मान्यता दी है।












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