Ram Mandir Ayodhya: कांग्रेस नेता ने पुलवामा से की प्राण-प्रतिष्ठा की तुलना, तो सिद्दारमैया ने ये कह दिया
अयोध्या में भगवान राम लला के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह को लेकर कांग्रेस की उलझन खत्म ही नहीं हो पा रही है। कोई न कोई नेता इस तरह का बयान दे दे रहा है, जिससे पार्टी की फजीहत हो जाती है।
कर्नाटक के मंत्री दशरथैया सुधाकर ने यह कह दिया कि बीजेपी इस कार्यक्रम का उसी तरह से फायदा उठाना चाहती है, जैसे उसने कथित रूप से 2019 के लोकसभा चुनावों में पुलवाना की घटना को लेकर किया था।

निमंत्रण मिलने पर भी नहीं जाने वालों का दुर्भाग्य- प्रमोद कृष्णम
इस बीच रविवार को कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा है कि अगर निमंत्रण मिलने के बावजूद भी कोई इस महान समारोह में शामिल नहीं होता है तो यह उनका दुर्भाग्य है।
बता दें कि कांग्रेस के बड़े नेता, सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह और मल्लिकार्जुन खड़ेगे की उपस्थिति को लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।
हम राम मंदिर के पक्ष में हैं- सिद्दारमैया
कांग्रेस में इस कार्यक्रम को लेकर मतभेद उभरने और अपने मंत्री के बयान के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने यह कहकर स्थिति संभालने की कोशिश की है कि वे लोग मंदिर के पक्ष में हैं और राम मंदिर एक अच्छी खबर है।
सिद्दारमैया ने कहा है, 'हम अयोध्या में राम मंदिर के विरोध में नहीं हैं....हम मंदिर निर्माण के भी खिलाफ नहीं हैं। हम राम मंदिर के पक्ष में हैं......'
पीएम मोदी से नफरत लोकतंत्र का संकेत नहीं है-कांग्रेस नेता
इस बीच राम मंदिर में भगवान राम लला के प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर जारी राजनीति पर पार्टी नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा है, 'लोकतंत्र में यह नहीं होना चाहिए। आप पीएम मोदी का विरोध कर सकते हैं और उनके फैसलों की आलोचना कर सकते हैं, लेकिन पीएम मोदी से नफरत लोकतंत्र का संकेत नहीं है।'
उन्होंने आगे कहा, 'कुछ लोग पीएम मोदी से नफरत करते अपने आप खत्म हो रहे हैं। विरोधी दल के कुछ नेताओं ने अपनी ही चुनी हुई सरकारें गिरा दीं। यह पूरी तरह से तबाही है।'
'यह सबका उत्सव है....भारत का उत्सव है'
कांग्रेस नेता ने कहा कि 'यह नकारात्मक ऊर्जा है...ये नकारात्मक, नास्तिक लोग हैं। जो राम के विरोधी हैं, उनके लिए राजनीति में जगह नहीं होनी चाहिए। भारत के लोग ऐसी नकारात्मकता को पसंद नहीं करते हैं....यह हमारी संस्कृति नहीं है। हमारी संस्कृति ये है कि जब दुश्मन के घर में भी उत्सव होता है तो खुश रहते हैं। और यह सबका उत्सव है....भारत का उत्सव है.....'
निमंत्रण मिला है, लेकिन फिर भी नहीं जाएंगे सीताराम येचुरी
कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) समेत कई दल बीजेपी पर इसे राजनीतिक कार्यक्रम बनाने का आरोप लगाकर उसकी आलोचना कर रहे हैं। सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी कह चुके हैं कि उन्हें निमंत्रण मिला है, लेकिन वे उसमें शामिल नहीं होंगे।
कांग्रेस नेता निमंत्रण मिलने के बावजूद उलझन में
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी को भी प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में शामिल करने के लिए निमंत्रण भेजा गया है, लेकिन अब तक उन्होंने इसपर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है।
राम मंदिर के राष्ट्रीय मुद्दा बनने से परेशान हैं राहुल के करीबी
उधर इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष और राहुल गांधी के बेहद खास सैम पित्रोदा कह चुके हैं कि राम मंदिर एक राष्ट्रीय मुद्दा बन रहा है, जिसने उन्हें परेशान कर दिया है। कांग्रेस पार्टी ने बहुत ही आसानी से इसे उनकी निजी राय बताकर कन्नी काटने की कोशिश की है।
अयोध्या में राम मंदिर का उद्घाटन एक स्टंट है- कर्नाटक में कांग्रेसी मंत्री
कांग्रेस में राम मंदिर को लेकर हो रही इस बयानबाजी के बीच एक ताजा विवाद तब शुरू हो गया जब कर्नाटक के मंत्री डी सुधाकर ने कह दिया कि 'अयोध्या में राम मंदिर का उद्घाटन एक स्टंट है। जनता बेवकूफ नहीं है। हम दो बार बेवकूफ बन चुके हैं। मुझे भरोसा है कि हम तीसरी बार मूर्ख नहीं बनेंगे।'
इस बीच शिवसेना (यूबीटी) के नेता उद्धव ठाकरे को उद्घाटन समारोह का निमंत्रण नहीं मिला है, लेकिन उन्होंने कहा है कि उन्हें अयोध्या जाने के लिए किसी निमंत्रण की आवश्यकता नहीं है।
वहीं उनकी पार्टी के नेता संजय राउत ने कहा,'पीएमओ और सरकार को अपना बेस अयोध्या में शिफ्ट कर लेना चाहिए। वे सिर्फ राम के नाम पर वोट मांगेंगे, क्योंकि उन्होंने और कुछ भी नहीं किया है।'












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