RBI Repo Rate: आरबीआई की मौद्रिक नीति पर बड़ा फैसला, नहीं बदलेगी रेपो रेट, 5.25% पर बरकरार
RBI Repo Rate Unchanged: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार, 6 फरवरी को मौद्रिक नीति को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया है। दिसंबर में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती के बाद इस बार आरबीआई ने ब्याज दरों पर ब्रेक लगाया है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब दुनिया भर में भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बनी हुई हैं और घरेलू आर्थिक संकेतकों पर भी करीबी नजर रखी जा रही है। यह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किए जाने के बाद पहली मौद्रिक नीति समीक्षा थी।

चालू वित्त वर्ष की छठी और अंतिम द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा (Sanjay Malhotra) ने बताया कि मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर ही बनाए रखने का फैसला किया है। इसके साथ ही आरबीआई ने अपना रुख 'न्यूट्रल' रखा है, यानी आगे के फैसले हालात को देखकर लिए जाएंगे।
RBI MPC Decision: महंगाई कम, फिर भी सतर्क आरबीआई
रेपो रेट में कटौती रोकने का यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब खुदरा महंगाई लगातार चार महीनों से 2 प्रतिशत से नीचे बनी हुई है। सरकार ने आरबीआई को यह जिम्मेदारी दी है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई 4 प्रतिशत के आसपास बनी रहे, जिसमें 2 प्रतिशत ऊपर या नीचे रहने की छूट है।
अक्टूबर 2025 में देश की खुदरा महंगाई रिकॉर्ड न्यूनतम स्तर 0.25 प्रतिशत पर पहुंच गई थी। यह आंकड़ा CPI सीरीज शुरू होने के बाद अब तक का सबसे निचला स्तर है। महंगाई में इतनी बड़ी गिरावट के बावजूद आरबीआई ने फिलहाल दरों में और कटौती करने से परहेज किया है।
RBI Policy Rate: फरवरी से अब तक 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती
आरबीआई फरवरी 2025 से अब तक कुल 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर चुका है। फरवरी और अप्रैल में 25-25 बेसिस प्वाइंट तथा जून में 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई थी, जब खुदरा महंगाई में नरमी देखी जा रही थी। हालांकि, अगस्त में केंद्रीय बैंक ने दरों में कटौती रोक दी थी।
दिसंबर 2025 की पिछली मौद्रिक नीति समीक्षा में एक बार फिर 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती करते हुए रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत किया गया था। इसके बाद मौजूदा समीक्षा में आरबीआई ने विराम लेने का फैसला किया है। हालांकि, अगस्त में आरबीआई ने दरों में कटौती रोक दी थी। इसके बाद दिसंबर की मौद्रिक नीति में फिर से 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती करते हुए रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत किया गया था। अब इस स्तर पर आरबीआई ने कुछ समय रुकने का फैसला लिया है।
रुपये की कमजोरी बनी चिंता का कारण
महंगाई में गिरावट के साथ-साथ भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार भी मजबूत बनी हुई है। दूसरी तिमाही में देश की GDP ग्रोथ 8.2 प्रतिशत रही, जो उम्मीद से बेहतर है। सरकार के अनुमान के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है।
हालांकि, सकारात्मक संकेतों के बीच रुपये की गिरावट आरबीआई के लिए चिंता का बड़ा कारण है। पिछले सप्ताह रुपया डॉलर के मुकाबले 92 के पार चला गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। साल 2025 में अब तक रुपया करीब 6 प्रतिशत कमजोर हो चुका है।
कमजोर रुपये के कारण आयात महंगे हो जाते हैं, जिससे आने वाले समय में महंगाई दोबारा बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है। इसी वजह से आरबीआई फिलहाल ब्याज दरों को लेकर ज्यादा सतर्क नजर आ रहा है।
क्या हैं इसके मायने?
आरबीआई ने साफ किया है कि आगे के फैसले आर्थिक आंकड़ों और हालात के आधार पर लिए जाएंगे। महंगाई, रुपये की चाल, वैश्विक स्थिति और आर्थिक विकास दर जैसे कारकों पर लगातार नजर रखी जाएगी। फिलहाल, रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखना और न्यूट्रल रुख अपनाना ही केंद्रीय बैंक को सही रास्ता लग रहा है।












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