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कोरोना काल में मनरेगा मजदूरों में रिकॉर्ड उछाल, अप्रैल से 83 लाख बने नए जॉब कार्ड

नई दिल्ली। कोरोनावायरस प्रेरित लॉकडाउन से तबाह हुई अर्थव्यवस्था के बीच शहर छोड़ने को मजबूर हुए प्रवासी मजदूरों की बेरोजगारी को मनरेगा के तहत भारी संख्या में रोजगार मिला है। इसकी तस्दीक करती है ताजा रिपोर्ट, जिसमें कहा गया है कि अप्रैल से अब तक करीब 83 लाख नए नरेगा कार्ड बने है, जो पिछले 7 वर्षों में नरेगा मजदूरों में बड़ी उछाल है।

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    महामारी में तेजी से बढ़ी बेरोजगारी ने प्रवासी मजदूरों का किया बुरा हाल

    महामारी में तेजी से बढ़ी बेरोजगारी ने प्रवासी मजदूरों का किया बुरा हाल

    गौरतलब है कोरोना महामारी के काल में तेजी से बढ़ी बेरोजगारी खासकर प्रवासी मजदूरों का बुरा हाल कर दिया। ऐसे में मनरेगा उनके लिए वरदान साबित हुआ है। चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों के दौरान इस योजना के तहत 83 लाख से अधिक नए परिवारों को जॉब कार्ड जारी किए गए हैं। यानी 1 अप्रैल से 3 सितंबर के बीच मनरेगा मजदूरों में रिकॉर्ड संख्या में वृद्धि वृद्धि हुई है।

     2019-20 वर्ष में 64.70 लाख मनरेगा के नए जॉब कार्ड जारी किए गए थे

    2019-20 वर्ष में 64.70 लाख मनरेगा के नए जॉब कार्ड जारी किए गए थे

    डेटा के मुताबिक पूरे 2019-20 वर्ष में 64.70 लाख मनरेगा के नए जॉब कार्ड जारी किए गए थे, जिसमें 28.32 फीसदी की छलांग कोरोना काल में लगा है। निः संदेह नए मनरेगा जॉब कार्डों में यह वृद्धि महामारी के चलते राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन से आई है। प्रवासी मजदूरों को मजबूर होकर बड़ी संख्या में अपने गांव लौटना पड़ा।

    उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 21.09 लाख मनरेगा जॉब कार्ड बने हैं

    उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 21.09 लाख मनरेगा जॉब कार्ड बने हैं

    83.02 लाख नए जॉब कार्ड में से सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में 21.09 लाख में बने है। इसके बाद बिहार में 11.22 लाख, पश्चिम बंगाल में 6.82 लाख, राजस्थान में 6.58 लाख और मध्य प्रदेश में 5.56 लाख लोग शामिल हुए हैं। इसमें बड़ी संख्या में अपने गांव लौटने वाले प्रवासी मजदूर शामिल हैं।

    मनरेगा के तहत आने वाले सभी ग्रामीण परिवार एक जॉब कार्ड मिलता है

    मनरेगा के तहत आने वाले सभी ग्रामीण परिवार एक जॉब कार्ड मिलता है

    मनरेगा के तहत आने वाले सभी ग्रामीण परिवार एक जॉब कार्ड मिलता है, जिसमें घर के सभी वयस्क सदस्यों के नाम और फोटो होते हैं, जो काम कर सकते हैं। मनरेगा के नियमों के अनुसार अगर किसी घर के लोग स्थायी रूप से शहरी क्षेत्रों में चले गए हैं या किसी और ग्राम पंचायत में चले गए हैं तो उनका जॉब कार्ड रद्द किया जा सकता है। इस वित्तीय वर्ष में अब तक 10.39 लाख नरेगा जॉब कार्ड रद्द किए गए हैं। वहीं साल 2019-20 में 13.97 लाख कार्ड रद्द किए गए थे। 3 सितंबर, 2020 तक देश में जॉब कार्डों की संचयी संख्या 14.36 करोड़ है।

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