मोदी से जिनपिंग की जलन तो नहीं, डोकलाम में भारत-चीन टकराव की वजह!
नई दिल्ली। पिछले एक माह से सिक्किम सेक्टर के डोकलाम में हाई वोल्टेज ड्रामा जारी है। दुनिया की दो ताकतवर सेनाओं के करीब छह हजार सैनिक हिमालय के एक कोन में आमने-सामने खड़े हैं। इस विवाद का हल कब होगा और कैसे होगा, कोई नहीं जानता है। दोनों तरफ की मीडिया की ओर से भी रोज नई तरह की जानकारियां सामने आ रही हैं। चीन की मीडिया ने तो भारत को युद्ध की धमकी तक दे डाली है। जो आज हो रहा है उसकी आशंका तब से ही थी जब भारत ने तिब्बत के निर्वासित नेता दलाई लामा को अरुणाचल दौरे की मंजूरी थी। एक नजर डालिए उन वजहों पर जो डोकलाम में तनाव की वजह हो सकती हैं।

कोई कहता है डोकलाम कोई कहता है डोक ला
सिक्किम सेक्टर के जिस डोकलाम में भारत और चीन के बीच विवाद चल रहा है उसे भूटान डोकलाम कहता है तो भारत ने इसे डोक ला नाम दिया है। वहीं चीन इस हिस्से को डोंगलांग क्षेत्र कहता है। भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर का लंबा बॉर्डर है जो जम्मू कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक फैला है। वहीं 220 किलोमीटर लंबा सेक्शन सिक्किम में आता है।

मोदी के बढ़ते प्रभाव से परेशान जिनपिंग
पीएम मोदी भले ही घरेलू राजनीति में कुछ हद तक अपना प्रभाव छोड़ने में कामयाब न रहे हों लेकिन इस बात को मानने से कोई भी इनकार नहीं करेगा कि अंतराष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने अपनी एक मजबूत राजनेता की पहचान बना ली है। पीएम मोदी हाल ही में रूस की यात्रा पर गए और यहां पर उन्होंने इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम में एक बयान दिया। उन्होंने कहा कि भले ही भारत का चीन से सीमा विवाद जारी है लेकिन पिछले 40 वर्षों में इस सीमा विवाद की वजह से एक भी गोली नहीं चली है।

दुश्मन अमेरिका से बढ़ती करीबी
उनका स्वागत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में किया। जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अमेरिका के दौरे पर गए थे तो उनका स्वागत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लोरिडा के अपने घर में किया था। जिनपिंग को आज से करीब तीन वर्ष पहले एशिया का सबसे मजबूत नेता माना जाता था। पीएम मोदी के आने के बाद से अब उनका ताज खतरे में पड़ गया है। अमेरिका और चीन एक दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाते हैं ऐसे में भारत के साथ बढ़ती करीबी चीन की चिंता की बड़ी वजह हो सकती है।
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दलाई लामा का स्वागत
अप्रैल में भारत सरकार ने तिब्बत के निर्वासित नेता दलाई लामा का अरुणाचल प्रदेश में स्वागत किया। दलाई लामा की इस यात्रा की मंजूरी भारत ने पिछले वर्ष ही दी थी और तब से ही चीन की ओर से धमकियों के आने का सिलसिला जारी था। उनके अरुणाचल दौरे के शुरू होने से पहले चीन के विदेया मंत्रालय ने कहा था कि दलाई लामा का प्रयोग करके भारत अब दुनिया में एक ताकत के तौर पर अपना सम्मान खोता जा रहा है। चीन ने भारत से दलाई लामा का दौरा रोकने की बात भी कही थी। ऐसा नहीं हुआ और फिर चीन की ओर से नतीजे भुगतने की धमकी आई थी।

छोटे-छोटे देशों से संपर्क बढ़ाता भारत
चीन से अलग भारत अब छोटे-छोटे देशों के संपर्क में आ रहा है। श्रीलंका, बांग्लादेश, म्यांमार, विएतनाम, भूटान, नेपाल और ऐसे न जाने कितने देश हैं, जिनसे भारत ने पिछले तीन वर्षों में अच्छे संपर्क बना लिए हैं। ये देश जहां भारत का समर्थन करते हैं तो वहीं चीन की आंख में भी खटकते हैं।

राजनीतिक इच्छा शक्ति का तौल रहा है चीन
डोकलाम में चीनी सेना के टकराव की वजह भू-राजनीतिक मजबूरियां भी हैं। चीन के सैन्य विवाद विवाद का मकसद भूटान के साथ भारत के भूराजनीतिक और सामरिक रिश्तों पर सवाल खड़े करना है। चीन पर नजर रखने वाले एक एक्सपर्ट के मुताबिक, वह इस खास रिश्ते के सैन्य पहलू को टिकाऊ बनाए रखने के लिए भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति को तौल रहा है।

मालाबार युद्धाभ्यास
भारत, अमेरिका और जापान के बीच जारी मालाबार युद्धाभ्यास भी चीन की परेशानियों की अहम वजह है। विशेषज्ञों की मानें तो यह युद्धाभ्यास चीन को एक साफ संदेश है कि वह अंतराष्ट्रीय नियमों को माने। भारतीय महाद्वीप में जिस तरह से चीन की गतिविधियां बढ़ रही हैं उसने सिर्फ भारत बल्कि पूरे विश्व की चिंताएं बढ़ा दी हैं।












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