भाजपा के लिए एक और 'जुमला' बन गया है राम मंदिर मुद्दा: शिवसेना
नई दिल्ली। केंद्र की एनडीए सरकार में सहयोगी शिवसेना ने एक बार फिर से राम मंदिर मुद्दे को लेकर बीजेपी को घेरा है। शिवसेना ने कहा कि राम मंदिर मुद्दा भारतीय जनता पार्टी के लिए एक और 'जुमला' बन गया है और ये पार्टी के सत्ता से बाहर होने की अहम वजह बन सकता है। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में छपे संपादकीय में शिवसेना ने कहा कि हाल में संपन्न हुए तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को हार मिली है, बावजूद इसके पार्टी इस मुद्दे पर सक्रिय होती नजर नहीं आ रही है। पार्टी आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत की ओर से कहे गए भगवत् गीता के संदर्भ से भी सीख लेने के लिए तैयार नहीं है।

'भगवान राम के लिए "अच्छे दिन" कब आएंगे'
शिवसेना लगातार बीजेपी पर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के मुद्दे को लेकर दबाव बना रही है। हालांकि अब पार्टी ने बीजेपी से पूछा है कि भगवान राम के लिए "अच्छे दिन" कब आएंगे। 'सामना' में छपे संपादकीय में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने कहा कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भगवत् गीता का जिक्र करते हुए बीजेपी के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत दिया, 'लेकिन इसका उपयोग क्या है?। 'सामना' में छपे संपादकीय में शिवसेना ने कहा कि कुंभकर्ण (रावण के भाई को महीनों तक सोने के लिए जाना जाता है) की तरह यह सरकार तीन राज्यों में हार के बाद भी जागने के लिए तैयार नहीं है।

'सामना' में संपादकीय लिखकर बीजेपी को घेरा
दरअसल हाल में संपन्न हुए मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान विधानसभा चुनाव में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा। तीनों राज्यों में बीजेपी की सरकार थी लेकिन कांग्रेस ने यहां जीत दर्ज कर सरकार बना ली है। शिवसेना ने कहा कि पूरा देश चाहता था कि राम मंदिर बने और यही वजह थी कि 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को वोट दिया। हालांकि, यह मुद्दा पार्टी के लिए एक और 'जुमला' बन गया है, इसी के साथ 'वापसी' (सत्ता से बाहर होने) की यात्रा शुरू हो गई है। शिवसेना ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि भगवान राम के लिए 'अच्छे दिन' कब आएंगे, जो पिछले 25 साल से खुले टेंट में रह रहे हैं, जबकि सत्ता में बैठे लोग अपनी सीट पर ही ध्यान दे रहे हैं।

केंद्र और महाराष्ट्र में बीजेपी की सरकार में सहयोगी है शिवसेना
शिवसेना ने दावा किया कि बीजेपी पर राम मंदिर निर्माण को लेकर बड़ा दबाव है। पार्टी की हर बैठक में इसके निर्माण पर सवाल उठाए जा रहे हैं लेकिन इसके हाईकमान के पास इसको लेकर 'कोई जवाब नहीं है'। मराठी दैनिक में छपे संपादकीय ने दावा किया, "आंतरिक तौर पर पार्टी में इस मुद्दे को लेकर बेचैनी है, हालांकि आलाकमान के पास इस पर उचित योजना नहीं है। शिवसेना केंद्र के साथ-साथ महाराष्ट्र में की सरकार में भी बीजेपी की सहयोगी है। पार्टी ने साथ ही मांग की है कि बाबरी मस्जिद गिराने को लेकर दायर केस भी वापस लिए जाएं।












Click it and Unblock the Notifications