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पाकिस्तानी लेखक की किताब पर राज्यसभा में एक प्रश्न पूछे जाने पर क्यों हो रही है आपत्ति ? जानिए

राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल पर ही प्रश्न खड़ा कर दिया गया है। प्रश्न पाकिस्तानी लेखक की एक किताब पर उठा है और सैकड़ों शिक्षाविदों को लगता है कि इस सवाल के पीछे की मंशा कुछ और है।

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राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल को लेकर ढाई सौ से ज्यादा शिक्षाविदों और विद्वानों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। यह सवाल एक पाकिस्तानी लेखक की किताब को लेकर है, जिसमें कथित तौर पर कुछ आपत्तिजनक बातें लिखी गई हैं। लेकिन, जो प्रश्न राज्यसभा के सामने आया है, उसमें न तो उस पाकिस्तानी लेखक का नाम बताया गया है और न ही किताब के बारे में ही जानकारी है कि उसका नाम क्या है। प्रश्न पूछे जाने पर आपत्ति जताने वाले लोगों का संदेह है कि यह सब जानबूझकर किसी खास मकसद से किया जा रहा है। प्रश्न भाजपा के सांसद हरनाथ सिंह यादव ने पूछा है।

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पाकिस्तानी लेखक के किताब पर 'प्रश्न'चिन्ह
देश के 250 से अधिक शिक्षाविदों और विद्वानों ने राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल को लेकर आपत्ति जताई है। इस प्रश्न को उच्च सदन में बुधवार के लिए सूचीबद्ध किया गया था। यह प्रश्न एक पाकिस्तानी लेखक के किताब से संबंधित है, जो कि भारतीय शिक्षण संस्थानों के पाठ में शामिल है। इसको लेकर 16 मार्च को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों से इसके बारे में पूरी डिटेल देने को भी कहा है। राज्यसभा में जो प्रश्न है, उसमें कहा गया है, 'सरकार ने क्या इस तथ्य का संज्ञान लिया है कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, जामिया मिलिया इस्लामिया या देश के किसी अन्य शिक्षण संस्थान में एक पाकिस्तानी लेखक की पुस्तक पढ़ाई जा रही है और इसकी भाषा भारतीय नागरिकों के लिए अपमानजनक है और आतंकवाद का समर्थन भी करती है; यदि हां, तो इसकी डिटेल क्या है और क्या सरकार को कथित पाकिस्तानी लेखक द्वारा लिखे गए पाठ पुस्तक के संदर्भों की जांच करने पर विचार करना चाहिए और इसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए.....'

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'सवाल 'जानबूझकर अस्पष्ट' है'
इस सवाल पर आपत्ति जताने वाले शिक्षाविदों और विद्वानों ने यह हैरानी जताई है कि बिना लेखक या किताब का नाम बताए, सरकार विश्वविद्यालयों में जो पढ़ाया जा रहा है, उसे कैसे 'सेंसर' कर सकती है। उनका कहना है कि न तो लेखक का देश और न ही ऐसे पुस्तकों में व्यक्त किए गए विचार उन्हें बाहर करने का कारण बनना चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक सवाल बीजेपी सांसद हरनाथ सिंह यादव की ओर से पूछा गया है। इस प्रश्न पर आपत्ति जताने वालों का कहना है कि भाजपा सांसद का सवाल 'जानबूझकर अस्पष्ट' है।

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    इन लोगों को है 'प्रश्न' पर सवाल
    बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में रोमिला थापर, नंदिता नारायण, सतीश देशपांडे, अपूर्वानंद और आयशा किदवई जैसे लोग शामिल हैं। इसके मुताबिक, 'प्रश्न का विषय किसी विशेष लेखक की कोई विशेष किताब मालूम पड़ती है, लेकिन न तो लेखक और न ही किताब का नाम दिया गया है। निश्चित रूप से यह एक सामान्य त्रुटि नहीं है ? किताब को बिना नाम के छोड़ देने से प्रश्न को यह सुझाव देते हुए पढ़े जाने की छूट मिल जाती है कि किसी भी पाकिस्तानी लेखक की कोई भी किताब जिसे संभवतः 'भारतीय नागरिकों के लिए अपमानजनक' और 'आतंकवाद का समर्थन' करने वाले के रूप में पढ़ा जा सकता है, उसे किसी भी भारतीय विश्वविद्यालय में नहीं पढ़ाया जाना चाहिए।'

    प्रश्न की भाषा पर आपत्ति
    शिक्षाविदों का कहना है कि सवाल में जिस 'कार्रवाई' की बात की गई है, वह एक तरह से किसी खास कोर्स के लिए चुने गए पाठ पर चर्चा और बातचीत की संभावना को खत्म करते हुए दंडात्मक धमकी की तरह है। बयान में यह भी कहा गया है कि 'एएमयू और जामिया जैसे केंद्रीय विश्वविद्यालयों के मुस्लिम पहचान के आधार पर लगातार 'आतंकवाद' से जोड़ने के प्रयासों का भी हर संभव तरीके से विरोध किया जाना चाहिए।'

    जामिया ने कहा- हम नहीं पढ़ाते ऐसी किताब
    इन शिक्षाविदों ने विश्वविद्यालयों की स्वायत्ता पर भी जोर दिया है और कहा है कि 'सरकार शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता को बढ़ावा देकर, संकाय को सशक्त बनाकर और सभी संभावित विषयों पर बहस, आलोचनात्मक विचार और चर्चा को प्रोत्साहित करके अपने संवैधानिक जनादेश को सर्वोत्तम तरीके से पूरा करते हुए लोकतांत्रिक दायरा बना सकती है।' हालांकि, टीओआई के मुताबिक जामिया के रजिस्ट्रार नाजिम हुसैन जाफरी ने कहा है कि उनकी ओर से यूजीसी को यह जानकारी दे दी गई है कि उनके संस्थान में 'ऐसी कोई पाठ नहीं' पढ़ाई जा रही थी।

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