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रक्षाबंधन 2025: भाई-बहन के अटूट स्नेह की मिसाल, किडनी देकर बचाई एक-दूसरे की जान

आज 9 अगस्त को पूरे देश में रक्षाबंधन 2025 का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह दिन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और त्याग का प्रतीक है। आमतौर पर बहनें भाइयों से रक्षा का वचन लेती हैं, लेकिन इस बार हम आपको ऐसी कहानियां बता रहे हैं, जहां राखी का धागा सिर्फ वचन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भाई-बहन ने अपनी किडनी देकर एक-दूसरे की जान बचाई। रक्षाबंधन सिर्फ मिठाइयों और उपहारों का त्योहार नहीं, बल्कि ऐसा बंधन है जो जिंदगी को नई ऊंचाई तक ले जा सकता है।

इन कहानियों में एक बात साफ है-राखी सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि जीवन भर निभाने का वादा है। कभी बड़ी बहन भाई की जान बचा रही है, कभी छोटा भाई बहन को मौत के मुंह से खींच ला रहा है। और कभी-कभी धर्म, दूरी और परंपरा से ऊपर उठकर भाई-बहन का रिश्ता बस इंसानियत के धागे से बंधा होता है। रक्षाबंधन 2025 पर ये कहानियां हमें याद दिलाती हैं कि असली तोहफा वह है, जो जिंदगी को नया रंग दे दे।

Raksha Bandhan 2025

1. बागपत की कहानी: बड़ी बहन बनी जीवनदाता

बागपत निवासी अधिवक्ता अनुज भारद्वाज की दोनों किडनियां फेल हो गई थीं। पिता की किडनी मैच हुई, लेकिन उम्र अधिक होने के कारण डॉक्टरों ने लेने से मना कर दिया। ऐसे में उनकी बड़ी बहन, कंकरखेड़ा सुभाषपुरी निवासी मीरा शर्मा बिना किसी हिचक के आगे आईं। साल 2016 में किडनी ट्रांसप्लांट हुआ और अनुज को नया जीवन मिला। अनुज कहते हैं-"दीदी बचपन से ही दूसरों की मदद करने की सीख देती रही हैं। आज भी उनका आशीर्वाद मेरे साथ है।"

2. अमरोहा की कहानी: छोटे भाई ने निभाया राखी का असली वचन

अमरोहा निवासी पारुल अग्रवाल की किडनी खराब हो चुकी थी और हर तरफ निराशा थी। लंबा इलाज चला, लेकिन आखिर में डॉक्टरों ने कहा कि ट्रांसप्लांट ही एकमात्र उपाय है। तभी उनके छोटे भाई अंकित अग्रवाल ने कहा-"मैं अपनी बहन को किडनी दूंगा।" साल 2020 में ऑपरेशन सफल हुआ और आज पारुल अपने भाई की बदौलत अपनी दोनों बेटियों की परवरिश कर पा रही हैं। वह कहती हैं-"भाई ने राखी का असली फर्ज निभाया।"

3. बिहार की कहानी: खुशबू कुमारी की दोनों किडनियां फेल हुईं

बिहार के कन्हैया चक गांव की खुशबू कुमारी की दोनों किडनियां 2017 में फेल हो गईं। ससुराल वालों ने किडनी देने से मना कर दिया, लेकिन मायके के पांच भाइयों में सबसे छोटे राजेश कुमार उर्फ गनी ने बिना झिझक अपनी किडनी दान कर दी। राजेश ने कहा-"अगर बहन नहीं रहेगी तो मुझे राखी कौन बांधेगा? यही वक्त था कि मैं राखी का हक अदा करूं।" आज खुशबू हर साल राखी भेजती हैं और राजेश गर्व से कहते हैं कि यह उनके जीवन का सबसे बड़ा गौरव है।

4 मध्य प्रदेश की कहानी: रिटायर टीचर बहन ने दी किडनी

मध्य प्रदेश के राजगढ़ में मई 2024 में 58 वर्षीय गिरीश शर्मा की दोनों किडनियां फेल हो गईं। संयुक्त परिवार में रहने वाली उनकी 64 वर्षीय बहन शकुंतला शर्मा, जो रिटायर्ड टीचर हैं, ने बिना सोचे-समझे अपनी किडनी दे दी। गिरीश आज पूरी तरह स्वस्थ हैं और कहते हैं। "रक्षाबंधन पर बहन ने सच में मेरी रक्षा की।" यह परिवार आज भी एक साथ खाना बनाता है, एक टीवी देखता है और संयुक्त परिवार की मिसाल पेश करता है।

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