बीजेपी से राज्यसभा चुनाव की हार का बदला कर्नाटक में लेने की तैयारी कर रही हैं मायावती
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर जारी सियासी संग्राम थम गया है। बीजेपी इस चुनाव में सभी सियासी गुणा-गणित साधते हुए अपने 9वें उम्मीदवार को जिताने में कामयाब रही। इसी के साथ भारतीय जनता पार्टी ने सपा-बसपा गठबंधन से उस हार का बदला भी ले लिया, जो उसे दो हफ्ते पहले यूपी की दो लोकसभा सीटों फूलपुर और गोरखपुर में मिली थी। दरअसल यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव हुए। इसमें बीजेपी के 8 उम्मीदवारों की जीत पहले से तय थी, वहीं सपा के एक उम्मीदवार का चुना जाना तय था। नतीजों में ये देखने को भी मिला। हालांकि असली मुकाबला राज्यसभा की 10वीं सीट के लिए था।

मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने इस सीट के लिए भीमराव अंबेडकर को उम्मीदवार बनाया। दूसरी ओर बीजेपी ने भी अपने 9वें कैंडिडेट के तौर पर अनिल अग्रवाल को मैदान में उतारकर चुनाव समीकरण बिगाड़ दिया। राज्यसभा चुनाव में मुकाबला कांटे का रहा, हालांकि इसमें आखिर दांव बीजेपी के ही हाथ लगा और पार्टी ने शानदार जीत दर्ज की। इस तरह से बीजेपी ने लोकसभा उपचुनाव में अपनी हार का बदला एक तरह से सपा-बसपा गठबंधन से ले लिया। भले ही यूपी में छिड़ा सियासी संग्राम थम गया हो लेकिन बीएसपी सुप्रीमो मायावती राज्यसभा चुनाव में मिली हार का बदला लेने की पूरी रणनीति बनाने में जुट गई हैं। मायावती की निगाहें अब कर्नाटक के विधानसभा चुनाव पर हैं, जहां बीजेपी को कड़ी टक्कर देने की योजना मायावती बना रही हैं। जानिए कर्नाटक में बीजेपी को घेरने का क्या है मायावती का पूरा प्लान...।

जानिए क्या है मायावती का कर्नाटक 'प्लान'
उत्तर प्रदेश में हुए राज्यसभा चुनाव में भले ही बीजेपी ने जीत दर्ज की हो, लेकिन इन चुनावों में जिस तरह से मायावती की बीएसपी और अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी एकजुट होकर मैदान में आई, इसका असर आगामी लोकसभा चुनाव में भी दिखाई देगा। सूत्र बता रहे हैं आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर सपा-बसपा गठबंधन में दरार नहीं आएगी। हालांकि अभी आम चुनाव दूर हैं इससे पहले मायावती ने बीजेपी को कर्नाटक विधानसभा चुनाव में घेरने की योजना बनानी शुरू कर दी है। इसकी वजह ये है कि कर्नाटक में करीब 20 फीसदी दलित हैं। ये आंकड़ा दो साल पहले कर्नाटक स्टेट कमिशन फॉर बैकवर्ड क्लासेस की ओर से सामने आया था। ये रिपोर्ट अब लोगों के सामने है। 2016 में ये रिपोर्ट लीक हुई थी, इसमें पता चला था कि दलित समूह राज्य में सबसे बड़ा समूह है, इसके बाद मुस्लिमों की आबादी है, जो करीब 16 फीसदी है। इसी गणित को देखते हुए मायावती अब बीजेपी को कर्नाटक में घेरने की योजना बना रही हैं।

जेडीएस से गठबंधन की तैयारी में बीएसपी सुप्रीमो
प्रदेश के जातीय गणित पर नजर डालें अपर कास्ट लिंगायत जो प्रदेश में करीब 14 फीसदी हैं वो बीजेपी के पारंपरिक वोटर माने जाते हैं, वहीं वोक्कालिग करीब 11 फीसदी हैं, ये देवेगौड़ा की पार्टी जेडी(एस) को समर्थन करता रहा है। देवगौड़ा के जेडी (एस) का समर्थन करने वाले ऊपरी जाति लिंगायत, परंपरागत रूप से भाजपा के मतदाताओं और वोक्कलिग्स, क्रमशः 14% और 11% के लिए खाते हैं। दोनों ग्रुप की प्रदेश के सियासी गलियारे में अच्छी पकड़ है। हालांकि ये भी कहा जा रहा है कि कर्नाटक में जीत के लिए अनुसूचित जाति के वोटरों को भी पार्टियों को रिझाना होगा। चाहे बीजेपी हो या फिर कांग्रेस या फिर जेडीएस तीनों ही पार्टियों को जीत के लिए इस खास वर्ग को भी साधने की जरूरत होगी। ऐसी स्थिति में कर्नाटक में बीएसपी सुप्रीमो मायावती का रोल बेहद अहम हो सकता है।

अब अमित शाह को कर्नाटक में घेरेंगी मायावती?
जानकारी के मुताबिक देवेगौड़ा की पार्टी जेडीएस कर्नाटक की राजनीति में करीब एक दशक बाद फिर से वापसी की रणनीति बना रही है। यही वजह से जेडीएस अब मायावती की पार्टी के साथ शुरूआती गठबंधन की योजना बनाने जुट गई है। अगर ऐसा होता है तो इस बात की संभावना है कि बीएसपी प्रदेश में दलित प्रभाव वाली 60 सीटों में से 20 सीटों पर उम्मीदवार उतार सकती है। इनका असर दलित वोटरों पर होगा। देवेगौड़ा की पार्टी जेडीएस का प्लान है कि राज्यसभा चुनाव में जिस तरह से मायावती के उम्मीदवार को हार मिली, दलित वोटरों के बीच इस मुद्दे को भुनाया जाए।

जेडीएस से चुनाव पूर्व गठबंधन की तैयारी
दूसरी ओर कर्नाटक में अगर मायावती ने चुनाव पूर्व गठबंधन किया तो इसका असर कांग्रेस और बीजेपी पर होगा। हालांकि खुद मायावती भी प्री-पोल अलायंस को लेकर अभी पूरी तरह से तैयार नजर नहीं आ रही हैं। हालांकि 2014 के आम चुनाव में अपने सोशल इंजीनियरिंग की रणनीति के फेल होने के बाद अब नई रणनीति बनाई है। यही वजह है कि उन्होंने यूपी के लोकसभा उपचुनाव के दौरान सपा के साथ गठबंधन का फैसला लिया। अब उन्होंने कर्नाटक में देवेगौड़ा के साथ गठबंधन की रणनीति को फाइनल किया है।

सपा-बसपा गठबंधन की तय होगी फाइनल रणनीति
बसपा सुप्रीमो के सियासी गणित को देखें तो अगर कर्नाटक में पार्टी को कोई फायदा मिला तो 2019 के लोकसभा चुनाव में मायावती एक बार फिर से अखिलेश यादव के साथ गठबंधन करके मैदान में उतर सकती हैं। फिलहाल अब नजरें कर्नाटक विधानसभा चुनाव पर हैं, जिसके नतीजे बीएसपी सुप्रीमो मायावती के अगले दांव की ओर इशारा करेंगे।
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