मोदी का मास्टर स्ट्रोक, कोविंद का समर्थन करने के लिए मजबूर होगा विपक्ष

कोविंद का नाम इसलिए भी रणनीतिकारों के लिए चौंकाने वाला रहा क्योंकि सियासी रणनीतिकारों ने उनके नाम का कयास भी नहीं लगाया था।

नई दिल्ली। राष्ट्रपति चुनाव 2017 में बीजेपी की ओर से राष्ट्रपति उम्मीदवार कौन होगा इसका खुलासा हो गया है। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने रामनाथ कोविंद का नाम राष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर आगे बढ़ाया है। कोविंद, वर्तमान में बिहार के राज्यपाल हैं। बीजेपी ने जिस तरह से उनके नाम पर दांव खेला है ये दूसरे दलों के लिए चौंकाने वाला जरूर है। देखिए कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इस दांव विरोधी दलों के सियासी गणित को फेल कर दिया है...

पीएम मोदी का चौंकाने वाला दांव

पीएम मोदी का चौंकाने वाला दांव

राष्ट्रपति उम्मीदवार को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर से अपने फैसले से लोगों को चौंका दिया है। जिस तरह से बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता रामनाथ कोविंद को बीजेपी की ओर से राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया, इसे मोदी का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। इसकी वजह भी है क्योंकि राष्ट्रपति चुनाव का गणित देखें तो बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए मजबूत स्थिति में नजर आ रहा था, हालांकि उसे विपक्ष के कुछ दलों के साथ की चाहत थी। प्रधानमंत्री मोदी के इस दांव के बाद कई दल रामनाथ कोविंद को समर्थन करने के लिए मजबूर हो जाएंगे।

समर्थन के लिए इसलिए मजबूर होगा विपक्ष

समर्थन के लिए इसलिए मजबूर होगा विपक्ष

रामनाथ कोविंद का नाम राष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर आगे बढ़ा कर बीजेपी ने बड़ा दांव खेल दिया है। इसके पीछे अहम फैक्टर वोटों के गणित का है। विपक्षी धड़े में नजर आ रहे कई दल रामनाथ कोविंद का समर्थन कर सकते हैं। इनमें बीएसपी, समाजवादी पार्टी और नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू अहम है। इसके अलावा एआईएडीएमके समेत कई और दल कोविंद के नाम पर बीजेपी के साथ आ सकते हैं।

दलित चेहरा होने का मिलेगा फायदा

दलित चेहरा होने का मिलेगा फायदा

बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद बीजेपी के वरिष्ठ नेता रहे हैं। विपक्ष की ओर से मांग की गई थी कि राष्ट्रपति उम्मीदवार राजनीतिक व्यक्ति होना चाहिए। इस मांग को ध्यान में रखते हुए कोविंद का चुनाव प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने किया है। रामनाथ कोविंद, दलित चेहरा भी हैं, ऐसे में दलितों के नाम पर राजनीति करने वाले दल अपने आप ही उनका समर्थन कर सकते हैं। अगर विपक्षी दल ऐसा नहीं करेंगे तो बीजेपी आगामी चुनाव में इस मुद्दे भुना सकती है। विपक्षी दलों पर दलित विरोधी होने का आरोप लगा सकती है।

शोषित वर्ग को सबसे बड़े संवैधानिक पद पर लाने में रोड़ा बनने का आरोप

शोषित वर्ग को सबसे बड़े संवैधानिक पद पर लाने में रोड़ा बनने का आरोप

रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाकर बीजेपी ने कहीं न कहीं शोषित वर्ग को सबसे बड़े संवैधानिक पद पर लाने की कवायद की है। उसकी रणनीति यही है कि अगर विपक्षी दल कोविंद के नाम का समर्थन नहीं करते हैं तो बीजेपी इस मुद्दे को चुनाव में भुनाएगी। बीजेपी दूसरे दलों पर शोषित वर्ग को सबसे बड़े संवैधानिक पद पर लाने में रोड़ा बनाने का आरोप लगाते हुए उन्हें घेर सकती है। ऐसे में बीजेपी के इस दांव से विपक्ष की एकता में फूट के आसार नजर आ सकते हैं।

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