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रक्षा बजट का कोई जिक्र नहीं, जेटली की गुगली पर बोल्‍ड हुए विशेषज्ञ

नई दिल्‍ली। वर्ष 2016-2017 के लिए वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने बजट पेश कर दिया है। जहां कृषि, टैक्‍स और दूसरे क्षेत्रों के विशेषज्ञ इस बजट को रेटिंग देने में लगे हुए हैं तो वहीं रक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों को जेटली ने सिर खुजलाने पर मजबूर कर दिया है।

उन्‍हें समझ ही नहीं आ रहा है कि आखिर वित्‍त मंत्री ने अपनी स्‍पीच में रक्षा बजट का जिक्र किया है या नहीं किया है और अगर नहीं किया है तो इसकी वजह क्‍या है? साफ है वित्‍त मंत्री और सरकार की इस गुगली ने सबको क्‍लीन बोल्‍ड कर दिया है।

विशेषज्ञों को यह बात और भी ज्‍यादा हैरान कर रही है कि जब सेनाओं की इंफेंट्री और हथियार से जुड़ी जरूरतों को और आधुनिक बनाने की जरूरत है, बजट में रक्षा बजट का कोई जिक्र ही नहीं हुआ है।

बताया जा रहा है कि वित्‍त मंत्री ने 3.41 लाख करोड़ रुपए की रकम रक्षा क्षेत्र के लिए तय की है। इसमें से 82,000 करोड़ रुपए पेंशन के लिए निर्धारित हैं। लेकिन हर वर्ष की तरह इस वर्ष इसका जिक्र न होना हैरान करने वाली बात है।

एक नजर डालिए कि आखिर क्‍या वजहें हो सकती हैं कि इस बार रक्षा बजट का कोई भी जिक्र वित्‍त मंत्री ने अपनी बजट स्‍पीच में नहीं किया है।

इतिहास में पहला मौका

इतिहास में पहला मौका

देश के इतिहास में यह पहला मौका है जब सरकार ने बजट में रक्षा के लिए कितना खर्च या कितनी रकम तय की गई है, इस बारे में कोई ऐलान नहीं किया है। एयर मार्शल (रिटायर्ड) बीके पांडे इस बात को लेकर काफी हैरान हैं।

 तो क्‍या कम है इस बार का रक्षा बजट

तो क्‍या कम है इस बार का रक्षा बजट

हो सकता है कि इस बार रक्षा बजट पिछले वर्ष की तुलना में कुछ कम हो और इसलिए ही इसका कोई भी ऐलान नहीं किया गया हो। इकोनॉमिट टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने जो रकम तय की है उसमें से 82 हजार करोड़ को अगर निकाल दिया जाए तो रक्षा बजट 2.49 लाख करोड़ रुपए आता है। यह पिछले वर्ष की तुलना में सिर्फ 4.8 प्रतिशत ही ज्‍यादा है।

कोई रणनीतिक सोच

कोई रणनीतिक सोच

लोगों को लग सकता है कि इसके पीछे कोई रणनीतिक सोच हो लेकिन एयर मार्शल पांडे इस बात को मानने से इंकार कर देते हैं। उनका कहना है कि बजट का जिक्र न करना रणनीति का हिस्‍सा नहीं हो सकता है।

ओआरओपी का बोझ

ओआरओपी का बोझ

हो सकता है कि सरकार पर वन रैंक वन पेंशन का जो बोझ बढ़ा है, उसकी वजह से ही इस बार रक्षा बजट का कोई भी जिक्र नहीं किया गया है।

पार्रिकर का दबाव

पार्रिकर का दबाव

रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर ने बजट सत्र के दौरान डिफेंस बजट से जुड़ी कई अहम बातें कही थीं। उन्‍होंने कहा था कि अगर सेनाओं के लिए पेंशन को बजट में शामिल किया जाए तो यह जीडीपी का करीब 2.2 प्रतिशत होता है। अगले आठ वर्षों के अंदर एलसीए की आठ स्‍क्‍वाड्रंस को तैयार करना है। इसके साथ ही उन्‍होंने मेक इन इंडियर के तहत फाइटर प्‍लेन को खरीदने से जुड़ी बातें भी कहीं थीं।

जीडीपी के मुकाबले कम होता रक्षा बजट

जीडीपी के मुकाबले कम होता रक्षा बजट

भारत का रक्षा बजट वर्ष 2015-2016 में जीडीपी के मुकाबले 1.74 प्रतिशत तक गिर गया है। वर्ष 2014-2015 में रक्षा बजट जीडीपी के मुकाबले 1.78 प्रतिशत था। विशेषज्ञों का मानना है कि देश की सेनाओं पर जीडीपी का करीब तीन प्रतिशत तक खर्च होना चाहिए।

कैसे करेंगे चीन का सामना

कैसे करेंगे चीन का सामना

अगर हम चीन की बात करें तो चीन का रक्षा बजट भारत के रक्षा बजट से कहीं आगे हैं। भारत ने वर्ष 2015-2016 के दौरान सेनाओं पर कुल 13.88% खर्च किया था।

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