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Blackbuck : काले हिरण के संघर्ष का 'राज', 12 Stool के DNA उठाएंगे रहस्य से पर्दा

पिछले लंबे समय के काले हिरण की लुप्त होती प्रजाति चिंता का विषय बनी हुई है। IISc के शोधकर्ता अब इसकी वजह जानने के लिए डीएनए रिपोर्ट का सहारा ले रहे हैं।

Blackbuck

Blackbuck : जलवायु परिवर्तन का असर पूरी दुनिया पर पड़ा है। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा है। यहां पिछले कुछ दशकों काफी तेजी से जलवायु परिवर्तन देखे गए। जिसका सीधा असर पर्यवारण पर देखने को मिला रहा है। भारत में वन्य जीव काले हिरण की कम होती संख्या को लेकर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) के शोधकर्ता अब इस स्थिति को कारणों को पता लगाने के लिए अध्ययन कर रहे हैं। इसको के लिए साइंटिस्ट्स की टीम ने 12 उन जगहों का दौरा किया जहां कृष्णमृग यानी काले हिरण रहते हैं।

IISc के प्रोफेसर्स कर रहे शोध

IISc के प्रोफेसर्स कर रहे शोध

ब्लैकबक की भारत में घटती संख्या लंबे समय से रहस्य बनी हुई है। इसकी वजह जानने के लिए IISC के सेंटर फॉर इकोलॉजिकल साइंसेज की ओर एक स्टडी की जा रही है। अध्ययन के वरिष्ठ लेखक प्रोफेसर प्रवीण कारंत के अनुसार किसी जीव की आबादी को बनाए रखने के लिए आनुवंशिक विविधता जरूरी है। क्योंकि जेनेटिक डायवर्सिटी किसी भी जीव की आबादी और पर्यावरण के बदलते परिवेश के लिए अधिक अनुकूल होती है।

कंजर्वेजन जेनेटिक्स की स्टडी में दावा

कंजर्वेजन जेनेटिक्स की स्टडी में दावा

काले हिरण की संख्या को लेकर Conservation Genetics ने चौंकाने वाले आंकड़ें दिए हैं। स्टडी में कहा गया कि जीवों की आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity) से उनके दीर्घकालिक अस्तित्व का संकेत मिलता है और यही उनके संख्या के बीच जीन प्रवाह का आधार भी है। इस स्टीड में एक काले हिरण की प्रजाति यानी एंटीलोप सर्विकाप्रा (Antelope Cervicapra) आनुवंशिक भिन्नता देखी गई और दावा किया गया कि इस प्रजाति के अस्तित्व कार कारण यही है।

8 राज्यों की 12 जगहों के नमूने

8 राज्यों की 12 जगहों के नमूने

भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) की टीम ने भारत के आठ उन राज्यों का दौरा किया जहां काले हिरण की आबादी पाई जाती है। इन राज्यों में कुल 12 अगल- अलग स्थानों से काले हिरण के मल के नमूने एकत्र किए गए। जिनसे ब्लैकबक का डीएनए निकाला गया और आगे के अध्ययन के लिए कम्प्यूटेशनल टूल की सहायता ली गई।

जेनेटिक डेटा में आए ये तथ्य

जेनेटिक डेटा में आए ये तथ्य

शोधकर्ताओं को जेनेटिक डेटा से पता चला है कि काला हिरण पहले दो ग्रुप में विभाजित था। पूर्वी क्लस्टर और दक्षिणी क्लस्टर भौगोलिक रुप से कई मायने में भिन्न हैं। शोधकर्ताओं की टीम ने पाया कि वर्मतान में जलवायु की प्रतिकूलता का असर नर ब्लैकबक्स की संख्या पर असर कम हुआ है। वहीं मादा ब्लैकबक्स की संख्या संतोषजनक नहीं है।

DNA रिपोर्ट से खुलेगा राज

DNA रिपोर्ट से खुलेगा राज

काले हिरण के जीवन का भविष्य अब धरती पर और कितने दिन तक कायम रहेगा? इस सवाल का जवाब जेनेटिक डेटा से नहीं मिला। अब शोधकर्ता काले हिरण के डीएनए और आंत माइक्रोबायोम में परिवर्तनों का अध्ययन कर रहे हैं। इस स्टडी में ये पता लगाया जाएगा की ब्लैकबक्स आधुनिक मानव जीवन से वन्य जीवों को उत्पन्न खतरें के बीच कब तक खुद को सुरक्षित रख पाएगा?

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