बेटी का एक नहीं 4 सरकारी नौकरियों में चयन! पिता चलाते हैं किराने की दुकान, जानिए संघर्ष की असली कहानी
कुछ करने की लगन, कड़ी मेहनत और सकारात्मक सोच अगर किसी के मन मस्तिष्क में एकसाथ हों तो व्यक्ति के लिए कुछ भी असंभव नहीं है। तेलंगाना की बेटी ने ये साबित करके दिखाया है। बोइनापल्ली ज्योति इसकी ताजा उदाहरण हैं, जो एक साधारण से परिवार से संबंधित हैं।
दरअसल, बोइनापल्ली के माता- पिता किराने की दुकान चलाते हैं। लेकिन बेटी का सपना इससे कुछ बड़ा करने का है। प्रतिभा इस बात से ही दिखती है किसी को एक सरकार नौकरी पाने के वर्षों तक संघर्ष करना पड़ता है वहीं ज्योति का अब तक चार- चार सरकारी पद के लिए चयन हो चुका है।

वर्तमान में प्रतियोगिता के दौर में सरकारी नौकरी पाना आसान काम नहीं है। लेकिन हाल ही में जारी गुरुकुल परिणामों में तेलंगाना की ज्योति को चार नौकरियों के लिए चुना गया। हालांकि ज्योति ने कहीं से कोचिंग नहीं ली। वे घर पर रहकर ही सेल्फ स्टडी करती थीं। कॉलेज के शिक्षकों की सलाह और अपनी मेहनत व लगन के दम पर ज्योति ने प्रतियोगी परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन किया।
हाल ही में गुरुकुल विद्यालयों में पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा में बैठने के बाद ज्योति का चयन टीजीटी, पीजीटी, जूनियर लेक्चरर और डिग्री लेक्चरर के पदों के लिए हुआ है।
माता- पिता चलाते हैं छोटी सी दुकान
दरअसल, ज्योति के माता- पिता एक छोटी सी दुकान भी चलाते हैं। जिसमें सभी प्रकार की पूजा सामग्री बेची जाती है। ज्योति समय- समय पर इस दुकान के लिए भी समय निकालती थीं।
कस्तूरबा विद्यालय में टीचर पर हैं ज्योति
ज्योति कस्तूरबा विद्यालय, नेराडीगोंडा में तेलुगु शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने तेलुगू स्नातक ज्योति ने तेलंगाना विश्वविद्यालय से बीएड की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने विद्यालयों में सीआरटी पद के लिए पिछले वर्ष की परीक्षा में प्रथम रैंक हासिल की। उन्होंने 10वीं तक की पढ़ाई सोनाला गांव के जिला परिषद हाई स्कूल से की। इसके बाद बाजार हतनूर मंडल केंद्र के सरकारी जूनियर कॉलेज से अपनी इंटरमीडिएट की शिक्षा पूरी की। उन्होंने उस्मानिया यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की।
परिवार ही नहीं गांव भी करता है गर्व
ज्योति के माता-पिता, रामुलु और लक्ष्मी ने कहा कि वे बहुत खुश हैं कि उनकी बेटी ने चार सरकारी नौकरियां हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि वह दिन-रात बहुत मेहनत से पढ़ाई करती थी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अपने बच्चे के लिए बहुत मेहनत की है। ज्योति की उपलब्धि पर गांव वाले भी खुश हैं।












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