Ram Mandir Ayodhya: लोकसभा चुनावों पर नजर, संकेतों से समझिए बीजेपी की चौंकाने वाली रणनीति

अयोध्या में भगवान राम लला के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह को बीजेपी लोकसभा चुनावों से पहले बहुत बड़ा अभियान बना चुकी है। लेकिन, इसके साथ-साथ पार्टी ने एक ऐसी रणनीति तैयार की है, जिससे वह राम मंदिर और अयोध्याधाम के महिमामंडन के साथ ही अपने जनाधार का भी विस्तार कर सकती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीते साल 30 दिसंबर को अयोध्या पहुंचे थे। यहां उन्होंने महर्षि वाल्मीकि के नाम पर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के उद्घाटन के साथ-साथ कई कार्यक्रमों में भाग लिया था। एक रोडशो में भी शामिल हुए। वह 22 जनवरी को प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के लिए फिर अयोध्या आने वाले हैं।

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महर्षि वाल्मीकि के नाम पर अयोध्याधाम एयरपोर्ट
पीएम मोदी ने अयोध्या एयरपोर्ट का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखा है, तो उसका सियासी संदेश साफ है। देश का वाल्मीकि समाज खुद को महाकाव्य रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि का वंशज मानता है।

अनुसूचित जाति में आने वाले वाल्मीकि समाज की आबादी पूरे देश में फैली है। कई राज्यों में इनकी आबादी काफी प्रभावी भूमिका में है। इससे पहले यूपी में पिछले साल महर्षि वाल्मीकि की जयंती के अवसर पर बीजेपी अनुसूचित जाति सम्मेलन भी आयोजित कर चुकी है।

मीरा मांझी के घर चाय पीकर दो राज्यों को दिया सियासी संदेश
30 दिसंबर को अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना की 10 करोड़वीं लाभार्थी मीरा मांझी के घर पहुंचे थे और चाय पी थी। वह कुछ देर तक उनके घर में रुके और उनके पूरे परिवार वालों से मुलाकात की।

जानकार मानते हैं कि दलित समुदाय की मीरा मांझी के माध्यम से बीजेपी ने यूपी-बिहार की 10 फीसदी आबादी को साधने का प्रयास किया है।

नीले रंग वाले गमछे की 'ताकत' कम मत समझिए
एक और गौर करने वाली बात है। उस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में जो रोड शो किया था, उसमें उनके कंधे पर नीले रंग का गमछा था। पीएम मोदी मौके के मुताबिक पहनावे का बहुत ख्याल रखते हैं।

खासकर यूपी की राजनीति में बीएसपी की वजह से नीला रंग दलितों की सियासत का प्रतीक बन चुका है। ऐसे में पीएम मोदी जिस तरह से नीला गमछा लेकर अयोध्या वालों के बीच घूमते रहे, उसमें भी बड़ा संदेश छिपा लगता है।

देश में दलितों की चुनावी हैसियत समझिए
अकेले 80 लोकसभा सीटों वाले यूपी में दलितों की आबादी 21 फीसदी से अधिक बताई जाती है। वहीं पूरे देश में अनुसूचित जाति की जनसंख्या करीब 24 फीसदी है। यानी की कुल जनसंख्या की करीब एक-चौथाई।

देश की 545 लोकसभा सीटों में से 84 सीटें अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं। यूपी में ही 17 सीटें दलितों के लिए रिजर्व हैं।

उत्तर प्रदेश में दलित वोट बैंक की सबसे बड़ी दावेदार बहुजन समाज पार्टी का राजनीतिक दबदबा लगातार घटा है और इसी की वजह से बीजेपी को वहां अपना जनाधार बढ़ाने का बहुत बड़ा मौका दिख रहा है।

2014 में पार्टी यूपी की सभी आरक्षित सीटें जीत गई थी। लेकिन, 2019 में सपा-बसपा के गठबंधन की वजह से दो सीटें बीएसपी के खाते में चली गई थी।

बीजेपी का टारगेट बड़ा है तो तैयारी भी बड़ी कर रही है
वैसे भी पार्टी अबकी बार 400 के पार जाने का लक्ष्य लेकर चल रही है, ऐसे में हिंदुत्व के साथ-साथ दलित-आदिवासियों पर फोकस पार्टी की रणनीति का मुख्य हिस्सा लग रहा है।

भारतीय हज यात्रियों के लिए सऊदी अरब से किया करार
राम मंदिर के उद्घाटन की वजह से भले ही इस समय बीजेपी पूरी तरह से 'राममय' लग रही है। लेकिन, मोदी सरकार मुसलमानों के धार्मिक मान्यताओं को भी महत्त्व देने की कोशिशों में पीछे नहीं है। वह मुसलमानों का भी दिल जीतने का प्रयास करती नजर आ रही है।

इस काम के लिए खास तौर पर केंद्रीय महिला और बाल विकास और अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री स्मृति ईरानी सऊदी अरब गई हुई हैं। उनके साथ विदेश मामलों के राज्यमंत्री वी मुरलीधरन भी वहां मौजूद हैं।

हज यात्रा 2024 में भारतीय हज यात्रियों का कुल कोटा हुआ 1,75,025
इस दौरान दोनों दशों के बीच जेद्दा में द्वपक्षीय हज समझौता 2024 किया गया है। इसकी वजह से 2024 में हज यात्रा पर जाने वाले भारतीय तीर्थयात्रियों का कुल कोटा 1,75,025 कर दिया गया है।

इनमें से 1,40,020 हज यात्री भारतीय हज कमेटी के माध्यम से तीर्थ यात्रा पर जा सकेंगे। अन्य 35,005 हज यात्रियों को हज ग्रुप ऑपरेटरों के माध्यम से वहां जाने का मौका मिलेगा।

'सबका साथ' वाली थीम पर भी कर रही है काम
यह समझौता विशेष रूप से पहली बार हज यात्रा पर जाने वालों के लिए काफी फायदेमंद बताया जा रहा है। यूपी में मुसलमानों की आबादी करीब 20 फीसदी बताई जाती है।

सऊदी अरब से हज यात्रा पर करार के माध्यम से मोदी सरकार ने मुसलमानों को भी यह संदेश दिया है कि अगर वह राम मंदिर के निर्माण को प्रमुखता दे रही है तो मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं का भी पूरा सम्मान करती है। यह पीएम मोदी के 'सबका साथ' वाली थीम पर आधारित है।

22 जनवरी को यूपी में मीट दुकानें बंद रखेंगे पसमांदा मुसलमान-रिपोर्ट
भारतीय जनता पार्टी शायद अपनी इस रणनीति को लेकर खुश हो सकती है। क्योंकि, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यूपी के पसमांदा मुसलमानों ने योगी आदित्यनाथ सरकार को एक ज्ञापन सौंपकर यह बताया है कि 22 जनवरी को जिस दिन अयोध्या में प्राण-प्रतिष्ठा का आयोजन किया गया है, उस दिन प्रदेश में मीट की दुकानें स्वेच्छा से बंद रखी जाएंगी।

यहां यह भी गौर करने वाली बात है कि पसमांदा मुसलमान पिछले कुछ वर्षों से बीजेपी और खासकर पीएम मोदी के एजेंडे में रहे हैं और उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं से उनके साथ संवाद बढ़ाने को भी कहा है।

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