जज लोया मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आई प्रतिक्रियाएं, पढ़ें किसने क्या कहा

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के 3 जजों की बेंच की ओर से आज जस्टिस बीएच लोया की कथित रहस्यमयी मौत की जांच पर फैसला आया। अदालत ने कहा कि लोया के साथ उस वक्त मौजूद 3 जजों के बयान पर संदेह नहीं जताया जा सकता। वहीं इस मामले की कोई जांच नहीं होगी। इसके बाद तमाम लोगों ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। इस मामले में वकील और याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि सीजेआई की अध्यक्षता वाली एससी खंडपीठ ने न्यायाधीश लोया की मौत में स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया और कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट के 2 न्यायाधीशों पर अविश्वास करने का कोई कारण नहीं है, जिन्होंने कहा (हलफनामे में नहीं) कि 3 न्यायाधीश 2 बेड के कमरे में सो गए। ईसीजी और हिस्टोपैथ रिपोर्ट के बावजूद कार्डियक अरेस्ट की कहानी झूठी है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रशांत भूषण ने कहा- यह काला दिन

प्रशांत ने कहा कि न्यायाधीश लोया की मौत में स्वतंत्र जांच की मांग में याचिका खारिज करते हुए एससी ने कहा कि न्यायाधीश झूठ नहीं बोल सकते हैं। उनके शब्द को सत्य माना जाना चाहिए। जो भी न्यायाधीशों से सवाल करता है वह अवमानना का दोषी है!' प्रशांत ने कहा कि मेरी राय में यह सुप्रीम कोर्ट का काला दिन है।

वहीं भारत सरकार के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि याचिका में निजी हित था, सार्वजनिक हित नहीं था। याचिकाकर्ताओं ने होमवर्क नहीं किया। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने ट्वीट कर कहा कि -'जस्टिस लोया के मामले में वाद खारिज हो गया है। स्पष्ट है कि कांग्रेस का घृणित चेहरा सामने आया है। श्री राहुल गांधी ने 150 सांसदों को लेकर शिकायत की थी, जबकि सबकुछ झूठ का पुलिन्दा निकला। श्री राहुल गांधी नहीं चाहते कि गांधी परिवार के अलावा इस देश में कोई शासन चलाए और जो शासन अच्छे प्रकार से चलाता है उसकी छवि को निरन्तर बदनाम करने का प्रयास करते है।'

कांग्रेस नेता और वकील सलमान खुर्शीद ने कहा कि बहुत-से लोग बहुत निराश होंगे, लेकिन यह सर्वोच्च न्यायालय का फैसला है और यदि कोर्ट का मानना है कि हमें इसे स्वीकार करना होगा और इसका सम्मान करना होगा। ज्वाइंट कमिश्नर पुलिस नागपुर शिवाजी ने कहा कि नागपुर पुलिस द्वारा पेशेवर रूप से जांच की गई थी और उन दस्तावेजों और साक्ष्यों को कोर्ट में प्रस्तुत किया गया है, यह फैसला उस आधार पर है। याचिकाएं गलत थीं क्योंकि वे सच्चाई से अनजान थे।

योगेंद्र यादव ने प्रशांत भूषण के ट्वीट के रिट्वीट कर पूछा कि अगर झूठ नहीं बोलते तो उन जजों के बारे में क्या राय है जिन्होंने 12 फरवरी को प्रेस वार्ता की थी।

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